एचआईवी के उच्च जोखिम वर्ग में शामिल हैं सुई से नशा लेने वाले लोग – डॉ. हीरा लाल

आपसी समन्वय बनाकर एड्स नियंत्रण कार्यक्रम में लायें तेजी : डॉ. हीरा लाल

– क्षय रोग अधिकारियों से नियमित ऑनलाइन बैठक करने के दिए निर्देश

– यूपी स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी की बैठक में सपोर्ट यूनिट ने दी प्रस्तुति 

लखनऊ। नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (नाको) द्वारा यूपी स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी को टेक्निकल सपोर्ट प्रदान करने के लिए बनायी गयी स्ट्रेटजिक एक्सपर्टाइज एंड टेक्निकल यूनिट (सेतु) की प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक सोमवार को हुई। सोसायटी कार्यालय में हुई बैठक की अध्यक्षता करते हुए अपर परियोजना निदेशक डॉ. हीरा लाल ने एड्स नियंत्रण कार्यक्रम में नवाचार को बढ़ावा देने के साथ ही विभागों से समन्वय बनाने और अन्य राज्यों के बेहतर कार्यों को अपनाने के निर्देश दिए। बैठक में वर्चुअल माध्यम से नाको भारत सरकार के अधिकारी और टेक्निकल सपोर्ट यूनिट के उच्चाधिकारी भी शामिल हुए।

 बैठक की औपचारिक शुरुआत सेतु के क्लस्टर टीम लीडर हर्मेन्द्र पाल सिंह के स्वागत अभिभाषण से हुई। इसके बाद सेतु टीम के तकनीकी विशेषज्ञ पवन चंदेल ने प्रदेश के एचआईवी/एड्स कार्यक्रम की वर्तमान अवस्थिति से अवगत कराया। सेतु टीम ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सोसाइटी द्वारा चलाए जा रहे एचआईवी बचाव कार्यक्रम के बारे में विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया। 

 इस अवसर पर डॉ. हीरा लाल ने राज्य और जनपदीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए आपसी समन्वय और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि सेतु टीम द्वारा किए जा रहे कार्यो की योजना जमीनी स्तर से बनकर आनी चाहिए। सेतु टीम के लिए फील्ड में काम कर रहे प्रोग्राम फील्ड ऑफिसर की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए कार्य योजना निर्माण में उनके अनुभव व सुझावों को शामिल किया जाए। सोसायटी अधिकारियों और सेतु टीम सदस्यों द्वारा प्रत्येक जनपद और दिशा केंद्रों से समन्वय बढ़ाने और जिला क्षय रोग अधिकारियों से नियमित ऑनलाइन बैठक करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही टेक्निकल सपोर्ट यूनिट द्वारा प्रत्येक माह की गतिविधियों का आकलन और आवश्यक सुधार किए जाने के उद्देश्य से हर माह सेतु टीम की समीक्षा बैठक भी सोसाइटी स्तर पर करायी जाये। बैठक के दौरान डॉ. हीरा लाल ने नवाचार को बढ़ावा देने और अन्य राज्यों द्वारा किए जा रहे बेहतर कार्यो का अनुकरण करते हुए कार्यक्रम को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहाकि सुई से नशा लेने वाले लोग एचआईवी के उच्च जोखिम वर्ग में शामिल हैं। इनकी पहचान कर नशा छोड़ने के बारे में उन्हें जागरूक करें। इसके लिए मद्यनिषेध एवं समाज उत्थान विभाग और राष्ट्रीय हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। बैठक में सोसायटी के कई वरिष्ठ अधिकारी और टेक्निकल सपोर्ट यूनिट सेतु के क्लस्टर टीम लीडर सहित सभी कार्मिक उपस्थित रहे। इनमें रमेश चंद्र श्रीवास्तव, सुनील मिश्रा, अजय शुक्ला, नीरज श्रीवास्तव, डॉ. माया बाजपेई, संगीता श्रीवास्तव, अवनीश आदि मुख्य रूप से शामिल रहे।