Monday , January 12 2026

व्यापारी हित की बात या वर्चस्व की जंग, संगठनों की भीड़ में उलझा व्यापारी

व्यापारिक संगठनों की भरमार, एकजुटता की जगह गुटबाजी

लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। कभी व्यापारी संगठनों की पहचान एकजुटता, संघर्ष और व्यापारी हितों की मजबूती से होती थी। चुनिंदा संगठन होते थे और सभी व्यापारी एक मंच पर खड़े होकर अपनी समस्याओं और अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करते थे। लेकिन समय के साथ हालात बदलते चले गए। व्यापारिक संगठनों में राजनीति की एंट्री हुई और व्यापारी नेताओं के बीच वर्चस्व स्थापित करने की होड़ शुरू हो गई। यही होड़ आज व्यापारिक संगठनों के बिखराव की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है।

प्रदेश की राजधानी लखनऊ की बात करें तो बीते एक दशक में यहां व्यापारिक संगठनों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। एक के बाद एक नए संगठन अस्तित्व में आए हैं। हालत यह है कि एक ही बाजार में कई-कई व्यापारिक संगठन अपनी इकाइयां गठित करने की होड़ में लगे हैं। इससे व्यापारियों के बीच एकजुटता कमजोर पड़ती जा रही है और संगठन आपसी प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा बनते जा रहे हैं।

खासतौर पर गोमती पार का इलाका इन दिनों व्यापारिक संगठनों का हब बनता नजर आ रहा है। यहां पहले से सक्रिय प्रमुख संगठनों से जुड़े कई व्यापारी नेताओं ने अलग-अलग नए व्यापार मंडलों का गठन कर लिया है। किसी ने खुद को प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया है तो कोई राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का दावा कर रहा है। सभी व्यापारी हितों की रक्षा और समस्याओं के समाधान के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यापारी खुद असमंजस की स्थिति में हैं।

स्थिति यह है कि कई व्यापारी नेता बार-बार संगठन बदलते नजर आ रहे हैं। आज एक संगठन में पदाधिकारी हैं तो कुछ समय बाद दूसरे संगठन में शीर्ष पद पर दिख जाते हैं। राजनीतिक दलों की तरह तेजी से बढ़ रहे इन व्यापारिक संगठनों के चलते आम व्यापारी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर किस संगठन से जुड़ना उनके हित में होगा। वर्चस्व की इस लड़ाई से परेशान कई व्यापारी सभी संगठनों से दूरी बनाए रखने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं।

हाल ही में ट्रांसगोमती इलाके में दिनदहाड़े एक व्यापारिक प्रतिष्ठान में हुई घटना ने इस गुटबाजी को और उजागर कर दिया। घटना के बाद कई व्यापारिक संगठनों के नेता सक्रिय नजर आए। किसी ने पीड़ित व्यापारी को त्वरित कानूनी मदद दिलाने का दावा किया तो किसी ने प्रशासन पर दबाव बनाने की बात कही। सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करने और बयान जारी करने की होड़ मच गई।

हालांकि स्थानीय पुलिस की तत्परता से महज एक दिन के भीतर ही वारदात का खुलासा कर दिया गया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बावजूद व्यापारी नेताओं के बीच श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा खत्म नहीं हुई। एक ही बाजार में प्रतिष्ठान होने और कभी साथ मिलकर व्यापारी हितों के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं के बीच खुलकर गुटबाजी सामने आ गई। इस आपसी खींचतान को देख स्थानीय व्यापारी भी हैरान रह गए।

व्यापारियों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो संगठनों की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों कमजोर पड़ते जाएंगे। जरूरत इस बात की है कि व्यापारी नेता व्यक्तिगत वर्चस्व और पद की होड़ से ऊपर उठकर वास्तविक व्यापारी हितों के लिए एकजुट होकर काम करें, ताकि संगठन फिर से अपनी खोई हुई पहचान और विश्वास हासिल कर सकें।