प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस पर विशेष (सर्वेश कुमार सिंह) इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक का उत्तरार्ध और तीसरे दशक का भारतीय इतिहास नरेन्द्र मोदी के नाम है। इस इतिहास के निर्माता नरेन्द्र मोदी हैं। भारतीय राजनीति में कई नेता ऐसे हुए हैं जिनकी ख्याति किसी राज्य की सीमा …
Read More »लेख/स्तम्भ
धरती के ऊपर जीवन का अदृश्य सुरक्षा कवच
विश्व ओजोन दिवस (16 सितम्बर) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) हम रोज सूरज को देखते हैं। उसकी रोशनी से दिन होता है और उसकी गर्मी से धरती पर जीवन चलता है। लेकिन सूर्य की रोशनी में कुछ ऐसी किरणें भी होती हैं जो जीव-जगत के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं। …
Read More »सनातन द्रोह की विकृत राजनीति
(मृत्युंजय दीक्षित) सभी राजनैतिक दलों ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां तीव्र कर दी हैं और जनता के मध्य अपने चुनावी मुद्दों व अभियानों के सन्दर्भ में नैरेटिव बनाना भी प्रारम्भ कर दिया है। स्वाभाविक रूप से वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा के …
Read More »ज्ञान से साधना तक गोपीनाथ कविराज की लोक यात्रा
जयंती (7 सितंबर) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) भारतीय ज्ञान-परंपरा में महामहोपाध्याय पंडित गोपीनाथ कविराज का स्थान इसलिए विशिष्ट है कि उनके व्यक्तित्व में शास्त्र और साधना, तर्क और अनुभूति तथा आधुनिक शिक्षा और परंपरागत ज्ञान का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान, दार्शनिक और शोधकर्ता …
Read More »विधायिका की उपेक्षा से बेलगाम होती ब्यूरोक्रेसी
(डॉ. एस.के. गोपाल) उत्तर प्रदेश की अट्ठारहवीं विधानसभा अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। अगले छह-सात महीने में इसका कार्यकाल पूरा हो जाएगा। ऐसे में सरकार के कामकाज के साथ-साथ विधायिका की भूमिका और उसकी प्रभावशीलता का आकलन भी होना चाहिए। दुर्भाग्य से इस कार्यकाल में विधानसभा की संस्थागत शक्ति …
Read More »पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार, स्वस्थ जीवन का आधार
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (01-07 सितम्बर) पर विशेष (मुकेश शर्मा) “आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनं” अर्थात निरोगी होना सबसे बड़ा भाग्य है और बेहतर स्वास्थ्य से ही सभी कार्य सिद्ध होते हैं। संसार की सारी सुख-सुविधाओं, खुशियों और धन-दौलत का भोग भी तभी किया जा सकता है जब निरोगी काया हो। …
Read More »नेपाल की त्रासदी : प्रकृति की चेतावनी को समझने का समय
विकास की दिशा पर पुनर्विचार और प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व ही भविष्य की राह (प्रमिल द्विवेदी) नेपाल में घटित हालिया त्रासदी ने एक बार फिर मानव सभ्यता को गंभीरता से सोचने के लिए विवश किया है कि प्रकृति के साथ हमारे संबंधों की दिशा आखिर किस ओर जा रही …
Read More »पेट्स का खाना बदलने की सोच रहे हैं? जानें सुरक्षित और सही तरीका
(डॉ. अशोक पटनायक, हैड (R&D), गोदरेज पेट केयर) पेट्स के मालिक अक्सर यह मान लेते हैं कि खाना बदलना बस एक कटोरे की जगह दूसरा कटोरा रखने जितना आसान है। पर ऐसा नहीं है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के ‘कॉलेज ऑफ वेटरनरी मेडिसिन’ के विशेषज्ञों के अनुसार, पालतू जानवरों के पेट में …
Read More »बायोस्कोप से ओटीटी तक मनोरंजन का सफर
(डॉ. एस.के. गोपाल) मनोरंजन के साधन बदलते हैं तो केवल तकनीक नहीं बदलती। इसके साथ समाज की जीवनशैली और उसकी यादें भी बदलती हैं। कभी गांव की गलियों में बायोस्कोप वाला आया करता था। बच्चे मुट्ठी भर अनाज देकर दुनिया की तस्वीरें देखते थे। फिर सिनेमा आया। कहानी देखने का …
Read More »विसंगतियों के बीच सच तलाशते हरिशंकर परसाई
जयंती (22 अगस्त) पर स्मरण (डॉ. एस.के. गोपाल) हिंदी साहित्य में हरिशंकर परसाई उस व्यंग्यकार के रूप में याद किए जाते हैं जिन्होंने हंसी को सामाजिक चेतना का माध्यम बनाया। उनकी रचनाएं पढ़ते हुए पाठक पहले मुस्कराता है और फिर ठिठक जाता है। जिस विसंगति पर वह हंस रहा होता …
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