राजा राममोहन राय जयंती (22 मई) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) भारतीय समाज का इतिहास केवल राजाओं, युद्धों और साम्राज्यों का इतिहास नहीं है। यह उन लोगों का भी इतिहास है जिन्होंने समय से आगे जाकर सोचा और समाज से ऐसे सवाल पूछे जिन्हें पूछने का साहस बहुत कम लोग …
Read More »लेख/स्तम्भ
शुभेंदु सरकार के त्वरित निर्णयों से उभरता नया बंगाल
(मृत्युंजय दीक्षित) बंगाल में 69 वर्षों के अथक संघर्ष के बाद बनी शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अपने चुनावी संकल्प पत्र के अनुरूप काम पर लग गई है। सत्ता परिवर्तन होते ही सभी धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बंद करवाए गए। अवैध बूचड़खानों पर बुलडोजर एक्शन के आदेश जारी …
Read More »बिना विभाग के मंत्री जी की चांदी!
नेताजी बेहद मायूस और उदास थे. एकटक शून्य में निहारे जा रहे थे. चेहरे पर कोई भाव नहीं. पास बैठे उनके खास सलाहकार जागीर वनवासिया जी को भी कुछ सूझ नहीं रहा था कि नेताजी भाई साहब का मन कैसे बहलाया जाये. वनवासियाजी को लगा कि कहीं नेताजी की भाभीजी …
Read More »वैचारिक संघर्ष से सत्ता के शिखर तक, ऐसा रहा भाजपा के उदय का सफर
(डॉ. अतुल मलिकराम) भारतीय राजनीति के पन्नों में भारतीय जनता पार्टी का उदय यूं तो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता, लेकिन इसके पीछे दशकों का पसीना और वैचारिक तपस्या है। आज जो पार्टी दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन के रूप में खड़ी है, उसकी नींव संघर्षों की …
Read More »भाजपा समग्र हिंदुत्व पर ही लड़ेगी उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई
(मृत्युंजय दीक्षित) पश्चिम बंगाल की विजय से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी तैयारियां प्रांरभ कर दी हैं। बंगाल से स्पष्ट जनादेश आ जाने के बाद भाजपा की स्थिति मजबूत हो गई है। समाजवादी पार्टी एसआईआर, चुनाव आयोग व ईवीएम के खिलाफ वातावरण बनाने में …
Read More »जय सोमनाथ !
लेखक – श्री नरेन्द्र मोदी वर्ष 2026 की शुरुआत में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। यह सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व था। अब 11 मई को मुझे एक बार फिर …
Read More »बंगाल चुनाव परिणाम – स्वर्णिम भविष्य का संकेत
(मृत्युंजय दीक्षित) बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम अभूतपूर्व हैं, अभिभूत करने वाले हैं। भाजपा की लम्बी अनथक साधना, कार्यकर्ताओं का कठोर श्रम, कुशल रणनीति, बंगाल के मतदाताओं का किसी भी प्रकार के भय से उबर कर मतदान करना जैसे कारकों ने मिलकर लंबी प्रतीक्षा के बाद भाजपा (भारतीय जनसंघ) के …
Read More »बंगीय जनमत में माछ-भात और झालमुड़ी का स्वाद
(डॉ. एस.के. गोपाल) पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव परिणामों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल का मतदाता केवल राजनीतिक नारों से प्रभावित नहीं होता। वह इतिहास, पहचान और वर्तमान परिस्थितियों के समन्वय के आधार पर अपना निर्णय देता है। इस दृष्टि से यह चुनाव केवल …
Read More »लुप्त होती पौशाला संस्कृति : लखनऊ की स्मृतियों में बहती शीतलता
(श्रीधर अग्निहोत्री) एक समय था, जब गर्मियों की तपती दोपहरें केवल धूप की तीव्रता का ही नहीं, बल्कि मानवीय करुणा और सेवा की शीतल छांव का भी अनुभव कराती थीं। कानपुर की गलियों, सड़कों और चौराहों पर सरकंडी से बनी छोटी-छोटी झोपड़ियाँ दिखाई देती थीं—जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक पौशाला कहते थे। …
Read More »नई पीढ़ी की सोच और परिवार का भविष्य
(डॉ. एस.के. गोपाल) आज का समय अत्यंत तीव्र गति से बदल रहा है। जीवन पहले से अधिक सुविधाजनक हुआ है, अवसरों की कमी नहीं है और हर व्यक्ति अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत दिखाई देता है। शहरों का विस्तार, शिक्षा का प्रसार और तकनीक की उन्नति …
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