सूरदास जयंती (21 अप्रैल) पर विशेष (डॉ.एस.के. गोपाल) भारतीय भक्ति साहित्य में सूरदास का नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है। उन्हें प्रायः कृष्ण-भक्ति का कवि कहा जाता है किन्तु केवल इतना कहना उनके महत्व को पूरा नहीं बताता। अगर उनके पदों को ध्यान से पढ़ें तो पता चलता है …
Read More »लेख/स्तम्भ
राजनीति ने विशेष समुदाय तक सीमित कर दिया भगवान परशुराम जी को
(श्रीधर अग्निहोत्री) भगवान परशुराम सनातन परंपरा में विष्णु के एक अवतार के रूप में पूज्य माने जाते हैं। उनका स्वरूप किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समस्त समाज के लिए आदरणीय हैं। यदि इतिहास और परंपरा के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो स्पष्ट होता …
Read More »फाइलों में दबी योजनाओं की अनसुनी आवाज़
(डा. एस.के. गोपाल) राज्य की विकास यात्रा केवल नीतियों और घोषणाओं से आगे नहीं बढ़ती अपितु उनके प्रभावी क्रियान्वयन से ही सार्थक होती है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य में सरकारी योजनाओं का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि ये योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने …
Read More »भारत का फार्मा सेक्टर : नवाचार और युवाओं के लिए नया आकाश
(अनुप्रिया पटेल) भारत आज दुनिया की ‘फार्मेसी’ के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर चुका है, और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विज़न के अनुरूप अब हम केवल जेनेरिक दवा बनाने वाले देश से आगे बढ़कर एक ‘नवाचार-आधारित’ वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर हैं। …
Read More »सम्राट को सुशासन का हस्तांतरण
(मृत्युंजय दीक्षित) लम्बे संघर्ष और राजनैतिक उतार -चढ़ाव के बाद भारतीय जनता पार्टी को बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल गया है। यह अवसर राजग गठबंधन के माध्यम से आया है। अभी तक बिहार में भाजपा जद (यू) के साथ छोटे भाई की भूमिका मे …
Read More »विद्यालय में नए सत्र का स्वागत नई उम्मीदों का नया अध्याय
(ऋचा सिंह) हर अप्रैल स्कूल के गेट पर नया सत्र दस्तक देता है। बस्ते बदलते हैं, किताबें बदलती हैं,यूनिफॉर्म की क्रीज़ नई होती है और बच्चों की कक्षाएं भी नई हो जाती हैं । पर क्या हमारी सोच भी बदलती है? कि इस सत्र में हम बच्चों को पहले से …
Read More »अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं
संगीत के आशा युग का अवसान (डॉ. एस.के. गोपाल) भारतीय संगीत जगत के लिए 12 अप्रैल का दिन गहरे शोक और स्मरण का दिन बन गया। भारतीय चित्रपट जगत की मशहूर पार्श्वगायिका आशा भोंसले ने सदा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। परंतु यह कहना अधूरा होगा कि वे चली …
Read More »अंधेर नगरी गोंडा : जिसका नाम एफआईआर में वही करेगा अपने खिलाफ जांच!
उत्तर प्रदेश अंधेर नगरी हो गया है. यहां के असली राजा अधिकारी ही हो चुके हैं. उन्हें ही अन्याय करना है, उन्हें ही फैसला सुनाना है और उन्हें ही न्याय भी कर देना है. अंधेर नगरी का हाल देखिये कि गोंडा में जिस अधीक्षण अभियंता सुशील कुमार यादव को पत्रकार …
Read More »समाज सेवा या सामाजिक अभिनय?—सुधार की प्रतीक्षा में खड़ा समाज
(भगवान प्रसाद गौड़) क्या हम सचमुच समाज की सेवा कर रहे हैं या केवल उसका प्रदर्शन? यह सवाल आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। हर तरफ समाज सेवा के नाम पर कार्यक्रम, सम्मान, फोटो और खबरें दिखाई देती हैं। तालियां भी बजती हैं, सराहना भी होती है। …
Read More »प्रदेश में महापुरुषों की विरासत का होगा संरक्षण व सम्मान
प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने कसी कमर (मृत्युंजय दीक्षित) अयोध्या में श्री रामजन्मभूमि पर दिव्य व भव्य मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ कारिडोर तथा मथुरा वृंदावन सहित प्रदेश भर के धार्मिक स्थलों का विकास, माफिया राज को मिट्टी में मिलाने, आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने और …
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