(मृत्युंजय दीक्षित) पश्चिम बंगाल की विजय से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी तैयारियां प्रांरभ कर दी हैं। बंगाल से स्पष्ट जनादेश आ जाने के बाद भाजपा की स्थिति मजबूत हो गई है। समाजवादी पार्टी एसआईआर, चुनाव आयोग व ईवीएम के खिलाफ वातावरण बनाने में …
Read More »लेख/स्तम्भ
जय सोमनाथ !
लेखक – श्री नरेन्द्र मोदी वर्ष 2026 की शुरुआत में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। यह सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व था। अब 11 मई को मुझे एक बार फिर …
Read More »बंगाल चुनाव परिणाम – स्वर्णिम भविष्य का संकेत
(मृत्युंजय दीक्षित) बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम अभूतपूर्व हैं, अभिभूत करने वाले हैं। भाजपा की लम्बी अनथक साधना, कार्यकर्ताओं का कठोर श्रम, कुशल रणनीति, बंगाल के मतदाताओं का किसी भी प्रकार के भय से उबर कर मतदान करना जैसे कारकों ने मिलकर लंबी प्रतीक्षा के बाद भाजपा (भारतीय जनसंघ) के …
Read More »बंगीय जनमत में माछ-भात और झालमुड़ी का स्वाद
(डॉ. एस.के. गोपाल) पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव परिणामों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल का मतदाता केवल राजनीतिक नारों से प्रभावित नहीं होता। वह इतिहास, पहचान और वर्तमान परिस्थितियों के समन्वय के आधार पर अपना निर्णय देता है। इस दृष्टि से यह चुनाव केवल …
Read More »लुप्त होती पौशाला संस्कृति : लखनऊ की स्मृतियों में बहती शीतलता
(श्रीधर अग्निहोत्री) एक समय था, जब गर्मियों की तपती दोपहरें केवल धूप की तीव्रता का ही नहीं, बल्कि मानवीय करुणा और सेवा की शीतल छांव का भी अनुभव कराती थीं। कानपुर की गलियों, सड़कों और चौराहों पर सरकंडी से बनी छोटी-छोटी झोपड़ियाँ दिखाई देती थीं—जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक पौशाला कहते थे। …
Read More »नई पीढ़ी की सोच और परिवार का भविष्य
(डॉ. एस.के. गोपाल) आज का समय अत्यंत तीव्र गति से बदल रहा है। जीवन पहले से अधिक सुविधाजनक हुआ है, अवसरों की कमी नहीं है और हर व्यक्ति अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत दिखाई देता है। शहरों का विस्तार, शिक्षा का प्रसार और तकनीक की उन्नति …
Read More »वात्सल्य और मनोविज्ञान के कवि हैं सूरदास
सूरदास जयंती (21 अप्रैल) पर विशेष (डॉ.एस.के. गोपाल) भारतीय भक्ति साहित्य में सूरदास का नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है। उन्हें प्रायः कृष्ण-भक्ति का कवि कहा जाता है किन्तु केवल इतना कहना उनके महत्व को पूरा नहीं बताता। अगर उनके पदों को ध्यान से पढ़ें तो पता चलता है …
Read More »राजनीति ने विशेष समुदाय तक सीमित कर दिया भगवान परशुराम जी को
(श्रीधर अग्निहोत्री) भगवान परशुराम सनातन परंपरा में विष्णु के एक अवतार के रूप में पूज्य माने जाते हैं। उनका स्वरूप किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समस्त समाज के लिए आदरणीय हैं। यदि इतिहास और परंपरा के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो स्पष्ट होता …
Read More »फाइलों में दबी योजनाओं की अनसुनी आवाज़
(डा. एस.के. गोपाल) राज्य की विकास यात्रा केवल नीतियों और घोषणाओं से आगे नहीं बढ़ती अपितु उनके प्रभावी क्रियान्वयन से ही सार्थक होती है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य में सरकारी योजनाओं का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि ये योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने …
Read More »भारत का फार्मा सेक्टर : नवाचार और युवाओं के लिए नया आकाश
(अनुप्रिया पटेल) भारत आज दुनिया की ‘फार्मेसी’ के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर चुका है, और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विज़न के अनुरूप अब हम केवल जेनेरिक दवा बनाने वाले देश से आगे बढ़कर एक ‘नवाचार-आधारित’ वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर हैं। …
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