(मृत्युंजय दीक्षित) विगत 31 जुलाई 2026 को राजनीतिक विरोध के अधिकार के नाम पर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र धारणकर संसद भवन के परिसर में नाटक खेला; राहुल, अखिलेश, डिंपल, अवधेश आदि ने उसमें विभिन्न भूमिकाएँ निभाईं और अन्य विरोधी दलों के सांसदों ने हंसते हुए तालियां बजाकर …
Read More »लेख/स्तम्भ
चढ़ावा चोरी रोकने के लिये ही सपा ने कारसेवकों पर गोली चलवाई थी!
कल राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर समाजवादी पार्टी का तकलीफ देखकर मन बहुत उथलपुथल रहा. सदन में समाजवादी पार्टी के विधायक जिस तरीके से रामजी के प्रति आदरभाव में चढ़ावा चोरी पर दुखी थे, और सरकार से सवाल पूछ रहे थे, वह बेहद जायज एवं नैसर्गिक था. सपा विधायक शाहिद …
Read More »छात्र कॉलेज में नामांकित, लेकिन मानसिक रूप से अनुपस्थित
भारत की उच्च शिक्षा का वास्तविक संकट डॉ. राकेश कुमार यादव भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था आज एक ऐसे गंभीर संकट से गुजर रही है, जिस पर अपेक्षित स्तर पर चर्चा नहीं हो रही है। हर वर्ष विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है, …
Read More »पेपर लीक बहस के दौरान विपक्षी दलों ने खोया सुनहरा अवसर
(मृत्युंजय दीक्षित) केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में बार -बार होने वाली पेपर लीक व अन्य गड़बड़ियों की रोकथाम के लिए लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक विपक्ष के भारी हंगामे के बीच लोकसभा से ध्वनिमत से करा लिया। इस विधेयक पर बहस के दौरान यह बात स्पष्ट …
Read More »उधम सिंह का बलिदान और राष्ट्र का स्वाभिमान
बलिदान दिवस (31 जुलाई) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) भारत का स्वतंत्रता संग्राम अनेक धाराओं से मिलकर बना एक विराट जनआंदोलन था। किसी ने सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाया। किसी ने सशस्त्र क्रांति का। किसी ने लेखनी से जनजागरण किया। किसी ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इन सभी …
Read More »वृन्दावन की रज और रीतिमुक्त धारा के कवि घनानंद
(डॉ. एस.के. गोपाल) रीतिकाल के अनेक कवि श्रृंगार के अनूठे शिल्पी रहे हैं, किंतु घनानंद का स्थान उन सबसे अलग और विशिष्ट है। उन्होंने प्रेम का चित्रण केवल काव्य-कौशल के लिए नहीं किया, अपितु उसे जीवन की सबसे बड़ी साधना माना। उनके शब्दों में अलंकारों का चमत्कार नहीं, हृदय की …
Read More »कारगिल की विरासत और भारत का भविष्य
कारगिल विजय दिवस (26 जुलाई) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) युद्ध किसी भी सभ्य समाज की पहली पसंद नहीं हो सकता। भारत की सांस्कृतिक परंपरा भी सदैव शांति, सह-अस्तित्व और संवाद की पक्षधर रही है। लेकिन जब राष्ट्र की संप्रभुता, सीमाओं और स्वाभिमान पर आघात होता है, तब संघर्ष अपरिहार्य …
Read More »महाराज रामनाथ और दूध भात खाता नाऊ!
आर्यावर्त के उत्तर में एक राज्य था. उसके राजा थे रामनाथ. उनके मंत्रिमंडल में कई अच्छे लोग थे. कुछ निर्दयी लोग भी थे. राजा पहले जनता से सीधे मिलते और उनके सुख दुख सुनते थे. राज्य का कोई भी नागरिक बेरोकटोक अपनी बात, समस्या, परेशानी राजा को बता सकता था. …
Read More »चरित्र का क्षरण और राष्ट्र का भविष्य
(डॉ. एस.के. गोपाल) हाल के दिनों में एक ओर राममंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान की कथित चोरी का मामला चर्चा में रहा। दूसरी ओर लखनऊ में आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में पूर्व एआरटीओ के आवास पर छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी और …
Read More »शब्दों से जनमन रचने वाले आनन्द बक्शी
जयंती (21 जुलाई) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) फिल्मी गीत समाज में लोक-संस्कृति का जीवंत हिस्सा रहे हैं। हमारी खुशियाँ, बिछोह, प्रेम, मित्रता, उत्सव, भक्ति और जीवन-दर्शन, सब किसी न किसी गीत में अपना प्रतिबिंब पाते हैं। यही कारण है कि हिंदी फिल्म संगीत के महान रचनाकारों की चर्चा केवल …
Read More »
Telescope Today | टेलीस्कोप टुडे Latest News & Information Portal