Tuesday , January 13 2026

लेख/स्तम्भ

शहरों में रहने की मजबूरी और आवास संकट

डॉ. एस.के. गोपाल किसी भी शहर की वास्तविक प्रगति ऊँची इमारतों, चौड़ी सड़कों या चमकदार परियोजनाओं से नहीं मापी जाती। उसका सही पैमाना यह होता है कि वहाँ रहने वाला साधारण नागरिक किस तरह का जीवन जी पा रहा है। यदि दस से तीस हजार रुपये प्रतिमाह कमाने वाला व्यक्ति …

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विकसित भारत युवा नेता संवाद: विकसित भारत के लिए युवा नेतृत्व का सशक्तिकरण

डॉ. मनसुख मांडविया (केंद्रीय युवा मामले और खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री, भारत सरकार) भारत की विकास कथा उन लोगों द्वारा लिखी जाएगी, जो आज इसके विचारों को स्वरुप दे रहे हैं। पूरे देश में, युवा भारतीय इस बारे में गहराई से सोच रहे हैं कि भारत कैसे तेज़ी …

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भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन और सत्ता का यथार्थ

– डॉ. एस.के. गोपाल लोकायुक्त कानून को प्रभावी रूप से लागू कराने की मांग को लेकर 30 जनवरी से आमरण अनशन की घोषणा करते हुए अन्ना हजारे ने एक बार फिर देश को उस प्रश्न की याद दिलाई है जिसने कभी पूरे भारत को सड़कों पर ला खड़ा किया था। …

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रेल नीति में बहाल हों बुज़ुर्गों और महिलाओं के अधिकार

डॉ. एस.के. गोपाल किसी भी लोकतांत्रिक समाज की वास्तविक पहचान ऊँची-ऊँची विकास योजनाओं से नहीं अपितु इस बात से होती है कि वह अपने सबसे अनुभवी नागरिकों, वरिष्ठों और महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करता है। जब आधुनिक ट्रेनों, प्रीमियम सुविधाओं और राजस्व वृद्धि के दावों के बीच बुज़ुर्गों की …

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मर्यादा रेखा पार करती डिजिटल अभिव्यक्ति

डॉ. एस.के. गोपाल समाज में कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं जो सीधे हमारे भीतर झाँकने को मजबूर करते हैं। ये प्रश्न किसी एक व्यक्ति, वर्ग या लिंग से अधिक हमारी सामूहिक सोच, संस्कार और दिशा से जुड़े होते हैं। जब यह पूछा जाता है कि यदि आप अपनी बहिन-बेटियों की …

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जीवन को कल पर टालते हम लोग

डॉ. एस.के. गोपाल बहुधा हम सबका जीवन एक ही ढर्रे पर चलता दिखाई देता है। मन में यह भाव गहराई से बैठा रहता है कि अभी नहीं, बाद में जिएँगे। अभी तो हालात ठीक नहीं हैं, जिम्मेदारियाँ बहुत हैं, समय अनुकूल नहीं है। जब यह काम हो जाएगा, जब वह …

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कैलेंडर के साथ समरसता की ओर बढ़े समाज

-डॉ. एस.के. गोपाल नया साल आता है तो हम सब कुछ नया चाहने लगते हैं। नई शुरुआत, नई सफलता, नई उम्मीदें, लेकिन बहुत कम लोग यह सोचते हैं कि समाज भी नया हो सकता है अगर हम अपने सोचने का ढंग बदल लें। आज हम तकनीक में आगे बढ़ गए …

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कुछ मिला जुला गुजरा ये साल

कुछ मिला जुला गुजरा है ये सालकभी खुशी कभी गम का रहा साथ एक तरफ दिखा उत्साह महाकुंभ मेदूसरी तरफ भगदड का मचा हाहाकारश्रद्घालओं की भीड ने तोड दिये सारे रिकार्डभगदड की दहशत मे भी कम न हुआ उत्साह । पहलगाम के हमले ने दिया दिल दहलाछब्बीस लोगो की जब …

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हिंदुओं के नरसंहार की भूमि बनता बांग्लादेश, सेक्युलर दलों के मुंह पर लगा ताला

(मृत्युंजय दीक्षित) अगस्त 2024 में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हिंसक प्रदर्शनों के चलते अपना देश छोड़ना पड़ा जिसके बाद बांग्लादेश में हिन्दुओं पर आक्रमण, हत्या और आगजनी की भीषण घटनाएं हुईं क्योंकि हिन्दुओं को उनकी पार्टी का समर्थक माना जाता है। शेख हसीना के देश छोड़ने के …

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नाम यूं ही नही अटल पड़ा

क्या लिखूं उस महान शख्सियत परजिसने खुद स्वर्णिम इतिहास लिखा इरादे जिस के अटल सदावो शख्स रहा है अटल खड़ा लेकर कलम की ताकत कोक्षेत्र पत्रिकारिता का चुनाभावो से भरा कवि ह्रदयन बांध सका मन के भावों कोपिरो मन के भावो को शब्दो मेकविताओ मे ढाल दिया। रखा जब कदम …

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