Friday , October 9 2026

लेख/स्तम्भ

बदलती तस्वीर और फैजुल्लागंज की नई उम्मीदें

(डॉ. एस.के. गोपाल) एक दशक पहले का फैजुल्लागंज और आज का फैजुल्लागंज एक जैसा नहीं है। कभी कच्ची सड़कों, बांस-बल्लियों पर झूलते बिजली के तारों, बरसात में जलभराव और सीमित नागरिक सुविधाओं से जूझता यह क्षेत्र अब अपनी पुरानी तस्वीर से आगे बढ़ रहा है। चार वार्डों में फैले फैजुल्लागंज …

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गोमती की करवट और फैजुल्लागंज की चिन्ता

(डॉ. एस.के. गोपाल) गोमती की बाढ़ जब उफनती है तो नदी का पानी शहर की स्मृतियों में भी उतर जाता है। लखनऊ के घैला और फैजुल्लागंज क्षेत्र की ऐसी ही एक स्मृति 1971 की बाढ़ से जुड़ी है। उस समय डी.पी. बोरा लखनऊ पश्चिम से विधायक थे। स्थानीय स्मृतियों के …

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सोशल मीडिया के सहारे अफवाहों की राजनीति 

(मृत्युंजय दीक्षित)  सोशल मीडियाा का बढ़ता प्रभाव समाज व राजनीतिक व्यवस्था को अराजकता की ओर घसीट रहा है। अभी देश में तीन ऐसी घटनाएं घटी हैं  जिनमें यह प्रतीत हो रहा है कि सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैलाकर देश को अराजकता की आग में झोंका जा रहा है। …

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कांग्रेस ने फिर अपनाई बांटो और राज करो की नीति

(मृत्युंजय दीक्षित) वर्तमान समय में कांग्रेस पार्टी जहां एक ओर अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए चुनाव आयोग व देश की अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर हमलावर है वहीं दूसरी ओर उसके तेलंगाना राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हिंदू देवी देवताओें का विभाजन करके कांग्रेस की  बांटो और राज करो …

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योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक भविष्य की अग्नि परीक्षा

(डॉ. एस.के. गोपाल) उत्तर प्रदेश का 2027 विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। यह चुनाव केवल प्रदेश में भाजपा की सरकार के भविष्य का फैसला नहीं करेगा। इसका असर योगी आदित्यनाथ की आगे की राजनीतिक भूमिका पर भी पड़ेगा। 2017 में मुख्यमंत्री बनने के …

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युगपुरुष श्रद्धेय अशोक सिंहल जी का जन्मशताब्दी वर्ष

(लेखक- प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी) एक बहुत सुंदर सुभाषित है, “वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर। परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर।” इसका मतलब है कि पेड़ कभी अपने फल स्वयं नहीं खाता, नदी अपना जल अपने पास नहीं रखती। इसी तरह, संत स्वभाव के लोग भी स्वयं …

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आम आदमी की दाल और व्यवस्था का खूंटा

बचपन में इया (दादी) और अम्मा से कई बार सुनी ‘चिड़िया और दाल’ की लोककथा आज के समय में एक नया अर्थ देती है। तब यह केवल मनोरंजन लगती थी, लेकिन आज इसमें हमारी व्यवस्था के लिए भी एक बड़ा संदेश दिखाई देता है। एक चिड़िया को चने का दाना …

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सरकारी आवास योजना में आम आदमी कहां है?

(डॉ. एस.के. गोपाल) तृतीय श्रेणी का एक सरकारी कर्मचारी या निजी क्षेत्र में दस से बीस हजार रुपये महीने की नौकरी करने वाला युवक यदि लखनऊ में अपना घर बनाना चाहे तो वह कहां जाए? उसकी पूरी नौकरी की बचत भी क्या उसे तीस लाख रुपये का भूखंड खरीदने और …

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दीनदयाल का अंत्योदय और आज की राजनीति

दीनदयाल उपाध्याय जयंती (25 सितम्बर) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अंत्योदय विचार शासन और विकास की ऐसी दृष्टि थी जिसमें समाज का अंतिम व्यक्ति केन्द्र में था। राष्ट्र की प्रगति का अर्थ तभी है जब विकास का लाभ सबसे पीछे खड़े व्यक्ति तक पहुँचे। विकास की …

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राजनीति में कुसंस्कार को बढ़ावा देती कांग्रेस  

(मृत्युंजय दीक्षित)  कांग्रेस पार्टी चुनावों में लगातार पराजय का सामना कर रही है जिसने पार्टी युवराज राहुल गांधी को हताश कर दिया है। उनको इस हताशा से उबारने के लिए कांग्रेस ने पेपर लीक तथा  छात्रों की अन्य समस्याओं को आधार बनाकर “छात्रों की गूंज” नाम का अभियान अभियान आरंभ …

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