लेख/स्तम्भ

सिर्फ खेती नहीं, समृद्धि: गोदरेज एग्रोवेट के नए सफर की शुरुआत

– सुनील कटारिया (सीईओ और मेनेजिंग डायरेक्टर, गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड) जैसे-जैसे भारतीय कृषि का विकास हो रहा है, कृषि-व्यवसायों को उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं, जलवायु परिवर्तनशीलता और बाजार के बदलते रुख से आकार लेने वाले भविष्य के लिए तैयार होना होगा। गोदरेज एग्रोवेट के लिए इसका अर्थ है—किसी एक फसल, …

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आधुनिक भारत के निर्माण में कुशल इंजीनियरों की बढ़ती मांग

भारत वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य की ओर तेज़ी से अग्रसर है। इस लक्ष्य को साकार करने के लिए देश में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), चिकित्सकीय उपकरण, सेमीकंडक्टर, रेलवे, रक्षा उत्पादन (Defense Production) तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उद्योगों एवं आधुनिक विनिर्माण …

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भारतीय शिक्षा दिवस : शिक्षा में भारतीयता की चेतना से विकसित भारत की दिशा तक

(डॉ. अतुल कोठारी) किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी शिक्षा व्यवस्था से निर्धारित होता है। यदि शिक्षा अपनी संस्कृति, इतिहास, जीवन-मूल्यों और राष्ट्रीय दृष्टि से जुड़ी हो तो वह केवल कुशल मानव संसाधन नहीं, बल्कि चरित्रवान, उत्तरदायी और राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करती है। भारत में ऐसी ही शिक्षा व्यवस्था …

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मैं श्मशान की ठंडी राख, कुछ बोल रही हूं

(अरविंद कांत त्रिपाठी) मैं श्मशान से 15 किशोरों के चिता की ठंडी हुई “राख” बोल रही हूं – अभी तो वह नवनिहाल राष्ट्र की संरचना में सहयोग करने का ताना बाना बुन रहे थे लेकिन भ्रष्ट तंत्र और उसके सहायक उपकरणों (निजी संस्थानों) के घर्षण से लगी आग ने उन्हें …

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गढ़वाल हिमालय में त्रिजुगी की कभी न बुझने वाली लौ: शिवाश्रय और त्रिजुगी शिखर

गढ़वाल हिमालय के ऊँचे और दुर्गम इलाकों में, जो ‘थाग ला’ सेक्टर के पश्चिम में हैं, कुछ ऐसी चोटियाँ हैं जिन्हें सर्वे रिकॉर्ड में बिना नाम के और नम्बरों से ही जाना जाता है  (जैसे Pt. 5830 और Pt. 5900), लेकिन सदियों पुरानी सांस्कृतिक सोच में इनकी एक खास पहचान …

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आपातकाल की विरासत और लोकतांत्रिक चेतना

(डॉ. एस.के. गोपाल) 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की एक महत्वपूर्ण और बहुचर्चित तिथि है। इसी दिन देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की गई थी जो 21 मार्च 1977 तक प्रभावी रहा। यह कालखंड आज भी राजनीतिक, संवैधानिक और सामाजिक विमर्श का विषय बना हुआ है। आपातकाल …

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ब्रह्मशैल का उदय : शलशल-ला के ऊपर एक सांस्कृतिक प्रहरी

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में शलशल-ला दर्रे के ऊपर स्थित 5566 मीटर ऊँची ब्रह्मशैल चोटी, हिमालय के भूगोल में बसी भारत की प्राचीन सांस्कृतिक यादों का एक गहरा प्रमाण है। यह ऊँचा पर्वत केवल नक्शे पर एक निशान नहीं है, बल्कि यह वैदिक, पौराणिक और क्षेत्रीय सांस्कृतिक चेतना में गहराई …

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दमन के विरुद्ध विद्रोह और दामोदर हरि चापेकर

जयंती पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल राजनीतिक आंदोलनों, प्रस्तावों और जनसभाओं का इतिहास नहीं है। यह उन असंख्य देशभक्तों के साहस, त्याग और बलिदान का इतिहास भी है जिन्होंने विदेशी शासन के अन्याय और दमन के सामने झुकने से इनकार कर दिया। ऐसे ही …

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India’s Demographic Dividend: Opportunity or Time Bomb?

By Pranav Mittal For decades, economists have described India’s youthful population as its greatest strategic asset. With over half of its citizens below the age of thirty and millions entering the workforce each year, India possesses a demographic profile that many ageing economies can only envy. Policymakers frequently celebrate this …

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अग्निकांडों की पुनरावृत्ति और जवाबदेही का सुलगता प्रश्न

(डा.एस.के. गोपाल) 22 जून 2026 को लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित एक निजी कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया। इस दर्दनाक हादसे में कई लोगों की मृत्यु हुई तथा अनेक घायल हुए हैं जिनका उपचार चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी …

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