लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। वीरांगना वाहिनी का दूसरा सम्मेलन शुक्रवार को काल्विन तालुकेदार कालेज के मैदान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर वाहिनी की संस्थापक ने कहा कि वीरांगना वाहिनी नौजवान लड़कियों और महिलाओं की सामूहिक शक्ति तथा नेतृत्व को खड़ा करने के लिए समर्पित संगठन है। इसका उद्देश्य है कि हर महिला सुरक्षित बने, स्वावलंबी बने और समाज के सभी क्षेत्रों में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाए। यह नेतृत्वकारी शक्ति केवल महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि नए समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।

वहीं वक्ताओं ने सभा में कहा कि वीरांगना वाहिनी एक सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में तेजी से बढ़ रही है। लैंगिक, जातीय और धार्मिक संवाद के माध्यम से यह समता-मूलक समाज का सपना साकार का प्रयास कर रही है। प्रकृति और जीवन-निर्वाह से गहरे जुड़ाव के कारण महिलाएँ आज के पर्यावरण संकट का जवाब देने और सतत ज्ञान-प्रणालियों को पुनर्जीवित करने के लिए सबसे उपयुक्त हैं।

वीरांगना वाहिनी राष्ट्रीय आजादी आंदोलन और सामाजिक समता की धारक और वाहक है। इतिहास साक्षी है कि सौ साल से ज्यादा समय से, देश की स्वतंत्रता संग्राम में लाखों वीरांगनाओं ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया।

लाखों हिंदुस्तानियों त्याग और बलिदान से आजादी मिली और 1947 में यह एक मुकाम तक पहुंची। लेकिन ऐसे भारत जिसमें आखिरी औरत और आखिरी आदमी तक भी आजादी पहुंचे, जहां इंसानियत हो, इज्जत हो, इंसाफ हो, रोजी-रोटी हो… का सपना अभी अधूरा है। इन अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प वीरांगना वाहिनी ने लिया है।

वीरांगना वाहिनी की दिशा में 2018 से निरंतर संवाद, बैठकें, शिविर और यात्राएँ चल रही थीं। परंतु इसकी औपचारिक स्थापना सम्मेलन राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के 40 जिलों से लड़कियाँ शामिल हुईं।
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