कोविड-19 के विरुद्ध नई वैज्ञानिक दिशा
लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के विरुद्ध वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ईरानी जर्नल ऑफ साइंस में भारतीय वैज्ञानिक डॉ. अभय प्रकाश श्रीवास्तव (सहायक प्राध्यापक, गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, लखनऊ) का शोध पत्र प्रकाशित हुआ है।
इस शोध में कोरोना वायरस के विरुद्ध प्रभावी दवाओं एवं नैनो-सामग्रियों की भूमिका का गहन वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन में उन्नत क्वांटम-यांत्रिक पद्धति का प्रयोग कर यह स्पष्ट किया गया है कि कोरोना वायरस के प्रमुख प्रोटीन, विशेष रूप से मुख्य प्रोटीज (Main Protease), विभिन्न औषधियों और नैनो-सामग्रियों के साथ किस प्रकार अंतःक्रिया करते हैं।

शोध निष्कर्षों के अनुसार रेमडेसिविर, निर्माट्रेलवीर एवं क्वेरसेटिन जैसी औषधियाँ वायरस के सक्रिय भागों से मज़बूती से जुड़ती हैं, जिससे वायरस की संक्रमण क्षमता को कम किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त ग्रेफीन, जिंक ऑक्साइड, टाइटेनियम डाइऑक्साइड तथा मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOFs) जैसी नैनो-सामग्रियों ने भी वायरस प्रोटीन के साथ प्रभावी बंधन प्रदर्शित किया है।
विशेष रूप से मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क और ग्रेफीन ने सबसे अधिक सशक्त अंतःक्रिया दर्शाई है। इससे भविष्य में इन नैनो-सामग्रियों के उपयोग की संभावनाएँ प्रबल होती हैं, जैसे कि एंटीवायरल कोटिंग, सुरक्षा किट, वायु निस्पंदन प्रणालियाँ, जैव-संवेदी उपकरण तथा चिकित्सकीय सतहें।

डॉ. अभय प्रकाश श्रीवास्तव का यह शोध इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल प्रयोगशाला आधारित जैविक परीक्षणों तक सीमित न रहकर क्वांटम स्तर पर वायरस-औषधि एवं वायरस-नैनो-सामग्री अंतःक्रियाओं को समझने का एक नवीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह भविष्य में उभरने वाले नए संक्रामक वायरसों के विरुद्ध तेज़, सटीक एवं प्रभावी उपचार रणनीतियाँ विकसित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
इस अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन से न केवल भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान की वैश्विक प्रतिष्ठा सुदृढ़ हुई है, बल्कि गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, लखनऊ के शैक्षणिक एवं अनुसंधान कार्यों को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त हुई है।
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