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विद्यार्थी विज्ञान मंथन को जन-जन तक पहुंचाने की रणनीति पर मंथन

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों में रुचि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा एवं भारतीय वैज्ञानिक विरासत के प्रति गौरव की भावना विकसित करने के उद्देश्य से विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026–27 के अंतर्गत अवध, ब्रह्मवर्त, गोरक्ष एवं काशी प्रांतों के राज्य एवं जिला समन्वयकों की संवेदीकरण बैठक का आयोजन बुधवार को रीजनल साइंस सिटी किया गया।

बैठक में चारों प्रांतों के राज्य एवं जिला समन्वयकों के साथ विद्यालयों के प्रधानाचार्य, विद्यालय समन्वयक एवं सक्रिय विज्ञान शिक्षक उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य VVM 2026–27 के व्यापक प्रचार-प्रसार, विद्यालयों की सक्रिय सहभागिता, विद्यार्थियों के अधिकाधिक पंजीकरण, शिक्षकों के अभिमुखीकरण तथा जिला एवं विद्यालय स्तर पर प्रभावी समन्वय को गति प्रदान करना रहा।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद डॉ. शिव कुमार शर्मा (राष्ट्रीय संगठन मंत्री, विज्ञान भारती) ने कहा कि विद्यार्थी विज्ञान मंथन केवल एक प्रतियोगी परीक्षा नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने वाला एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान है। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक जागरूक व्यक्ति का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा से लेकर आधुनिक भारत के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों तक विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध वैज्ञानिक विरासत से परिचित कराने की आवश्यकता है। VVM विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, तर्क करने, प्रयोग करने और समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करता है।

डॉ. शर्मा ने सभी राज्य एवं जिला समन्वयकों तथा शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य केवल पंजीकरण संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यालय में विज्ञान के प्रति सकारात्मक वातावरण और वैज्ञानिक संस्कार का निर्माण करना होना चाहिए। उन्होंने विद्यालय-स्तर तक सशक्त संपर्क एवं समन्वय स्थापित करने तथा अधिकाधिक विद्यार्थियों को VVM से जोड़ने पर विशेष बल दिया।

अंकित राय (क्षेत्रीय संगठन मंत्री विज्ञान भारती, उत्तर प्रदेश, पूर्वी) ने कहा कि VVM की सफलता का आधार उसकी मजबूत समन्वय शृंखला—राज्य से प्रांत, प्रांत से जिला और जिला से विद्यालय स्तर तक है। प्रत्येक समन्वयक को अपने क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से प्रधानाचार्य संपर्क अभियान, विद्यालय भ्रमण, शिक्षक एवं छात्र ओरिएंटेशन, डिजिटल एवं सोशल मीडिया अभियान तथा सक्रिय WhatsApp नेटवर्क को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जहाँ नियमित संपर्क, स्पष्ट लक्ष्य और टीम भावना के साथ कार्य होता है, वहाँ VVM की पहुँच और प्रभाव दोनों तेजी से बढ़ते हैं।

डॉ. रजनीश चतुर्वेदी (महासचिव, विज्ञान भारती अवध प्रांत एवं मुख्य वैज्ञानिक, CSIR-IITR) ने कहा कि आज के समय में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। विज्ञान को केवल पाठ्यपुस्तक और परीक्षा तक सीमित न रखकर उसे विद्यार्थियों के दैनिक जीवन, समाज और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना आवश्यक है। 

उन्होंने कहा कि VVM विद्यार्थियों को वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ वैज्ञानिकों के संघर्ष, जिज्ञासा, परिश्रम और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सभी शिक्षकों से विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने और तर्कपूर्ण सोच विकसित करने का वातावरण बनाने का आग्रह किया। डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि एक विद्यार्थी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास भविष्य के एक जिम्मेदार नागरिक और नवाचारी भारत की नींव रख सकता है।

डॉ. मयूरी दत्त (प्रतिनिधि, शिक्षा शिल्पी) ने कहा कि विद्यार्थियों को विज्ञान से जोड़ने के लिए उनके भीतर जिज्ञासा और सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षक को विद्यार्थी और विज्ञान के बीच महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए कहा कि यदि शिक्षक स्वयं विज्ञान के प्रति उत्साह और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदर्शित करें, तो विद्यार्थी अधिक प्रभावी ढंग से विज्ञान से जुड़ते हैं। उन्होंने VVM के माध्यम से विद्यालयों में अभिमुखीकरण, संवाद, गतिविधि आधारित सीखने तथा वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

श्री स्वरूप मंडल (केंद्र प्रमुख एवं क्यूरेटर ‘E’, रीजनल साइंस सिटी, लखनऊ) ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि विज्ञान केंद्रों और विद्यालयों के बीच मजबूत संपर्क विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान को देखने, समझने और अनुभव करने के अवसर विद्यार्थियों की जिज्ञासा को नई दिशा देते हैं। उन्होंने विज्ञान संचार, विज्ञान प्रदर्शनी, गतिविधियों एवं वैज्ञानिक संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए सहयोग की भावना से कार्य करने पर बल दिया।

कार्यक्रम की आयोजक शर्मिला सिंह (जोनल कोऑर्डिनेटर, विद्यार्थी विज्ञान मंथन, उत्तर प्रदेश, पूर्वी) ने कहा कि VVM को व्यापक जनभागीदारी का अभियान बनाने के लिए सभी प्रांतों एवं जिलों के समन्वयकों को टीम भावना के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि हर विद्यालय तक पहुँचना और हर इच्छुक विद्यार्थी को VVM से जोड़ना हमारा सामूहिक लक्ष्य है।

उन्होंने सभी समन्वयकों से विद्यालय-वार एवं जिला-वार कार्ययोजना बनाकर नियमित प्रगति की समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने सभी अतिथियों, राज्य एवं जिला समन्वयकों, प्रधानाचार्यों, विद्यालय समन्वयकों एवं विज्ञान शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। 

व्यापक आउटरीच रणनीति पर विशेष जोर बैठक में VVM 2026–27 को प्रत्येक विद्यालय एवं अधिकाधिक विद्यार्थियों तक पहुँचाने के लिए कई गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित करने पर विशेष जोर दिया गया। जिसमें प्रधानाचार्य संपर्क अभियान, शिक्षक एवं छात्र ओरिएंटेशन, विद्यालय भ्रमण एवं व्यक्तिगत संपर्क, DIET/SCERT संपर्क, KV/JNV आउटरीच WhatsApp एवं डिजिटल अभियान ब्रोशर एवं पोस्टर वितरण, जिला एवं विद्यालय स्तर पर समन्वय नेटवर्क को मजबूत करना शामिल था।

नियमित प्रगति समीक्षा एवं लक्ष्य आधारित कार्ययोजना

वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थी विज्ञान मंथन केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, तर्कशीलता, नवाचार की भावना तथा भारत के वैज्ञानिक योगदान के प्रति गौरव विकसित करने वाला महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य से लेकर विद्यालय स्तर तक प्रत्येक समन्वयक एवं शिक्षक की सक्रिय भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बैठक का सामूहिक संकल्प रहा कि VVM 2026–27 को जन-जन तक पहुँचाते हुए अधिकाधिक विद्यालयों एवं विद्यार्थियों को इस वैज्ञानिक अभियान से जोड़ा जाएगा तथा प्रत्येक जिले में प्रभावी समन्वय एवं आउटरीच नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा।