लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश सरकार प्रत्येक जिले के लिए वार्षिक निवेश लक्ष्य निर्धारित करेगी और परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन के लिए उद्यमी मित्रों तथा जिला उद्योग केंद्र (DIC) के अधिकारियों के प्रशिक्षण एवं कार्य-प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन करेगी। औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में इन्वेस्ट यूपी, उद्यमी मित्रों और जीएम डीआईसी की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए ये निर्देश दिए।

बैठक में राज्य मंत्री, संसदीय कार्य एवं औद्योगिक विकास जसवंत सिंह सैनी और अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग आलोक कुमार भी मौजूद रहे। बैठक में निवेश की प्रगति, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निवेशक सुविधा व्यवस्था की समीक्षा की गई। जोर इस बात पर रहा कि परियोजनाएं MoU से ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (GBC) और उत्पादन तक तेजी से आगे बढ़ें तथा औद्योगिक विकास सभी 75 जिलों तक पहुंचे।
नंदी ने जिलावार निवेश लक्ष्य और तेज निवेशक सुविधा पर दिया जोर
नन्द गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा, “यह समीक्षा बैठक केवल एक सामान्य बैठक बनकर न रह जाए। यह उत्तर प्रदेश की बदलती औद्योगिक तस्वीर, निवेशकों के बढ़ते विश्वास और रोजगार की नई संभावनाओं पर सार्थक विमर्श का मंच बने और विकास की गति को आगे बढ़ाने के लिए ठोस दिशा तय करे।”

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल एमओयू पर हस्ताक्षर तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब तक आयोजित चार GBC के माध्यम से ₹12 लाख करोड़ से अधिक की 16,000 से ज्यादा परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं, जबकि पांचवीं GBC की तैयारियां जारी हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश की GSDP वर्तमान में बढ़कर 2024-25 में ₹30.25 लाख करोड़ हो गई है। आने वाले वर्षों में इसे ₹39.8 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय GDP में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी अब 9.1 प्रतिशत है।

मंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास को केवल नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे या पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। प्रदेश में 33 लाख से अधिक औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जिनसे करीब 38 लाख लोगों को रोजगार मिला है। इनमें 2.09 लाख से अधिक महिलाएं शामिल हैं।
33,000 से अधिक पंजीकृत कंपनियां यूपी के बेहतर कारोबारी माहौल का संकेत
राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी ने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार का असर कंपनी पंजीकरण में भी दिख रहा है। जहां पहले सालाना करीब 500 कंपनियां पंजीकृत होती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 4,500 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि उद्यमी मित्र सरकार और निवेशकों के बीच प्रभावी सेतु की भूमिका निभाएं, समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें और केवल निवेश की राशि नहीं, बल्कि निवेशकों के विश्वास और संतुष्टि को प्राथमिकता दें।

नंदी ने इन्वेस्ट यूपी को उद्यमी मित्रों और GM DICs का नियमित प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलों में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, सेवा क्षेत्र और उभरती तकनीकों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग आलोक कुमार, सचिव, उद्योग एवं CEO, इन्वेस्ट यूपी विजय किरण आनंद, ACEO, इन्वेस्ट यूपी प्रेरणा शर्मा, शशांक चौधरी तथा ACEO, UPSIDA दीक्षा जैन ने इन्वेस्ट यूपी, UPEIDA और UPSIDA की प्रगति एवं कार्यप्रणाली पर प्रस्तुतियां दीं।

उत्तर प्रदेश का औद्योगिक मॉडल अब निवेश प्रस्तावों को तेज क्रियान्वयन, रोजगार और स्थानीय उद्योगों से जोड़ने पर केंद्रित है। जिलावार लक्ष्य, बेहतर निवेशक सुविधा और मजबूत जमीनी क्रियान्वयन के जरिए राज्य अपने औद्योगिक आधार को व्यापक बनाते हुए 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
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