लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की 3rd स्टेट वर्किंग कमेटी की बैठक रविवार को सेवा परिसर सीतापुर रोड स्थित अमोध होटल में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेशभर से आए चिकित्सकों ने चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों, चिकित्सकों की सुरक्षा, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और समाजसेवा के कार्यों की समीक्षा की। चिकित्सकों ने चिकित्सा क्षेत्र की समस्याओं, छोटे अस्पतालों के संचालन में आ रही दिक्कतों, मरीजों के उपचार तथा अंगदान को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की।
कार्यक्रम के प्रारंभिक सत्र में IMA UP State Patron एवं Past National President IMA Dr. Sharad Kumar Agarwal ने संगठन की गतिविधियों और चिकित्सा जगत से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने IMA की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने, चिकित्सकों तथा समाज के बीच विश्वास को मजबूत करने और सरकार के साथ सकारात्मक संवाद के माध्यम से चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विषयों के समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
State Working Committee ने पिछली बैठक के बाद IMA UP State द्वारा किए गए कार्यों एवं लिए गए निर्णयों की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही आने वाले महीनों की कार्ययोजना, संगठनात्मक गतिविधियों तथा चिकित्सकों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

डा. शरद कुमार अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार का चिकित्सकों को भी विशेष रूप से लाभ मिला है। पहले कई बार असामाजिक तत्व नर्सिंग होम और अस्पतालों में अनावश्यक हिंसा और मारपीट करते थे, लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ऐसी घटनाओं में काफी कमी आई है। चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर सरकार के रुख का IMA ने स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि IMA के ‘गांव चले’ जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नि:स्वार्थ चिकित्सा सेवाएं और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता उपलब्ध कराई जा रही हैं। संगठन की शाखाओं द्वारा गांवों में लोगों को स्वास्थ्य शिक्षा देने के साथ चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
छोटे अस्पतालों की सेवाओं को मजबूत करने और अंगदान को बढ़ावा देने पर जोर
आईएमए उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डा. राजीव गोयल ने कहा कि बैठक में प्रदेश की विभिन्न शाखाओं की गतिविधियों की रिपोर्ट ली जाती है। इसके साथ ही चिकित्सकों की समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा होती है। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में पंजीकरण, अग्निशमन व्यवस्था तथा चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी अन्य समस्याओं को संगठन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया जाता है, ताकि उनका समाधान कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि छोटे अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। बड़ी संख्या में मरीजों को इन अस्पतालों में कम खर्च में उपचार उपलब्ध होता है। कई ऐसे ऑपरेशन जो छोटे अस्पतालों में लगभग 25 से 30 हजार रुपये में हो जाते हैं, वहीं बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों में उनका खर्च कई गुना अधिक हो सकता है। ऐसे में छोटे अस्पतालों को मजबूत और सुरक्षित रखना आम मरीजों के हित में है।
डा. गोयल ने कहा कि गंभीर स्थिति में मरीज को बचाने के लिए चिकित्सक हर संभव प्रयास करते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की भी अपनी सीमाएं हैं। प्रत्येक गंभीर मरीज के ठीक होने की गारंटी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मरीज की स्थिति बिगड़ने पर कई बार चिकित्सकों और अस्पतालों के साथ विवाद, तोड़फोड़ और मारपीट जैसी घटनाएं सामने आती हैं। समाज को यह समझना होगा कि चिकित्सक अपनी क्षमता के अनुसार मरीज की जान बचाने का हर संभव प्रयास करते हैं।

उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को जल्दबाजी में बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों में रेफर किए जाने से कई बार परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ जाता है। परिवार जमीन-जायदाद और अन्य संपत्तियां तक बेचकर इलाज कराने को मजबूर हो जाते हैं। यदि मरीज की स्थिति के अनुसार स्थानीय स्तर पर ही उचित उपचार की सुविधा उपलब्ध हो और छोटे अस्पतालों को सहयोग मिले तो बड़ी संख्या में मरीजों को कम खर्च में बेहतर चिकित्सा सेवा मिल सकती है।
वहीं डा. रवीश अग्रवाल ने अंगदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज हैं जिन्हें किडनी, लिवर, फेफड़े और हृदय जैसे अंगों के प्रत्यारोपण की आवश्यकता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में अब हाथ जैसे अंगों का प्रत्यारोपण भी संभव हो चुका है, लेकिन अंग प्राप्त करने वालों की संख्या की तुलना में अंगदान करने वालों की संख्या बेहद कम है। इसके कारण मरीजों को लंबे समय तक प्रत्यारोपण का इंतजार करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं अथवा अन्य कारणों से ब्रेन डेड होने वाले मरीजों के परिजनों को अंगदान के लिए जागरूक किया जाना चाहिए। एक ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगों से कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी अंगदान को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया गया है।
उन्होंने कहा कि यदि समाज में अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित की जाए तो अनेक परिवारों के जीवन में उम्मीद की नई किरण लाई जा सकती है। बैठक में चिकित्सकों ने चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने और मरीजों के हित में सरकार एवं आईएमए के बीच समन्वय मजबूत करने पर भी जोर दिया।
IMA लखनऊ की मानद सचिव डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बीएएमएस, बीएचएमएस या अन्य पद्धति की चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपनी निर्धारित चिकित्सा पद्धति की सीमाओं से बाहर जाकर एलोपैथिक दवाएं लिखता है या सर्जरी करने लगता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इससे भी बड़ी समस्या ऐसे लोगों की है, जो किसी भी मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्री के बिना चिकित्सक बनकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं और सर्जरी तक कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे फर्जी चिकित्सकों का एक पूरा नेटवर्क काम करता है, जिसे तोड़ने के लिए केवल चिकित्सक संगठनों के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। बल्कि आम जनमानस में भी जागरूकता जरूरी है।
डॉ. श्वेता श्रीवास्तव ने कहा कि चिकित्सा अनुसंधान लगातार आगे बढ़ रहा है और कैंसर तथा ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। लखनऊ में पीजीआई, केजीएमयू समेत कई सरकारी और निजी संस्थानों में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि लखनऊ में ऐसे विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद हैं, जो लिवर, हार्ट समेत विभिन्न प्रकार के ट्रांसप्लांट की सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि एक चिकित्सक वर्षों की पढ़ाई और प्रशिक्षण के बाद मरीजों का इलाज करने के लिए तैयार होता है। ऐसे में अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के साथ एंबुलेंस, प्रशिक्षित चिकित्सक और विशेषज्ञ सर्जन की उपलब्धता भी बेहद महत्वपूर्ण है।
निरंतर चिकित्सा शिक्षा से चिकित्सक हो रहे अपडेट
State Working Committee Meeting के साथ ही IMA लखनऊ द्वारा State Level Refresher Course & CME 2026 का भी आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं से जुड़े 16 विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपने अनुभव एवं नवीन चिकित्सा जानकारी साझा की।
डा. शरद कुमार अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में लगातार नए शोध और तकनीक सामने आ रही हैं। ऐसे में चिकित्सकों को नई चिकित्सा पद्धतियों और उपचार के आधुनिक तरीकों से अपडेट रखने के लिए लगातार ‘कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन’ (CME) कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि चिकित्सक 24 घंटे और वर्षभर पूरी निष्ठा से मरीजों की सेवा करने का प्रयास करते हैं। इसके बावजूद मानवीय भूल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में संगठन का प्रयास रहता है कि कमियों को स्वीकार कर उन्हें दूर किया जाए और चिकित्सा सेवाओं को लगातार बेहतर बनाया जाए।
CME में डा. दीपक धवन, डा. दर्शन बजाज, डा. अभिषेक टंडन, डा. नीरज टंडन, डा. संजय श्रीवास्तव, डा. अजय कुमार पटवा, डा. वर्धा अरोरा, डा. अनिल खन्ना, डा. वलीउल्लाह सिद्दीकी, डा. गीतांजली, डा. आरबी सिंह, डा. आभा दलेला, डा. सुधीर कुमार वर्मा, डा. राकेश सिंह, डा. राकेश सिंह, डा. राकेश श्रीवास्तव, डा. राजीव सक्सेना ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए।

इन वैज्ञानिक सत्रों में किडनी ट्रांसप्लांट, क्षय रोग, अस्थमा, रोबोटिक सर्जरी, लिवर ट्रांसप्लांट, डाइबिटीज सहित कई महत्वपूर्ण एवं समसामयिक चिकित्सा विषयों पर चर्चा हुई। जिसमें डा. संजय श्रीवास्तव (Scientific Chairman), डा. नीरज टंडन एवं डा. संतोष सिंह (Scientific Co-Chairmen), डा. अर्चिका गुप्ता, डा. शीतांशु (Scientific Secretaries) तथा डा. शाश्वत सक्सेना एवं डा. नईम शेख (Scientific Joint Secretaries) शामिल रहे।
आयोजन में IMA UP State के वरिष्ठ पदाधिकारियों की विशेष उपस्थिति रही। जिनमें Dr. Sharad Kumar Agarwal, Patron (IMA UP State एवं Past President, IMA Headquarters), Dr. Rajeev Goel (State President), Dr. P.K. Agarwal (Immediate Past President, IMA UP State), Dr. Ravish Agarwal (President Elect), Dr. Ashish Kumar Agarwal (State Secretary), Dr. Vani Puri, (Finance Secretary), Dr. V.B. Jindal (State Convenor) तथा Dr. Anand Prakash (State Coordinator) प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम की मेजबानी IMA लखनऊ के अध्यक्ष एवं Organising President डा. मनोज कुमार अस्थाना तथा सचिव एवं Organising Secretary डा. श्वेता श्रीवास्तव के नेतृत्व में की गई।
डा. मनोज कुमार अस्थाना ने कहा कि State Working Committee Meeting और State Level Refresher Course & CME का एक साथ आयोजन संगठनात्मक संवाद और Continuing Medical Education दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। चिकित्सा विज्ञान तेजी से बदल रहा है और ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा ज्ञान से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डा. श्वेता श्रीवास्तव ने कहा, “लगभग 22 वर्षों के बाद IMA लखनऊ को State Working Committee Meeting की मेजबानी का अवसर मिलना हमारे लिए अत्यंत गर्व का विषय है। हमारा प्रयास था कि प्रदेशभर से आए IMA पदाधिकारियों और चिकित्सकों को संगठनात्मक विचार-विमर्श के साथ एक सार्थक academic platform भी उपलब्ध कराया जाए। State Level Refresher Course & CME के माध्यम से विभिन्न specialties के विशेषज्ञों ने नवीन चिकित्सा ज्ञान और अपने clinical experience को साझा किया, जिसका लाभ प्रदेशभर से आए चिकित्सकों को मिला।”
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