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ब्लड बैंकों की मनमानी पर लगेगी रोक, डोनर से मरीज तक हर यूनिट की होगी निगरानी


लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। प्रदेश में चल रहे ब्लड बैंको में रक्त और उसके अवयवों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा ब्लड के अनियंत्रित ट्रांसफर पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग की ओर से हाल में प्रदेश के करीब 200 रक्त केंद्रों का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने और मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने के लिए औषधि नियमावली, 1945 तथा नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एनबीटीसी) के मानकों के तहत ये निर्देश जारी किए गए हैं।

ब्लड ट्रांसफर से पहले जरूरत का औचित्य दर्ज करना होगा

निर्देशों के मुताबिक किसी मरीज को रक्त या रक्त अवयव देने से पहले संबंधित क्षेत्र में रक्त की वास्तविक आवश्यकता सुनिश्चित करनी होगी और ब्लड ट्रांसफर का औचित्य जस्टिफिकेशन के रूप में अभिलेखित करना होगा। प्रदेश के बाहर स्थित रक्त केंद्रों से पीआरबीसी की ब्लड ट्रांसफर के दौरान मूल रक्त की कम से कम 30 सेमी (3 सेगमेंट) पायलट ट्यूब और सीरम प्राप्त करना होगा। बाहरी रक्त केंद्र से प्राप्त यूनिट की गुणवत्ता जांच के लिए उसे स्थानीय औषधि निरीक्षक की मौजूदगी में किसी राजकीय रक्त केंद्र को भेजने और जांच रिपोर्ट सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।

हर ब्लड यूनिट के साथ संक्रमण जांच रिपोर्ट जरूरी

प्रत्येक ब्लड ट्रांसफर यूनिट के साथ टीटीआई (ट्रांसफ्यूजन ट्रांसमिसिबल इन्फेक्शन) जांच रिपोर्ट और डोनर फॉर्म की छायाप्रति अनिवार्य रूप से संलग्न करनी होगी। डोनर की ओर से रक्त केंद्र से बाहर रक्त के उपयोग की सहमति भी दर्ज होनी चाहिए। रक्त की मांग और उपलब्धता के बीच पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है।

निर्धारित तापमान पर ही लाया ले जाया जा सकेगा रक्त

ब्लड ट्रांसफर का परिवहन निर्धारित तापमान और शर्तों के तहत करना होगा तथा पूरी प्रक्रिया के दौरान तापमान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। प्राप्तकर्ता रक्त केंद्र में ब्लड ट्रांसफर से मिली यूनिटों के उचित भंडारण के लिए पर्याप्त क्षमता वाले ब्लड स्टोरेज कैबिनेट होना जरूरी होगा और थर्मोग्राफ निरीक्षण के समय प्रस्तुत करना होगा। ट्रांसफर से प्राप्त रक्त अथवा अवयवों तथा उनकी टेस्ट रिपोर्ट की प्रतियां रजिस्टर में दर्ज करने के साथ ईश्यू डॉक्टर के पर्चे को भी रिकॉर्ड में रखा जाएगा।

डोनर से मरीज तक पूरी प्रक्रिया की ट्रेसबिलिटी

दिशा-निर्देशों में डोनर-टू-पेशेंट ट्रेसबिलिटी के अभिलेख सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया है। किसी गुणवत्ता कमी या जटिलता की स्थिति में प्रदाता और प्राप्तकर्ता दोनों रक्त केंद्रों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही ब्लड ट्रांसफर से प्राप्त यूनिटों को केवल संबंधित संस्था के लिए सुरक्षित रखने के बजाय आवश्यकता वाले सभी मरीजों को समान रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

ट्रस्ट संचालित रक्त केंद्रों के लाइसेंस पर भी कड़े नियम

ट्रस्ट द्वारा रक्त केंद्र के नए लाइसेंस अथवा नवीनीकरण के लिए आवेदन करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि केंद्र पर किसी व्यक्ति विशेष अथवा एक ही परिवार का नियंत्रण न हो। ट्रस्ट का सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं जनकल्याण के क्षेत्र में कार्यरत होना तथा मूल ट्रस्ट के रूप में न्यूनतम दो वर्ष से संचालित होना अनिवार्य किया गया है। ट्रस्ट के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन में स्वास्थ्य एवं रक्तदान संबंधी स्पष्ट उद्देश्य होने चाहिए। आवेदन के साथ ट्रस्ट का पैन कार्ड, आयकर पंजीकरण प्रमाणपत्र तथा सदस्यों के नाम, पते, मोबाइल नंबर, ईमेल, आधार और पैन कार्ड की प्रतियां भी देनी होंगी।

रक्त केंद्रों की पूरी जानकारी आवेदन में देनी होगी

ट्रस्ट द्वारा संचालित सभी रक्त केंद्रों के नाम, पते, लाइसेंस संख्या, जारी होने की तारीख, वैधता अवधि तथा निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई का विवरण आवेदन में देना होगा। यदि ट्रस्ट का कोई सदस्य किसी अन्य रक्त केंद्र संचालक ट्रस्ट से जुड़ा है तो संबंधित ट्रस्ट और रक्त केंद्र की लाइसेंस संबंधी जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी। रक्त केंद्र में नियुक्त तकनीशियन अथवा टेक्निकल सुपरवाइजर की शैक्षिक योग्यता डीएमएलटी होने पर उसका प्रमाणपत्र यूपी स्टेट मेडिकल फैकल्टी से सत्यापित होना चाहिए।

बिना तकनीकी स्टाफ के नहीं चलेगा रक्त केंद्र

रक्त केंद्र का संचालन किसी भी दशा में तकनीकी स्टाफ की अनुपस्थिति में नहीं किया जा सकेगा। यदि तकनीकी स्टाफ की गैरमौजूदगी में केंद्र संचालित पाया गया तो लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।आपातकालीन स्थिति को छोड़कर सभी रक्त नमूनों में संक्रामक रोगों की जांच 100 प्रतिशत एलिसा (ELISA) अथवा केमिल्यूमिनेसेंस तकनीक से सुनिश्चित करनी होगी।

डोनर और मरीज की पहचान का रिकॉर्ड अनिवार्य

ब्लड डोनर का आधार कार्ड और आधार से लिंक मोबाइल नंबर डोनर रजिस्टर में दर्ज करना होगा। इसी तरह रक्त प्राप्तकर्ता या उसके तीमारदार का आधार कार्ड और लिंक मोबाइल नंबर भी ईश्यू रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर इनका सत्यापन किया जा सके। मरीज के रक्त के नमूने को कम से कम सात दिन तक सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया गया है। साथ ही पायलट ट्यूब भी सुरक्षित रखना होगा। 

सफाई, उपकरणों की कैलिब्रेशन और शुल्क सूची भी अनिवार्य

रक्त एवं रक्त अवयवों के लिए अलग-अलग उचित तापमान पर स्टोरेज व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी और सभी स्टोरेज कैबिनेट के थर्मोग्राफ रिकॉर्ड सत्यापन के लिए सुरक्षित रखने होंगे। रक्त केंद्रों में स्वच्छता मानकों का पालन तथा सभी आवश्यक उपकरणों का वर्ष में कम से कम एक बार अनिवार्य कैलिब्रेशन कराया जाना होगा। स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) द्वारा निर्धारित शुल्क सूची को केंद्र के प्रमुख एवं दृश्य स्थान पर प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है।

रजिस्टर अपडेट नहीं रखने पर भी कार्रवाई

डोनर रजिस्टर, मास्टर रजिस्टर, ईश्यू रजिस्टर, ब्लड बैग और स्टॉक रजिस्टर समेत सभी मैंडेटरी प्रविष्टियों को अद्यतन रखना होगा, ताकि डोनर से यूनिट तक पूरी ट्रेसबिलिटी पारदर्शी रहे। रजिस्टर अपडेट न मिलने पर लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। तकनीकी स्टाफ को उनके पद के अनुरूप प्रशिक्षण देना भी अनिवार्य किया गया है। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों और रक्त केंद्र संचालकों को इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।