लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सिटीबैंक एन.ए. इंडिया ने घोषणा की कि उसके संस्थागत परिसंपत्ति खाते ने 1,00,000 करोड़ का महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है, जो उसकी फ्रैंचाइज़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। सिटीबैंक एन.ए. इंडिया, भारत में उपभोक्ता बैंकिंग व्यवसाय के बगैर, पूरी तरह से अपने संस्थागत व्यवसाय के ज़रिए इस स्तर तक पहुंची है। पिछले 12 महीनों में, सिटीबैंक एन.ए. इंडिया के परिसंपत्ति खाते में 24,000 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है, यानी 30% से अधिक की वृद्धि, जो व्यापक बैंकिंग प्रणाली की तुलना में काफी अधिक है। इस वृद्धि से मज़बूत ग्राहक गतिविधि, बढ़ते पूंजी निवेश, बढ़ते व्यापार प्रवाह और अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में वित्तपोषण की निरंतर मांग ज़ाहिर होती है।
सिटी इंडिया के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर, ज़िगर शाह ने कहा, “इस उपलब्धि से भारत में संस्थागत व्यवसाय के विशाल अवसर, इसे सेवा प्रदान करने के लिए हमारे प्लेटफॉर्म की मज़बूती और संस्थागत बैंकिंग व्यवसाय को बढ़ाने के लिए सिटी का उल्लेखनीय निवेश रेखांकित होता है। भारत की वृद्धि की संभावना में बढ़ोतरी के बीच व्यवसाय निवेश कर रहे हैं। अपनी आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार कर रहे हैं और वैश्विक बाज़ार में अपनी भागीदारी बढ़ा रहे हैं। जिससे वित्तपोषण, तरलता और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी अधिक जटिल ज़रूरतें पैदा हो रही हैं। सिटी को इस सफर में भागीदार बनने पर गर्व है और वह अपनी स्थानीय विशेषज्ञता और वैश्विक नेटवर्क के ज़रिए इन क्षमताओं को एक साथ लाने की विशिष्ट स्थिति में है।”
सिटीबैंक एन.ए. इंडिया का ग्राहक परिसंपत्ति खाते के दायरे में अलग-अलग उद्योग, ग्राहक खंड और वित्तीय उत्पाद आते हैं, जो प्रमुख भारतीय कॉर्पोरेट, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और वाणिज्यिक बैंकिंग ग्राहक को सेवा प्रदान करता है। इस पोर्टफोलियो में कार्य पूंजी, व्यापार वित्त, आपूर्ति श्रृंखला वित्तपोषण और व्यवस्थित वित्तपोषण समाधान के लिए ऋण शामिल हैं। साथ ही, इसमें पीटीसी (पास-थ्रू सर्टिफिकेट) और कॉर्पोरेट बॉन्ड से जुड़े उत्पादों में निवेश भी शामिल है।
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