मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। आईटी सेवाओं, कंसल्टिंग और व्यावसायिक समाधानों में वैश्विक अग्रणी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (TCS) (BSE: 532540, NSE: TCS) ने एक अनोखी पहल करते हुए उन छात्रों के लिए दुनिया का पहला बड़ा AI हैकाथॉन आयोजित किया, जिन्हें कोडिंग या इंजीनियरिंग नहीं आती। पिछले 6 हफ्तों में 10 राज्यों के 22 कॉलेजों से 10,000 से ज्यादा छात्र इसमें शामिल हुए। ये छात्र आर्ट्स, कॉमर्स, नर्सिंग, खेती और कानून जैसे अलग-अलग विषयों से थे। छात्रों ने नौ भारतीय भाषाओं में उपलब्ध ‘वॉयस-फर्स्ट’ एआई टूल का उपयोग किया।
उन्होंने अपने क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को चुना और सिर्फ 90 से 120 मिनट के अंदर उनके समाधान के मॉडल (प्रोटोटाइप) तैयार कर लिए। टीसीएस का लक्ष्य देश में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना है ताकि गैर-तकनीकी छात्र भी एआई की इस बदलती दुनिया में पीछे न रहें और खुद को सशक्त बना सकें।
सैटेलाइट एडिशन की कामयाबी के बाद, अब इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में मुख्य ‘टाटा भारत YUVAi हैकाथॉन’ आयोजित होगा, जिसमें करीब 2,000 छात्र हिस्सा लेंगे। इस इवेंट में तकनीक की मदद से छात्रों के काम पर नज़र रखी जाएगी और एआई के ज़रिए ही उनका टेस्ट होगा। यहाँ छात्रों को बड़े दिग्गजों और अधिकारियों के सामने अपने बनाए हुए मॉडल दिखाने का मौका मिलेगा। आधुनिक एआई का इस्तेमाल करके टीसीएस का लक्ष्य भारत में एक ऐसी वर्कफोर्स तैयार करना है जो डिजिटल रूप से कुशल हो और तकनीक के क्षेत्र में नई क्रांति ला सके।
टीसीएस के एआई प्रैक्टिस के वीपी और हेड अशोक क्रिश ने कहा, “सॉफ्टवेयर बनाने के लिए कंप्यूटर साइंस की डिग्री की ज़रूरत नहीं है, बस आपके अंदर सीखने की इच्छा और एआई का साथ होना चाहिए। यह हैकाथॉन हर बैकग्राउंड के छात्रों को अपनी भाषा में कुछ नया और असली बनाने का मौका देता है, ताकि वे इस आत्मविश्वास के साथ बाहर निकलें कि वे भी यह कर सकते हैं। इसी तरह हम स्किल्स की कमी को पूरा कर सकते हैं और डिजिटल उद्यमियों को तैयार कर सकते हैं। यह पहल टीसीएस के उस लक्ष्य को पूरा करती है जिसमें वह भारत में एक ‘एआई-रेडी’ वर्कफोर्स तैयार कर दुनिया की सबसे बड़ी एआई-आधारित टेक्नोलॉजी कंपनी बनना चाहती है।”
नॉन-कोडिंग बैकग्राउंड वाले छात्रों को एआई की व्यावहारिक समझ देकर, टीसीएस डिजिटल रूप से कुशल और विविधतापूर्ण कार्यबल की इंडस्ट्री की एक बड़ी जरूरत को पूरा कर रहा है। यह पहल वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवाचार के केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को और मज़बूत करती है। यह कार्यक्रम भारत के उस विशाल और उपेक्षित टैलेंट पूल तक पहुँचता है, जिस पर अब तक ध्यान नहीं दिया गया। देश के ग्रेजुएट छात्रों में से 62% आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स पढ़ते हैं, और केवल 10-12% भारतीय ही अंग्रेजी में कुशल हैं। यह हैकाथॉन भाषा, तकनीकी प्रशिक्षण और कोडिंग के पुराने बंधनों को तोड़ता है। यह कई भाषाओं में एआई सहायता प्रदान करता है, जिससे छात्र सिर्फ एक सेशन में अपनी समस्या को पहचान कर उससे जुड़ा एक वर्किंग ऐप तैयार कर लेते हैं।
जनवरी 2026 से, इस पहल के ‘सैटेलाइट एडिशन’ (छोटे क्षेत्रीय कार्यक्रम) भारत के सभी हिस्सों के कॉलेजों में आयोजित किए गए हैं, जिनमें केरल, तमिलनाडु, असम, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं। ये कार्यक्रम इस योजना को बड़े स्तर पर परखने और मेंटर्स (मार्गदर्शकों) का एक मजबूत नेटवर्क बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं, जो मुख्य हैकाथॉन और भविष्य के कार्यक्रमों में मदद करेंगे। इस तरह एक निरंतर चलने वाली राष्ट्रीय पहल की नींव रखी जा रही है, जो भारत के प्रतिभाशाली छात्रों को केवल तकनीक का उपयोग करने वालों के बजाय तकनीक बनाने वालों में बदल देती है।
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