(भगवान प्रसाद गौड़) हिंसा का अर्थ केवल शारीरिक आघात तक सीमित नहीं है। किसी व्यक्ति के मन, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को चोट पहुँचाने वाला व्यवहार भी हिंसा का ही एक रूप है। दुर्भाग्य से आधुनिक समाज में एक ऐसी मानसिक हिंसा निरंतर बढ़ रही है जिसे सामान्य और आवश्यक व्यवहार …
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