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Tag Archives: I’m saying something about the cold ashes of the crematorium.

मैं श्मशान की ठंडी राख, कुछ बोल रही हूं

(अरविंद कांत त्रिपाठी) मैं श्मशान से 15 किशोरों के चिता की ठंडी हुई “राख” बोल रही हूं – अभी तो वह नवनिहाल राष्ट्र की संरचना में सहयोग करने का ताना बाना बुन रहे थे लेकिन भ्रष्ट तंत्र और उसके सहायक उपकरणों (निजी संस्थानों) के घर्षण से लगी आग ने उन्हें …

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