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दिलों को जीतने और दंगाइयों को झुकाने का नाम है राजकुमार अग्रवाल, IPS की नई पारी की शुरुआत

लखनऊ (विशेष संवाददाता, टेलीस्कोप टुडे)। जब खाकी सिर्फ एक वर्दी नहीं, बल्कि समाज के विश्वास का अभेद्य कवच बन जाती है, तब राजकुमार अग्रवाल जैसे जांबाज अफसरों का जन्म होता है। उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा (पीपीएस) से भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के गौरवशाली पद पर पदोन्नत हुए राजकुमार अग्रवाल की यह कामयाबी सिर्फ एक पद की गरिमा नहीं, बल्कि उनके ढाई दशक के उस तप, त्याग और अटूट कर्तव्यनिष्ठा की ढाल है। जिसने हर संकट में सूबे की कानून-व्यवस्था को एक नया संबल दिया। 

उन्हें करीब से जानने वाले जानते हैं कि राजकुमार अग्रवाल जी महज एक पुलिस अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे संकट के समय में एक कुशल रणनीतिकार, संवाद के सेतु और अपराधियों के लिए काल बनकर उभरते हैं। उनका पूरा सफरनामा इस बात का गवाह है कि जब दृढ़ इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता एक साथ कदम मिलाती हैं, तो बड़े से बड़ा तनाव भी शांति के सुरों में बदल जाता है।

मूल रूप से हमीरपुर जिले के राठ के रहने वाले रामगोपाल अग्रवाल के सुपुत्र राजकुमार अग्रवाल की शुरुआती परवरिश और शिक्षा नैनीताल व लखनऊ के खूबसूरत और अनुशासित माहौल में हुई। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसी ज्ञान की प्रतिष्ठित स्थली से स्नातक और परास्नातक की शिक्षा ग्रहण की, जिसने उनके भीतर संवेदनशीलता, बौद्धिकता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का एक ऐसा मिश्रण तैयार किया जो आज के प्रशासनिक तंत्र में विरल है।

साल 2003 में झांसी से शुरू हुआ उनका यह पुलिस सेवा का सफर जालौन, बरेली, लखनऊ, प्रतापगढ़, कानपुर नगर और हापुड़ जैसे कई जिलों से होते हुए 25 जून 2026 को आईपीएस के इस सुनहरे मोड़ पर पहुंचा है। गौरव के इस सुनहरे पल पर राठ समेत बुंदेलखंड में भी खुशी की लहर है। इस लंबी यात्रा में उन्होंने जहां भी कदम रखे, वहां की जनता के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

बरेली के इतिहास में उनका नाम एक ऐसे संकटमोचक के रूप में दर्ज है, जिसने शहर को सांप्रदायिक वैमनस्य की आग से बाहर निकाला था। साल 2012 का वह दौर जब बरेली शहर सांप्रदायिक तनाव के बेहद नाजुक और कठिन दौर से गुजर रहा था। तब प्रशासन ने सीओ सिटी प्रथम और सीओ सिटी द्वितीय के रूप में राजकुमार अग्रवाल के कंधों पर इस सुलगती आग को शांत करने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी।

बाकरखाना, कोहाड़ापीर, गुड़हड़बग और जगतपुर जैसे बेहद संवेदनशील इलाकों में जब माहौल बेहद तनावपूर्ण था, तब इस अफसर ने न केवल अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया, बल्कि अपनी अनूठी संवाद शैली से दोनों समुदायों के बीच बिखरे विश्वास को दोबारा समेटा। 

उन्होंने बंद कमरों में फैसले लेने के बजाय सड़कों पर उतरकर जनता से सीधा संवाद किया, त्वरित और निष्पक्ष निर्णय लिए और बेहद प्रभावी पुलिसिंग के जरिए हालात को पूरी तरह सामान्य कर दिया। उनकी इस सूझबूझ और शांत कार्यशैली की सराहना उस वक्त पुलिस महकमे के सर्वोच्च अधिकारियों ने भी मुक्त कंठ से की थी। वर्तमान में मथुरा में तैनात यह अधिकारी आज भी उसी सादगी और कर्तव्यपरायणता के साथ सेवा में जुटे हैं।

राजकुमार अग्रवाल का व्यक्तित्व जितना मृदुभाषी और मिलनसार है, अपराधियों और माफियाओं के लिए वे उतने ही कठोर और वज्र के समान हैं। साल 2021 में बरेली में एसपी देहात के पद पर तैनाती के दौरान उन्होंने नशे के सौदागरों के खिलाफ जो जंग छेड़ी, वह आज भी नजीर के तौर पर याद की जाती है।

फतेहगंज पूर्वी, फतेहगंज पश्चिमी, फरीदपुर और मीरगंज जैसे इलाकों में सक्रिय ड्रग नेटवर्क को उन्होंने अपनी अचूक रणनीति से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। वे केवल अपराधियों को जेल भेजने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने अपराध की जड़ पर प्रहार करते हुए एनडीपीएस अधिनियम के तहत पहली बार ऐतिहासिक कार्रवाई की और नशे के कारोबार से काली कमाई जुटाने वाले माफियाओं की लगभग 100 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क और जब्त कर लिया। इस अभूतपूर्व कार्रवाई ने पूरे सूबे के अपराधी गिरोहों में एक ऐसा खौफ पैदा किया कि कई गैंग्स ने घुटने टेक दिए।

राजकुमार अग्रवाल की सबसे बड़ी ताकत उनका जनसंपर्क और जनता के प्रति अटूट संवेदनशीलता है। वे हमेशा इस बात पर यकीन करते हैं कि कानून का राज तभी स्थापित हो सकता है जब आम आदमी के मन में पुलिस के प्रति डर नहीं, बल्कि सुरक्षा का भाव हो। गंभीर और संवेदनशील मामलों में उनकी शांत सोच, धैर्य और त्वरित निर्णय लेने की अदभुत क्षमता के कारण ही सरकार ने हमेशा उन्हें सबसे चुनौतीपूर्ण मोर्चों पर तैनात किया।

आज जब वे आईपीएस अफसर के रूप में अपने करियर के एक नए और स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं, तो यह न केवल उनके परिवार और पुलिस महकमे के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि उस आम जनता के लिए भी बेहद फख्र की बात है जो यह जानती है कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए खाकी में एक ऐसा नायक मुस्तैद है जो पूरी तरह ईमानदार, संवेदनशील और जांबाज है। उनका यह सफरनामा आने वाली पीढ़ियों और युवा अधिकारियों के लिए कर्तव्यपरायणता की एक बेहतरीन पाठशाला है।

राम प्रताप गुप्ता (प्रदेश संगठन मंत्री, उत्तर प्रदेश कसौंधन समाज) ने नवनियुक्त आईपीएस राजकुमार अग्रवाल को उनकी इस ऐतिहासिक और गरिमामयी पदोन्नति पर पूरे समाज की ओर से बधाई दी। उन्होंने कहा कि सच्ची निष्ठा, अदम्य साहस और न्यायप्रियता जब किसी व्यक्तित्व का आभूषण बनती है, तो पूरा समाज खुद को गौरवान्वित महसूस करता है। राजकुमार ने अपने ढाई दशक के बेदाग पुलिस करियर में केवल अपराध और अपराधियों पर ही लगाम नहीं लगाई, बल्कि खाकी को मानवीय संवेदनशीलता का एक नया और आत्मीय चेहरा दिया है। विपरीत परिस्थितियों में उनका शांत रहकर त्वरित निर्णय लेना और समाज के हर वर्ग में संवाद के जरिए विश्वास बहाल करना, उनकी असाधारण प्रशासनिक क्षमता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि वैश्य समाज के संस्कारों को अपनी कर्मठता से सींचकर, अपराधियों के खिलाफ वज्र और आम जनता के लिए ढाल बनने वाले इस जांबाज अफसर की हर उपलब्धि पर हमें नाज है। आपका यह स्वर्णिम सफरनामा हमारी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का एक जीवंत प्रतीक है। ईश्वर से प्रार्थना है कि आपकी कर्तव्यनिष्ठा का यह नया अध्याय सफलता और लोक-कल्याण के नए प्रतिमान गढ़े।