Thursday , September 10 2026

लेख/स्तम्भ

दमन के विरुद्ध विद्रोह और दामोदर हरि चापेकर

जयंती पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल राजनीतिक आंदोलनों, प्रस्तावों और जनसभाओं का इतिहास नहीं है। यह उन असंख्य देशभक्तों के साहस, त्याग और बलिदान का इतिहास भी है जिन्होंने विदेशी शासन के अन्याय और दमन के सामने झुकने से इनकार कर दिया। ऐसे ही …

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India’s Demographic Dividend: Opportunity or Time Bomb?

By Pranav Mittal For decades, economists have described India’s youthful population as its greatest strategic asset. With over half of its citizens below the age of thirty and millions entering the workforce each year, India possesses a demographic profile that many ageing economies can only envy. Policymakers frequently celebrate this …

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अग्निकांडों की पुनरावृत्ति और जवाबदेही का सुलगता प्रश्न

(डा.एस.के. गोपाल) 22 जून 2026 को लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित एक निजी कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया। इस दर्दनाक हादसे में कई लोगों की मृत्यु हुई तथा अनेक घायल हुए हैं जिनका उपचार चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी …

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झांसी की रानी और अस्मिता का संघर्ष

बलिदान दिवस (18 जून) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) भारतीय इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं जो समय की सीमाओं से परे जाकर प्रेरणा के शाश्वत स्रोत बन जाते हैं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ऐसा ही एक नाम है। उनका जीवन केवल एक रानी का जीवन नहीं था, वह अन्याय …

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मानवता पूछ रही है: क्या विश्व नेतृत्व ने सबक लिया?

(भगवान प्रसाद गौड़) लगभग 7250 से अधिक मौतें, 300 अरब डॉलर की तबाही। तेल बाजारों में उथल-पुथल। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता। और पूरी दुनिया में एक भय-क्या दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध की ओर धकेल दिया गया है? फिर अचानक युद्धविराम और समझौते की खबर आती है। दुनिया राहत की सांस …

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जिजाबाई और स्वराज्य की वैचारिक नींव

पुण्यतिथि (17 जून) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) भारतीय इतिहास में राजमाता जिजाबाई का महत्वपूर्ण स्थान है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज की माता थीं। उन्होंने स्वराज्य की अवधारणा, नेतृत्व के संस्कार और जनकल्याणकारी शासन की भावना को आकार दिया। उनके जीवन का अध्ययन यह समझने में सहायता करता है कि …

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रक्त की बूंदें बन जाती हैं जीवन की आशा

विश्व रक्तदान दिवस (14 जून) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर और नर्सें अच्छी तरह जानते हैं कि कई बार जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी केवल कुछ यूनिट रक्त जितनी होती है। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति हो, प्रसव के दौरान गंभीर स्थिति …

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जसपाल राणा – अभी तो बहुत काम बाकी था

(मृत्युंजय दीक्षित) भारतीय निशानेबाजी के महारथी और कोच जसपाल राणा के असामयिक निधन से सभी ओर शोक व्याप्त है।  मात्र 49 वर्ष में चले जाना निश्चय ही ह्रदय विदारक है। देश के लिए अपूरणीय क्षति है। जसपाल  निशानेबाजी के ऐसे पुरोधा थे जिन्होंने कॉमनवेल्थ खेलों  में 15 पदक जीतकर भारत …

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तुलना का दंश : जब शब्द बन जाते हैं मानसिक हिंसा

(भगवान प्रसाद गौड़) हिंसा का अर्थ केवल शारीरिक आघात तक सीमित नहीं है। किसी व्यक्ति के मन, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को चोट पहुँचाने वाला व्यवहार भी हिंसा का ही एक रूप है। दुर्भाग्य से आधुनिक समाज में एक ऐसी मानसिक हिंसा निरंतर बढ़ रही है जिसे सामान्य और आवश्यक व्यवहार …

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तृण तृण बिखरती तृणमूल

(मृत्युंजय दीक्षित) जब 4 मई 2026 को बंगाल जनता ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार की विदाई का जनादेश सुनाया तब किसी ने भी सपने नहीं सोचा था कि इस हार के बाद तृणमूल कांग्रेस तृण तृण होकर बिखरने लगेगी।  बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 80 विधायक जीतकर …

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