Thursday , September 10 2026

लेख/स्तम्भ

कारगिल की विरासत और भारत का भविष्य

कारगिल विजय दिवस (26 जुलाई) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) युद्ध किसी भी सभ्य समाज की पहली पसंद नहीं हो सकता। भारत की सांस्कृतिक परंपरा भी सदैव शांति, सह-अस्तित्व और संवाद की पक्षधर रही है। लेकिन जब राष्ट्र की संप्रभुता, सीमाओं और स्वाभिमान पर आघात होता है, तब संघर्ष अपरिहार्य …

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महाराज रामनाथ और दूध भात खाता नाऊ!

आर्यावर्त के उत्‍तर में एक राज्‍य था. उसके राजा थे रामनाथ. उनके मंत्रिमंडल में कई अच्‍छे लोग थे. कुछ निर्दयी लोग भी थे. राजा पहले जनता से सीधे मिलते और उनके सुख दुख सुनते थे. राज्‍य का कोई भी नागरिक बेरोकटोक अपनी बात, समस्‍या, परेशानी राजा को बता सकता था. …

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चरित्र का क्षरण और राष्ट्र का भविष्य

(डॉ. एस.के. गोपाल) हाल के दिनों में एक ओर राममंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान की कथित चोरी का मामला चर्चा में रहा। दूसरी ओर लखनऊ में आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में पूर्व एआरटीओ के आवास पर छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी और …

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शब्दों से जनमन रचने वाले आनन्द बक्शी

जयंती (21 जुलाई) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) फिल्मी गीत समाज में लोक-संस्कृति का जीवंत हिस्सा रहे हैं। हमारी खुशियाँ, बिछोह, प्रेम, मित्रता, उत्सव, भक्ति और जीवन-दर्शन, सब किसी न किसी गीत में अपना प्रतिबिंब पाते हैं। यही कारण है कि हिंदी फिल्म संगीत के महान रचनाकारों की चर्चा केवल …

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स्वाधीनता की सत्तावनी चेतना का मंगल स्वर

जयंती (19 जुलाई) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) राष्ट्रों का इतिहास केवल तिथियों, युद्धों और शासकों का इतिहास नहीं होता। वह उन व्यक्तियों की कहानी भी होती है जिनके साहस ने समाज की चेतना को नई दिशा दी। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में मंगल पांडे ऐसा ही एक नाम हैं। …

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युगांत

वो तंग गली मेरे बचपन कीहर मोड़ जहां इक याद खड़ीकुछ धुंधली सीकुछ प्यारी सीजीवन की एक किताब मिलीदो चार पृष्ठ बस पलटे थेसोंधी खुशबू से मनपुलक उठामन हुआ बावराउड़ निकलायादों की एक दुकान दिखीजहां मिलती खुशियांप्रेम-भाव सेमठरी थी वोअहसास भरी।जो चार कदमहम बढ़ निकलेइक फाटक परहर आंख जमींहोंठों पर …

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2047 में भाजपा: क्या मोदी के बाद की पीढ़ी सत्ता बचा पाएगी? 

(डॉ. अतुल मलिकराम) भारतीय राजनीति के इतिहास में वर्ष 2047 एक ऐतिहासिक मील का पत्थर होगा। जब देश अपनी आजादी की शताब्दी मनाएगा, तब देश का राजनीतिक परिदृश्य आज के मुकाबले पूरी तरह बदल चुका होगा और इस बदलाव के केंद्र में भारतीय जनता पार्टी होगी। 1980 में मात्र 2 …

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जलवायु परिवर्तन और डेयरी उत्पादकता : भारत के लिए ‘क्लाइमेट-स्मार्ट’ कदम उठाने का समय

(कैप्टन (डॉ.) ए.वाई. राजेंद्र) भारत के डेयरी क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रति अपनी क्षमता को जल्द से जल्द मजबूत करना होगा। अल नीनो (El Niño) की स्थिति के कारण कमजोर मानसून, लंबे समय तक चलने वाली लू (हीटवेव) और मवेशियों पर बढ़ते गर्मी के तनाव (हीट स्ट्रेस) का खतरा …

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भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव – प्रधानमंत्री मोदी की नवाचार वाली विदेश नीति 

  मिलेगा यूरेनियम और बढ़ेगी खेल तथा व्यापार संबंधों की सघनता (मृत्युंजय दीक्षित) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया ओैर न्यूजीलैंड  की महत्वपूर्ण व एतिहासिक यात्रा संपन्न करने के  बाद स्वदेश वापस आ गए हैं। हिंद प्रशांत महासागर के इन तीन देशों की यात्रा कई दृष्टियों से  ऐतिहासिक सिद्ध हुई। इन …

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आज भी प्रासंगिक है चंद्रशेखर की राजनीति

पुण्यतिथि (8 जुलाई) पर विशेष (डॉ. एस.के. गोपाल) भारतीय राजनीति में कुछ नेता समय के साथ इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं। कुछ नेता इतिहास की दिशा भी तय करते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ऐसे ही व्यक्तित्व थे। उनका जीवन सार्वजनिक मर्यादा, वैचारिक स्पष्टता और जनसेवा का उदाहरण है। उन्होंने …

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