नई दिल्ली। भारत में आतंकी संगठन जैश-ए मोहम्मद (JeM) अब अपने नेटवर्क को छात्रों के बीच फैलाने की योजना बना रहा है। खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के आधार पर पता चला है कि यह संगठन स्कूल और कॉलेजों में घुसपैठ कर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का प्रयास कर रहा है, ताकि भविष्य में ‘लोन वुल्फ’ आतंकियों की एक नई फौज तैयार की जा सके।हाल ही में फरीदाबाद मॉड्यूल केस की जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि जैश ने एक मेडिकल इंस्टीट्यूट में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इस तथाकथित ‘व्हाइट कॉलर मॉड्यूल’ में डॉक्टरों को भी शामिल किया गया था। जांच में पता चला कि इस मॉड्यूल ने करीब 2500 किलो अमोनियम नाइट्रेट जुटाया था, जिसका उपयोग दिल्ली-एनसीआर में कई हमलों की योजना बनाने में किया जाना था।खुफिया एजेंसियों के अनुसार, जैश अब लंबी अवधि की रणनीति के तहत स्कूल और कॉलेज के युवाओं को टारगेट कर रहा है। संगठन अपने प्रचार सामग्री के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलता है, और फिर ये युवा अपने दोस्तों और परिचितों के बीच इस विचारधारा को फैलाते हैं।अधिकारियों का मानना है कि पहले पाकिस्तान में लश्कर-ए तैयबा और जैश जैसी संगठनों ने इसी रणनीति का प्रयोग किया था। अब भारत में भी इस दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में जो छात्र कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित हो जाते हैं, जब वो 20-25 साल के हो जाते हैं, तब वे पूरी तरह से ब्रेनवॉश हो चुके होते हैं और आतंकी हमलों के लिए तैयार हो सकते हैं।इस संदर्भ में, इस हफ्ते महाराष्ट्र एंटी टेररिज़म स्क्वॉड (ATS) ने मुंबई से अयान शेख नाम के एक छात्र को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि वह पिछले छह महीनों से कई युवाओं के संपर्क में था और उन्हें जैश के लिए भर्ती करने का प्रयास कर रहा था।ATS ने यह भी पता लगाया कि शेख ने दो युवाओं को कट्टरपंथी बनाने में सफलता हासिल की थी और उन पर आतंकवादी ट्रेनिंग के लिए देश से बाहर भेजने की योजना बना रहा था। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते इस साजिश को नाकाम कर दिया।‘लोन वुल्फ’ मॉडल का नेटवर्कखुफिया अधिकारियों के मुताबिक, जैश की नई रणनीति बड़े नेटवर्क बनाने की बजाय छोटे-छोटे समूहों में काम करने पर केंद्रित है, ताकि उन्हें ट्रैक करना कठिन हो सके। फरीदाबाद मॉड्यूल का खुलासा हुआ तो संगठन को एहसास हुआ कि बड़े नेटवर्क जल्दी पकड़े जाते हैं। इसलिए, अब वह ‘लोन वुल्फ’ मॉडल को प्रोत्साहन दे रहा है, जिसमें हमलावर अकेले या छोटे समूह में टारगेट चुनकर कार्रवाई करते हैं।खुफिया एजेंसियों का कहना है कि यदि यह रणनीति सफल हो जाती है और युवाओं को धीरे-धीरे कट्टरपंथी बनाया जाता है, तो आने वाले वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे आतंकी हमलावर तैयार हो सकते हैं, जिनको पहचानना बहुत मुश्किल होगा।अधिकारियों का मानना है कि यदि किसी युवक को 3-5 साल तक लगातार कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया जाए, तो उसके विचारों को बदलना बहुत ही कठिन हो जाता है। इसलिए, इन नेटवर्क को शुरुआती चरण में ही तोड़ना अत्यंत आवश्यक है, ताकि देश की सुरक्षा को खतरा कम किया जा सके।
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