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400वें किडनी ट्रांसप्लांट के साथ मेदांता ने मरीजों के भरोसे को दी नई उड़ान

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। किडनी की गंभीर बीमारी से परेशान एक मरीज जब मेदांता लखनऊ पहुंचा, तब उसकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी। मरीज लंबे समय से इलाज करा रहा था और नियमित डायलिसिस पर निर्भर था। बीमारी की वजह से उसका सामान्य जीवन भी प्रभावित हो रहा था। मेदांता के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मरीज की पूरी जांच की और पाया कि उसके लिए किडनी ट्रांसप्लांट सबसे बेहतर विकल्प है। परिवार की सहमति और सभी जरूरी प्रक्रियाओं के बाद मरीज का सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। खास बात यह रही कि यह मेदांता लखनऊ का 400वां किडनी ट्रांसप्लांट था, जिसने अस्पताल के ट्रांसप्लांट कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को जोड़ा।

25 जून 2020 को शुरू हुए मेदांता लखनऊ के किडनी ट्रांसप्लांट कार्यक्रम ने सैकड़ों मरीजों को नया जीवन देने का काम किया है। कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच शुरू हुए इस कार्यक्रम ने लगातार प्रगति की और जून 2026 तक 419 सफल किडनी ट्रांसप्लांट पूरे कर लिए।

अस्पताल में 57 इनकम्पैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए गए हैं। इसके अलावा बच्चों में किडनी ट्रांसप्लांट, रोबोटिक तकनीक की मदद से किए गए ट्रांसप्लांट और कई हाई रिस्क मामलों में भी अच्छे नतीजे मिले हैं। अस्पताल ने 9 वर्ष की आयु के बच्चे से लेकर 65 वर्ष तक के मरीजों का सफल ट्रांसप्लांट किया है। वहीं 76 वर्ष तक की आयु के अंगदाताओं ने भी अपने प्रियजनों को नया जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मेदांता लखनऊ में अब तक सबसे अधिक अंगदान परिवार के सदस्यों ने किया है। 139 पत्नियों, 130 माताओं और दादी, 42 बहन और भाभी सहित बड़ी संख्या में परिजनों ने अपने प्रियजनों के लिए किडनी दान की है। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्य  पिता, भाई, बेटियां और पति भी अंगदाता बने हैं। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा क्षेत्र की सफलता है, बल्कि परिवारों के प्रेम, त्याग और भरोसे की भी कहानी है।

डॉ. राकेश कपूर (मेडिकल डायरेक्टर एवं डायरेक्टर यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी) ने कहा, “400वां किडनी ट्रांसप्लांट हमारे लिए केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों के भरोसे का प्रतीक है। हर सफल ट्रांसप्लांट किसी व्यक्ति को नया जीवन और उसके परिवार को नई उम्मीद देता है। हमारी टीम का लक्ष्य हमेशा सुरक्षित और बेहतर इलाज देना रहा है। हमें खुशी है कि हम मुश्किल मामलों में भी लगातार अच्छे नतीजे दे पा रहे हैं।”

डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि अंगदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। यदि किसी व्यक्ति को ब्रेन डेड घोषित किया जाता है और उसके परिजन अंगदान के लिए सहमति देते हैं, तो वह एक व्यक्ति अपने अंगों के माध्यम से छह या उससे अधिक लोगों को नया जीवन दे सकता है। उन्होंने बताया कि ब्रेन डेड व्यक्ति के हृदय, यकृत (लिवर), फेफड़े, गुर्दे (किडनी) और कॉर्निया सहित कई अंग जरूरतमंद मरीजों के प्रत्यारोपण में उपयोग किए जा सकते हैं। इससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जीवनदान मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

डॉ. राज कुमार शर्मा (डायरेक्टर नेफ्रोलॉजी) ने कहा, “किडनी फेल होने वाले कई मरीज लंबे समय तक डायलिसिस पर निर्भर रहते हैं। सही समय पर किया गया किडनी ट्रांसप्लांट उन्हें बेहतर और सामान्य जीवन जीने का मौका देता है। 400 से अधिक सफल ट्रांसप्लांट इस बात का प्रमाण हैं कि अनुभवी टीम, एडवांस्ड तकनीक और मरीजों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के साथ अच्छे नतीजे हासिल किए जा सकते हैं। हम लोगों से अंगदान के प्रति जागरूक होने की भी अपील करते हैं।”

इस कार्यक्रम की सफलता में डॉ. अनीश श्रीवास्तव (डायरेक्टर यूरोलॉजी रोबोटिक्स एंड किडनी ट्रांसप्लांट), डॉ. धर्मेंद्र सिंह भदौरिया (डायरेक्टर नेफ्रोलॉजी), डॉ. मनमीत सिंह (डायरेक्टर – यूरोलॉजी रोबोटिक्स एंड किडनी ट्रांसप्लांट), डॉ. रोहित कपूर (सीनियर कंसल्टेंट – यूरोलॉजी, रोबोटिक्स एवं किडनी ट्रांसप्लांट), डॉ. इमरान अहमद खान (सीनियर कंसल्टेंट – यूरोलॉजी, रोबोटिक्स एवं किडनी ट्रांसप्लांट), डॉ. मनीष खट्टर (कंसल्टेंट – यूरोलॉजी, रोबोटिक्स एवं किडनी ट्रांसप्लांट) तथा डॉ. नवनीत सौरव (एसोसिएट कंसल्टेंट – यूरोलॉजी, रोबोटिक्स एवं किडनी ट्रांसप्लांट) सहित नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, एनेस्थीसिया, डायलिसिस, नर्सिंग, रेडियोलॉजी और लैब की टीमों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।