लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में, वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने मैन्युफैक्चरिंग के भविष्य को धरती से परे, अंतरिक्ष में होते हुए देखा और इस दिशा में अपनी दूरदर्शी सोच साझा की। उन्होंने कहा कि जो कभी विज्ञान कथा जैसा लगता था, वह अब हकीकत बनने की ओर बढ़ रहा है। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह रॉकेट लॉन्च की लागत में भारी गिरावट है। जो पंद्रह साल पहले प्रति किलोग्राम लगभग 15,000 थी, वह अब घटकर करीब 2,000/किलोग्राम हो गई है और भविष्य में इसके 200/किलोग्राम तक आने की संभावना है।
अनिल अग्रवाल ने बताया कि अंतरिक्ष में मैन्युफैक्चरिंग के कई फायदे हैं। जैसे वायुमंडलीय हस्तक्षेप न होना, मौसम की रुकावटों का अभाव, और शून्य गुरुत्वाकर्षण, जो निर्माण प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदल सकते हैं। अंतरिक्ष में ऐसे स्थान मौजूद हैं जहां लगातार सूर्य की रोशनी मिलती है, जिससे स्थायी और कुशल ऊर्जा आपूर्ति संभव होती है। उन्होंने कहा कि हाई-टेक क्षेत्रों जैसे कि प्रिसिशन सेमीकंडक्टर्स, एडवांस्ड मेडिसिन्स और रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस को इससे बड़ा लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि क्षुद्रग्रहों (एस्टेरॉइड्स) में मौजूद बहुमूल्य खनिज संसाधन भविष्य में नई माइनिंग संभावनाओं को जन्म दे सकते हैं। अनिल अग्रवाल का यह विज़न अंतरिक्ष को सिर्फ अगली इंडस्ट्रियल सीमा नहीं, बल्कि असीमित आर्थिक और तकनीकी संभावनाओं का क्षेत्र घोषित करता है।
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