मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सोनी सब का हस्तिनापुर के वीर शो गुरु-शिष्य संबंध की कालजयी परंपरा को जीवंत करता है, जहाँ आचार्य द्रोणाचार्य (जितेन लालवानी) और उनके शिष्यों के बीच का पौराणिक बंधन अनुशासन, समर्पण और धैर्य से हर योद्धा की यात्रा को आकार देता है। राष्ट्रीय खेल दिवस फिटनेस और खेल उत्कृष्टता की भावना का उत्सव मनाता है और इस अवसर पर शो के कलाकार उन लोगों या खेलों पर विचार साझा करते हैं। जिन्होंने उन्हें स्वस्थ आदतें बनाने, अनुशासित रहने और अपनी शारीरिक सीमाओं को आगे बढ़ाने में प्रेरित किया है।
द्रोणाचार्य का किरदार निभा रहे जितेन लालवानी ने साझा किया, “मेरे फिटनेस गुरु हमेशा मेरे ट्रेनर रहे हैं, जिन्होंने मुझे सिखाया कि फिटनेस किसी खास तरह दिखने के बारे में नहीं है, बल्कि ताकत और अनुशासन बनाने के बारे में है, जिसे आप लंबे समय तक बनाए रख सकें। वे हमेशा निरंतरता को लेकर बहुत सख़्त रहे हैं और अक्सर याद दिलाते हैं कि यदि आप केवल तब मेहनत करते हैं, जब आपको प्रेरणा महसूस होती है, तो फिर आप उत्कृष्ट परिणाम की उम्मीद नहीं कर सकते। यह सोच मेरे साथ उन दिनों भी रही है, जब मैं लंबे समय तक शूटिंग कर रहा होता हूँ। द्रोणाचार्य का किरदार निभाने से मुझे गुरु-शिष्य संबंध की और भी अधिक गहराई से पहचान हुई है, क्योंकि एक अच्छा शिक्षक सिर्फ यह नहीं बताता कि क्या करना है, बल्कि वह आपको यह अनुशासन सिखाता है कि उसे लगातार बनाए रखना है।”
युधिष्ठिर का किरदार निभा रहे अथर खान ने साझा किया, “मेरे पिता हमेशा मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं, जब बात सक्रिय रहने और खेलों को महत्व देने की आती है। जब मैं सेट पर होता हूँ, तो मेरे सह-कलाकार और मैं अक्सर अपने ब्रेक का पूरा उपयोग बाहर जाकर साथ खेलने में करते हैं, बजाय इसके कि हम वैनिटी वैन में बैठे रहें या फोन पर स्क्रॉल करें। हमें क्रिकेट, फुटबॉल और छुपन-छुपाई जैसे खेल ब्रेक के दौरान खेलना बहुत पसंद है। यह हमारे लिए आराम करने, मज़े करने और शूटिंग के बीच थोड़ी हलचल पाने का सबसे आसान तरीका बन गया है। साथ खेलने से हमारी टीम और भी मज़बूत हुई है और मुझे लगता है कि यही खेलों की सबसे बड़ी खूबसूरती है। वे लोगों को जोड़ते हैं, टीमवर्क सिखाते हैं और याद दिलाते हैं कि खेल का आनंद लेना ज़रूरी है, चाहे आप जीतें या हारें। इस राष्ट्रीय खेल दिवस पर, मुझे लगता है कि सबसे अहम् बात यह है कि आप कोई ऐसा खेल चुनें, जिसे आप पसंद करते हों और उसके लिए समय निकालें।”
दुर्योधन का किरदार निभा रहे आयुध भानुशाली ने कहा, “दुर्योधन का किरदार निभाना और गदा युद्ध का प्रशिक्षण लेना मुझे ताकत, आत्मविश्वास और अनुशासन का महत्व सिखा चुका है। इसने मुझे कुश्ती और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसे खेलों में और भी अधिक रुचि दिलाई है, जहाँ ध्यान और अभ्यास बेहद मायने रखते हैं। मैंने बुनियादी कुश्ती की ट्रेनिंग भी ली है, जिसने मुझे दिखाया कि यह खेल कितना चुनौतीपूर्ण और मज़ेदार हो सकता है। मैं सुशील कुमार और साक्षी मलिक जैसे पहलवानों को आदर्श मानता हूँ, जो अपनी मेहनत और उपलब्धियों से मुझे प्रेरित करते हैं। मुझे अपने दोस्तों के साथ खेलना भी बहुत पसंद है, क्योंकि इसमें हमेशा थोड़ी प्रतिस्पर्धा रहती है और हर कोई जीतना चाहता है।”
अश्वत्थामा का किरदार निभा रहे धवल त्रिपाठी ने जोड़ा, “हाल ही में मेरे भीतर तीरंदाज़ी के प्रति गहरी रुचि विकसित हुई है और इसका कारण मेरा किरदार अश्वत्थामा है। एक योद्धा का किरदार निभाना, जो युद्ध और धनुर्विद्या में प्रशिक्षित है, ने मुझे इस खेल में लगने वाले ध्यान, सटीकता और धैर्य को समझने के लिए उत्सुक बनाया है। मैंने तकनीक सीखने की प्रक्रिया का आनंद लेना शुरू कर दिया है और यह भी समझा है कि सही निशाना लगाने के लिए कितनी नियंत्रण क्षमता चाहिए। मुझे सबसे दिलचस्प यह लगता है कि तीरंदाज़ी शारीरिक क्षमता जितनी ही मानसिक शक्ति और एकाग्रता पर भी आधारित है। इस राष्ट्रीय खेल दिवस पर, मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूँ कि मेरे किरदार ने मुझे ऐसे खेल से परिचित कराया जिसे शायद मैं अन्यथा कभी नहीं खोजता और मैं आशा करता हूँ कि इसे सीखना और इसमें बेहतर होना जारी रखूँ।”
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