लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, लखनऊ में प्रत्येक बुधवार को “विश्व बंधुत्व श्रृंखला” के अंतर्गत आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों की कड़ी में हिंदी कार्यशाला आयोजित की गई।
राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार एवं अधिकारियों तथा कर्मचारियों में हिंदी के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक हिंदी कार्यशाला का विषय “पासपोर्ट एवं औषधीय पौधे: स्वस्थ भारत से स्वस्थ विश्व की ओर” रहा। कार्यशाला के मुख्य वक्ता केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) के वैज्ञानिक डॉ. राजेश वर्मा थे।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ज्ञानवीर सिंह ने बताया कि भारतीय आयुर्वेदिक औषधियों का विदेशों में निर्यात बढ़ता जा रहा है और सीमैप जैसे केंद्रीय संस्थान इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं। डॉ. राजेश वर्मा ने अपने व्याख्यान में विभिन्न औषधीय एवं उपयोगी पौधों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की तथा उनके औषधीय गुणों एवं दैनिक जीवन में उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने औषधीय पौधों को तैयार करने की विविध पद्धतियों के बारे में भी जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने एक रोचक जानकारी साझा करते हुए बताया कि पौधों का भी पासपोर्ट बनाया जाता है, जो देखने में पोस्टकार्ड जैसा होता है। इस पासपोर्ट में संबंधित पौधे के बारे में वैज्ञानिक जानकारी दर्ज होती है, जिससे उसके वैज्ञानिक एवं अन्य महत्वपूर्ण विवरणों की पहचान एवं जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
कार्यशाला के दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने औषधीय पौधों, मानव उपवन तथा पौधों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी प्राप्त की और मुख्य वक्ता के साथ संवाद भी किया। कार्यक्रम के अंत में पासपोर्ट कार्यालय, लखनऊ के परिसर में “चंदन” के पौधे का रोपण भी किया गया।
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