नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सीआईआई वार्षिक शिखर सम्मेलन में राज्यसभा सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि सामाजिक उद्यमों के निर्माण और ग्रामीण भारत में मांग को सक्रिय करने के लिए कॉरपोरेट और सहकारी क्षेत्रों को एक टीम के रूप में मिलकर काम करना चाहिए।
जमीनी स्तर पर विकास पर जोर देने के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. साहनी ने तर्क दिया कि कॉरपोरेट और सहकारी समितियां मिलकर गांवों में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकती हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और स्थायी आजीविका का निर्माण होगा। उन्होंने कहा, “यदि हम वास्तव में ग्रामीण मांग को बढ़ाना और समावेशी विकास लाना चाहते हैं, तो कॉरपोरेट और सहकारी समितियां अलग-अलग होकर काम नहीं कर सकतीं; उन्हें सामाजिक उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करना ही होगा।” उन्होंने आगे कहा कि इस तरह का तालमेल शहरी-ग्रामीण विभाजन को कम करने में मदद करेगा।
डॉ. साहनी ने महिला नेतृत्व वाले समूहों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि महिला प्रधान सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों में अपार क्षमता है, लेकिन अक्सर उनके पास आवश्यक समर्थन की कमी होती है। उन्हें पेशेवर रूप से प्रबंधित इकाइयों के रूप में विकसित होने के लिए अधिक संस्थागत सहयोग मिलना चाहिए, जो अपनी प्रभावशीलता और दायरे को बढ़ाने के लिए डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन खरीद और ई-मार्केट प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों का उपयोग करें।
उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों को पेशेवर नेतृत्व, नियमित ऑडिट, स्वायत्तता और स्वतंत्र बोर्डों के साथ अधिक पारदर्शी होने की आवश्यकता है। हाल ही में लागू मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट उन्हें ऐसा करने के लिए कानूनी उपकरण प्रदान करता है, जो जवाबदेही बनाए रखते हुए वास्तविक स्वतंत्रता की अनुमति देता है।
पूर्व केंद्रीय वाणिज्य मंत्री और भारत के पूर्व जी-20 शेरपा श्री सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में हुए इस सत्र ने उद्योग जगत के नेताओं और नीति निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया।
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