Tuesday , August 25 2026

महिलाओं की कार्यक्षेत्र में वापसी को नई दिशा देगा गोदरेज DEI लैब

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप के विविधता, समानता और समावेशन (DEI) प्रभाग, गोदरेज डीईआई लैब ने अपनी अनूठी केस स्टडी प्रतियोगिता ‘इंडिया इनक्लूडेड ऑन कैंपस’ का दूसरा संस्करण शुरू किया है। इस बार प्रतियोगिता का दायरा बढ़ाकर इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस और आईआईटी बॉम्बे सहित देश के आठ प्रमुख प्रबंधन संस्थानों तक कर दिया गया है। इसके तहत कैंपस रोड शो एक बार फिर आईआईएम लखनऊ पहुंचा।

इस वर्ष की केस स्टडी चुनौती महिलाओं के ‘रिटर्नशिप’ (काम पर वापसी) कार्यक्रमों पर केंद्रित है। इसमें छात्रों को ऐसे व्यावहारिक समाधान तैयार करने के लिए आमंत्रित किया गया है। जो शादी, मातृत्व या देखभाल की जिम्मेदारियों के चलते करियर में ब्रेक लेने वाली महिलाओं को दोबारा कार्यबल (वर्कफोर्स) से जोड़ने में मदद कर सकें।

2026 में प्रकाशित एक अध्ययन ‘द मिसिंग हाफ’ के अनुसार, भारत में 74% शिक्षित महिलाओं ने अपने करियर में किसी न किसी समय नौकरी से ब्रेक लिया है। इसके बावजूद अनुभवी महिलाओं के लिए कार्यक्षेत्र में दोबारा प्रवेश के व्यवस्थित रास्ते अभी भी सीमित हैं। ऐसे में रिटर्नशिप कार्यक्रम कंपनियों के लिए प्रतिभाशाली कर्मचारियों से जुड़ी चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों को यह समझने के लिए प्रोत्साहित करना है कि संगठन महिलाओं के करियर के अलग-अलग चरणों में उनका सहयोग करने के लिए किस तरह के रास्ते तैयार कर सकते हैं और अधिक विविधतापूर्ण कार्यस्थल बनाने की दिशा में व्यापक स्तर पर काम कर सकते हैं।

गोदरेज DEI लैब के प्रमुख और ‘क्वीरिस्तान’ के लेखक परमेश शाहनी ने कहा, “हम महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी पर तब तक पूरी बात नहीं कर सकते, जब तक हम इस मुद्दे को न समझें कि करियर में ठहराव आने पर क्या होता है। चाहे वजह मातृत्व हो, देखभाल की जिम्मेदारियां हों या जीवन का कोई अन्य बदलाव—करियर ब्रेक कभी भी एक सार्थक रोजगार के रास्ते में रुकावट नहीं बनना चाहिए। गोदरेज इंडस्ट्रीज में हम अशोका यूनिवर्सिटी के CEDA के साथ शोध सहयोग जैसी पहलों के जरिए यह विचार कर रहे हैं कि रिटर्नशिप कार्यक्रम काम पर लौटने वाली महिलाओं को और बेहतर सहयोग कैसे दे सकते हैं। ‘इंडिया इनक्लूडेड ऑन कैंपस’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह युवा प्रतिभाओं को एक वास्तविक चुनौती पर काम करने, नए विचार प्रस्तुत करने और भविष्य के लिए अधिक समावेशी कार्यस्थल बनाने का अवसर देता है।”

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में DEI, कल्चर एंड एंगेजमेंट की एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट संध्या रमेश ने कहा, “रिटर्नशिप कार्यक्रम केवल कार्यस्थल पर वापस आने का रास्ता तैयार करके सफल नहीं हो सकता। इसे नेतृत्व की भूमिकाओं तक पहुंचने का रास्ता बनाने के लिए पूरे माहौल और अनुभव को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है।

सेल्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व के शीर्ष तीन कारणों में से एक प्रमुख कारण ऐसे क्षेत्रों में महिलाओं के दिखाई देने वाले रोल मॉडल का अभाव है। इस उद्देश्य के साथ अनुभवी महिलाओं को दोबारा कार्यक्षेत्र में लाने से चयन, एकीकरण और विकास की ऐसी प्रक्रिया तैयार करने में मदद मिलेगी, जो अधिक प्रभावी हो।

‘इंडिया इन्क्लूडेड ऑन कैंपस’ छात्रों को रिटर्नशिप से जुड़े पहले से चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों का अध्ययन करने और उन्हें नेतृत्व में महिलाओं के मौजूदा कम प्रतिनिधित्व से जोड़ने का अवसर देता है। इससे वे ऐसी मजबूत और दोहराई जा सकने वाली रणनीति तैयार कर सकते हैं, जिसे संगठन कैंपस भर्ती की तरह आसानी से अपना सकें।”

‘इंडिया इन्क्लूडेड ऑन कैंपस’ का पहला संस्करण 2025 में शुरू हुआ था। इसमें आईआईएम त्रिची, आईआईएम लखनऊ, आईआईएम मुंबई और एसआईबीएम पुणे के  छात्रों ने कार्यस्थल पर महिलाओं के समावेशन और नौकरी छोड़ने की समस्या पर काम किया था। पहले संस्करण की सफलता के आधार पर दूसरे संस्करण में इस पहल को प्रबंधन के अधिक छात्रों तक पहुंचाया गया है। इस बार प्रतियोगिता का फोकस इस बात पर है कि संगठन महिलाओं के लिए करियर की निरंतरता को किस तरह नए सिरे से परिभाषित कर सकते हैं।

विजेता टीम को 1,00,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। फाइनल में पहुंचने वाली टीमों को गोदरेज के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बातचीत करने का अवसर भी मिलेगा।