लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। पद्मभूषण साहित्यकार अमृतलाल नागर की 110वीं जयंती पर यूनिवर्सल बुक स्टोर द्वारा ‘आत्मीय संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें नागर जी की पौत्री ऋचा नागर से शाखा बंधोपाध्याय ने उनके पारिवारिक जीवन, साहित्य और लेखन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर संवाद किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अमृतलाल नागर के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि से हुआ। यूनिवर्सल बुक स्टोर की ओर से मानव प्रकाश ने ऋचा नागर एवं शाखा बंधोपाध्याय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऋचा नागर और दीक्षा नागर ‘संचित न्यास’ के माध्यम से नागर जी के साहित्य को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं।
ऋचा नागर ने अपने दादा नागर जी के सहज और आत्मीय व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि उनके घर की बैठक सभी के लिए खुली रहती थी। वे ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना से सभी का स्वागत करते थे। उन्होंने अपनी दादी के योगदान को भी स्मरण किया, जिन्होंने पूरे परिवार को एक सूत्र में बांधे रखा। संवाद में नागर जी के भाइयों रतनलाल नागर और मदनलाल नागर सहित परिवार के अन्य सदस्यों का भी उल्लेख हुआ।
नागर जी के नाट्य लेखन पर चर्चा करते हुए बताया गया कि वे ‘निर्देशक’ के स्थान पर ‘प्रयोक्ता’ शब्द का प्रयोग करते थे और भरतमुनि के नाट्यशास्त्र के गहरे अध्येता थे। वे नाटक में ‘परकाया प्रवेश’ के साथ भाषा, समाज और मनोविज्ञान के समन्वय को महत्वपूर्ण मानते थे। उन्होंने ‘रंग भारती’ पत्रिका का भी प्रकाशन किया।
कार्यक्रम में नागर जी के साथ कार्य कर चुके सहयोगियों ने उनके साहित्यिक योगदान और पुस्तकों के संपादन से जुड़े अनुभव साझा किए। ‘संचित न्यास’ में कार्यरत सीमा श्रीवास्तव ने भी अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर चंद्रशेखर वर्मा, सुधीर मिश्रा, महेंद्र भीष्म, नीलाभ, उपमा चतुर्वेदी, रत्ना, डॉ. अपूर्वा अवस्थी सहित अनेक साहित्यकार, साहित्यप्रेमी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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