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मैक्स हॉस्पिटल में बच्चों के लिए चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर शुरू

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने बच्चों के विकास, व्यवहार और न्यूरोलॉजी से जुड़ी परेशानियों के लिए समर्पित चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर शुरू किया है। इस सेंटर का मकसद बच्चों में किसी भी तरह की परेशानी को समय पर पहचानना, उसकी सही जांच करना और जरूरत के हिसाब से इलाज और थेरेपी शुरू करना है। 

इस सेंटर में बच्चों की जरूरत के हिसाब से अलग अलग विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे। सेंटर का नेतृत्व डॉ. एम.यू. हसन (डायरेक्टर एवं एचओडी, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजी), डॉ. अंकिता गर्ग (कंसल्टेंट, चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री) और डॉ. देविना सिंह (कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी) करेंगी।

विशेषज्ञों के मुताबिक 2 से 4 साल की उम्र में बच्चों का देर से बोलना या भाषा सीखने में परेशानी होना माता पिता के लिए चिंता की बात हो सकती है। कई बार इसका कारण ऑटिज्म, सुनने में परेशानी या बच्चे के विकास से जुड़ी कोई दूसरी समस्या हो सकती है। इसलिए अगर बच्चे के विकास में कोई देरी दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर में 1 से 18 साल तक के बच्चों का इलाज और देखभाल की जाएगी। यहां ऑटिज्म, एडीएचडी, बोलने में देरी, चलने या दूसरी गतिविधियां सीखने में देरी, पढ़ाई में परेशानी, चीजों को महसूस करने और समझने में दिक्कत, सेरेब्रल पाल्सी, डाउन सिंड्रोम, बौद्धिक विकास से जुड़ी समस्याएं, लोगों से बातचीत करने में परेशानी, मिर्गी और व्यवहार से जुड़ी समस्याओं के लिए मदद मिलेगी।

सेंटर की शुरुआत पर डॉ. एम.यू. हसन (डायरेक्टर एवं एचओडी, पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजी) ने कहा, “मैक्स हॉस्पिटल, लखनऊ में हमारा मानना है कि हर बच्चा अलग तरीके से सीखता है और समय पर सही मदद मिलने से बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण और लंबे समय तक सकारात्मक बदलाव आ सकता है। हमारा इलाज केवल थेरेपी सेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें परिवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हमारी अलग-अलग विशेषज्ञों की टीम माता-पिता के साथ मिलकर बच्चे की खूबियों, चुनौतियों और जरूरतों को समझती है और उसके लिए व्यक्तिगत आधार पर तैयार की गई थेरेपी योजना बनाती है, जिससे बच्चे को लगातार और बेहतर प्रगति करने में मदद मिल सके।”

डॉ. अंकिता गर्ग (कंसल्टेंट, चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री) ने कहा, “बच्चे के शुरुआती साल उसके विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए अगर बच्चा देर से बोल रहा है, आंखों में देखकर बात नहीं करता, नाम पुकारने पर ध्यान नहीं देता या उसके व्यवहार और ध्यान को लेकर कोई परेशानी दिखती है तो माता पिता को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर जांच और मदद मिलने से बच्चे को काफी फायदा हो सकता है। एक ही सेंटर पर अलग अलग विशेषज्ञों की मदद मिलने से परिवारों के लिए भी सही इलाज तक पहुंच आसान होगी।”

बच्चे के विकास में किसी परेशानी की जितनी जल्दी पहचान हो, उतनी जल्दी उसकी मदद शुरू की जा सकती है। खासकर शुरुआती उम्र में फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और व्यवहार से जुड़ी थेरेपी से बच्चे को चलने फिरने, बोलने, सीखने, दूसरों के साथ घुलने मिलने और रोजमर्रा के काम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए छोटे बच्चों के विकास पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

डॉ. देविना सिंह (कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी) ने कहा, “बच्चे का सही विकास उसके भविष्य के लिए बहुत जरूरी है। विकास से जुड़ी परेशानी सिर्फ एक चीज तक सीमित नहीं होती। इसका असर बच्चे के बोलने, सीखने, चलने, व्यवहार और दूसरों के साथ बातचीत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में बच्चे को एक से ज्यादा विशेषज्ञों की मदद की जरूरत हो सकती है। न्यूरोलॉजी की जांच और इलाज के साथ स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, व्यवहार से जुड़ी थेरेपी, फिजियोथेरेपी और सही पोषण पर ध्यान देने से बच्चे के विकास में सुधार लाने में मदद मिल सकती है। अलग अलग विशेषज्ञों का साथ मिलकर काम करना बच्चे की जरूरत को बेहतर तरीके से समझने और उसके लिए सही इलाज तय करने में मदद करता है।”

चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर में स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, एप्लाइड बिहेवियर एनालिसिस यानी एबीए थेरेपी, स्पेशल एजुकेशन, बिहेवियरल थेरेपी, अर्ली इंटरवेंशन, फिजियोथेरेपी और सेंसेरी इंटीग्रेशन थेरेपी की सुविधा एक ही जगह मिलेगी। हर बच्चे के लिए उसकी जरूरत के हिसाब से इलाज और थेरेपी की योजना बनाई जाएगी।

मैक्स अस्पताल का यह सेंटर बच्चों को जरूरी चीजें सीखने, अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के काम खुद करने और धीरे धीरे आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगा। इसके साथ ही माता पिता को भी बच्चे को समझने और उसकी बेहतर देखभाल करने में मदद दी जाएगी। सेंटर का मकसद बच्चों को अच्छा स्वास्थ्य, सही पोषण, परिवार का प्यार और देखभाल, सुरक्षा और शुरुआती उम्र में सीखने के बेहतर मौके देना है।