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नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने के लिए शुरू हुई ‘श्रावण प्रसंग’ संगीत कार्यशाला

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा रविवार को गोस्वामी तुलसीदास जयंती के उपलक्ष्य में गोद लिए हुलसी फिरें नामक सात दिवसीय ऑनलाइन श्रावण प्रसंग संगीत कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का निर्देशन वरिष्ठ संगीतज्ञ आशा श्रीवास्तव कर रही हैं।

संस्थान की सचिव डा. सुधा द्विवेदी ने बताया कि दो अगस्त से आरंभ हुई यह कार्यशाला आठ अगस्त तक प्रतिदिन संचालित होगी। कार्यशाला में तुलसी भजनों के साथ साथ श्रावण मास से संबंधित लोक परंपरा के गीतों का अभ्यास कराया जाएगा। साथ ही उनके भाव, उच्चारण और प्रस्तुति की बारीकियों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य गोस्वामी तुलसीदास की सांस्कृतिक एवं भक्ति परंपरा से नई पीढ़ी को जोड़ना तथा भारतीय संगीत एवं लोक संस्कृति के संरक्षण को प्रोत्साहित करना है। कार्यशाला के प्रथम दिवस पर गोस्वामी तुलसीदास कृत गीतावली की रचना तू देखि देखि री पथिक परम सुन्दर दोऊ का अभ्यास कराया गया। इस पद में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन के समय उन्हें देखकर ग्रामीण स्त्रियों के सहज, भावपूर्ण उद्गारों का अत्यंत मार्मिक चित्रण है।

कार्यशाला में दो दर्जन से अधिक विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागी ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता कर रहे हैं। डा. द्विवेदी ने बताया कि कार्यशाला में तैयार किए गए गीतों की प्रस्तुति तुलसी जयंती पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित होने वाली लोक चौपाल में की जाएगी। कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।