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मॉडल बायोगैस ग्राम योजना में सिंटेक्स देगा तकनीकी सहयोग

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सभी जिलों में मॉडल बायोगैस ग्राम और आधुनिक गौशालाएं विकसित करने की घोषणा के बाद इस दिशा में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी तेज होने लगी है। इसी कड़ी में सिंटेक्स ने अपने फ्लोटिंग टाइप बायोगैस प्लांट के माध्यम से राज्य सरकार के बायोगैस अभियान को तकनीकी सहयोग देने की घोषणा की है।

वेलस्पन बीएपीएल के प्रबंध निदेशक एवं सिंटेक्स के निदेशक यशोवर्धन अग्रवाल ने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सभी जिलों में बायोगैस ग्राम और आधुनिक गौशालाएं विकसित करने की पहल ग्रामीण आत्मनिर्भरता को नई दिशा दे सकती है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा पशुधन वाला राज्य है और देश में पशुधन की संख्या करीब 5 प्रतिशत बढ़कर 53.6 करोड़ से अधिक हो चुकी है। ऐसे में यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। प्रतिदिन लगभग 100 किलोग्राम गोबर और रसोई के गीले कचरे से चलने वाला एक बायोगैस प्लांट हर महीने करीब 130 से 135 किलोग्राम व्यावसायिक एलपीजी की बचत कर सकता है। इसके साथ ही किसानों को प्राकृतिक खाद के लिए उपयोगी बायो-स्लरी भी मिलती है।”

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण एलपीजी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में उतार-चढ़ाव से किसानों की लागत भी बढ़ी है। ऐसे समय में स्थानीय स्तर पर गोबर और रसोई के गीले कचरे से गैस और प्राकृतिक खाद तैयार करने वाले बायोगैस संयंत्र ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ खेती की लागत कम करने का प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

सिंटेक्स पिछले 25 वर्षों से फ्लोटिंग टाइप बायोगैस प्लांट का निर्माण कर रहा है। इस प्लांट को कम समय में स्थापित किया जा सकता है और इसका रखरखाव लगभग नगण्य है। जरूरत पड़ने पर इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर भी आसानी से लगाया जा सकता है। इसका फ्लोटिंग सिस्टम लगातार समान दबाव के साथ गैस उपलब्ध कराता है। यह संयंत्र केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) की बायोगैस योजना के तहत भी स्वीकृत है, जिससे पात्र परियोजनाओं को सरकारी वित्तीय सहायता का लाभ मिल सकता है।