नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनावों से नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुख कार्यों से सुनिश्चित होती है। इसी विश्वास के साथ फेम इंडिया मैगज़ीन ने प्रतिष्ठित सर्वे एजेंसी एशिया पोस्ट सर्वे के सहयोग से देश के सांसदों का व्यापक और बहुस्तरीय अध्ययन सम्पन्न किया। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य उन सांसदों की पहचान करना था, जिन्होंने संसदीय दायित्वों के निर्वहन, जनसेवा, विकासोन्मुख दृष्टिकोण और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से विशिष्ट पहचान बनाई है।
फेम इंडिया मैगजीन के एडीटर इन चीफ धीरज कुमार के मुताबिक सर्वेक्षण कई चरणों में संपन्न किया गया। प्रारंभिक चरण में संसदीय उपस्थिति, सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी, बहसों में योगदान, पूछे गए प्रश्न, प्रस्तुत निजी विधेयक, सांसद निधि के उपयोग तथा सामाजिक सहभागिता जैसे वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर देशभर के सांसदों का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद चयनित सांसदों का विस्तृत विश्लेषण विभिन्न स्तरों पर किया गया, जिसमें उनके जनसंपर्क, क्षेत्रीय विकास, नेतृत्व क्षमता, सार्वजनिक छवि, कार्यशैली, नवाचार, सामाजिक स्वीकार्यता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का भी अध्ययन किया गया।
सर्वेक्षण प्रक्रिया को अधिक व्यापक और सहभागी बनाने के लिए नागरिकों, शिक्षाविदों, वरिष्ठ पत्रकारों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की राय को भी शामिल किया गया। इसके साथ ही ग्राउंड रिपोर्ट, उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों और संसदीय रिकॉर्ड का गहन विश्लेषण किया गया, ताकि मूल्यांकन अधिकतम निष्पक्ष, संतुलित और वैज्ञानिक हो सके।
मैगजीन के मैनेजिंग एडीटर अनिल सिंह के अनुसार सर्वेक्षण के प्रारंभिक चरण में लगभग 100 सांसदों की सूची सार्वजनिक की गई थी और नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त सुझावों तथा आगे के विस्तृत अध्ययन के आधार पर अंतिम चरण में सांसदों का पुनर्मूल्यांकन किया गया। इसी प्रक्रिया के बाद देश के 25 उत्कृष्ट लोकसभा सांसदों तथा 5 उत्कृष्ट राज्यसभा सांसदों का चयन किया गया है।
इस वर्ष सर्वेक्षण की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि पहली बार राज्यसभा के सदस्यों को भी अध्ययन में शामिल किया गया। चूंकि राज्यसभा के सभी सदस्यों का कार्यकाल एक साथ प्रारंभ नहीं होता, इसलिए उनके कार्यों का तुलनात्मक अध्ययन अपेक्षाकृत जटिल था। इसके बावजूद विभिन्न वस्तुनिष्ठ मानकों और विशेषज्ञ विश्लेषण के आधार पर मूल्यांकन को अधिकतम वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष बनाने का प्रयास किया गया।
इस सर्वेक्षण में मंत्रिपरिषद के सदस्यों तथा लोकसभा और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष को शामिल नहीं किया गया, ताकि सांसदों के स्वतंत्र संसदीय योगदान और जनप्रतिनिधि के रूप में उनके प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।
फेम इंडिया मैगज़ीन का मानना है कि लोकतंत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों को उचित पहचान और सम्मान मिलना चाहिए। सकारात्मक कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने से न केवल जनप्रतिनिधियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास भी मजबूत होता है।
लोकसभा के 25 तथा राज्यसभा के 5 उत्कृष्ट सांसदों का यह चयन किसी राजनीतिक विचारधारा या लोकप्रियता का नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के कार्य, संसदीय प्रदर्शन, जनसरोकार, विकासात्मक पहल और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता के समग्र मूल्यांकन का परिणाम है। फेम इंडिया को विश्वास है कि यह पहल लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक सुदृढ़ करने तथा जनप्रतिनिधित्व की गुणवत्ता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान सिद्ध होगी।
लोकसभा के चयनित सांसदों में अरुण गोविल, अनुराग ठाकुर, कंवर सिंह तंवर, के. नवास कनी, चंद्रशेखर आज़ाद, जगदंबिका पाल, दिलीप सैकिया, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, डॉ. आलोक कुमार सुमन, एनके प्रेमचंद्रन, नवीन जिंदल, निशिकांत दुबे, पी.पी. चौधरी, भरतृहरि महताब, मनीष तिवारी, मनोज तिवारी, राजीव राय, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, राहुल कसवां, शशि थरूर, स्मिता उदय वाघ, सुप्रिया सुले, हरेंद्र मलिक, दामोदर अग्रवाल, तेजस्वी सूर्या शामिल हैं। जबकि राज्यसभा सांसदों में डेरेक ओ ब्रियेन, मयंक भाई जयदेव भाई नायक, लक्ष्मीकांत बाजपेयी, संजय राउत और सस्मित पात्र शामिल हैं।
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