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रेमंड का 10वां गारमेंट एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू, पुराने कपड़ों के बदले मिलेगी मुफ्त सिलाई

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। रेमंड लाइफस्टाइल ने फैशन में चीज़ों के पुनः उपयोग (सर्कुलैरिटी) को बढ़ावा देने और समाज में योगदान के प्रति अपनी  प्रतिबद्धता के तौर पर अपने सालाना गारमेंट एक्सचेंज प्रोग्राम (कपड़ों की अदला-बदली) के 10वें संस्करण की शुरुआत की है। इस पहल के तहत लोगों को अपनी पसंद के कपड़े पहनने की सहूलियत हासिल करने आमंत्रित किया जाता है। साथ ही उन्हें ‘गूंज’ को अपने पुराने कपड़े दान करने के लिए भी प्रेरित किया जाता है।

गूंज, एक जाना-माना स्वयंसेवी संगठन है, जो कपड़ों का इस्तेमाल ग्रामीण विकास, आपदा राहत और देश भर में सम्मानजनक आजीविका के अवसर पैदा करने के लिए करता है। ब्रांड ने गारमेंट एक्सचेंज प्रोग्राम (जीईपी) के 2026 संस्करण के लॉन्च के मद्देनज़र व्यक्तिगत विशिष्टता को रेखांकित करने वाला बेहद आत्मीय सा कथानक चुना है और वह है – “फिट फॉर यू, फील्स लाइक यू (आपके लिए फिट, बिल्कुल आप जैसा)।” 

इस बदलाव को शानदार डिजिटल प्रचार अभियान के ज़रिए दिखाया गया है, जिसमें तेज़ी से बदलते फैशन में व्यक्तिगत स्पर्श के अभाव पर सवाल उठाया गया है। यह अभियान उस व्यवस्था पर रोशनी डालता है, जो हर व्यक्ति की विशिष्टता को नज़रअंदाज़ कर उसे केवल ‘स्मॉल’, ‘मीडियम’ या ‘लार्ज’ जैसे तय आकारों तक सीमित कर देती है।

रेमंड का विश्वास है कि व्यक्ति की नाप और पसंद के अनुरूप सिला गया परिधान ही सही मायनों में उसके व्यक्तित्व को उभारता है। इस कार्यक्रम के ज़रिए, ग्राहक ‘द रेमंड शॉप’ में उपलब्ध बेहतरीन कपड़ों से बने अपने विशिष्ट अंदाज़ के कपड़े पहनने का लाभ उठा सकते हैं। इससे उन्हें एकदम सही फिट और स्टाइल मिलता है जिससे “फिट फॉर यू, फील्स लाइक यू ” का अहसास होता है।

रेमंड के ‘गारमेंट एक्सचेंज प्रोग्राम’ के तहत, इस साल ग्राहकों को ऐसे कपड़े देने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है जिनकी अब उन्हें ज़रूरत नहीं है। इसके बदले उन्हें टेलरिंग वाउचर मिलते हैं, जिससे वे अपने पसंद के कपड़े बनवाने का सुख हासिल कर सकते हैं।

रेमंड लाइफस्टाइल लिमिटेड के निदेशक और मुख्य कार्यकारी सत्यकि घोष ने 2026 के संस्करण के लॉन्च के अवसर पर कहा, “हमें अपने ‘लुक गुड फील गुड’ अभियान के 10 साल पूरे होने पर गर्व है और यह हमारे ब्रांड की मज़बूत सोच को रेखांकित करता है। रेमंड का ग्राहकों के साथ संबंध हमेशा से भरोसे और सदाबहार स्टाइल पर आधारित रहा है। साथ ही हमारी यह भी कोशिश रही है कि फैशन में सर्कुलैरिटी के ज़रिए समाज के कल्याण में योगदान जारी रही। हम ‘गूंज’ के साथ अपनी भागीदारी को बरकरार रखते हुए, अपने परितंत्र में काम करने वालों के श्रम का सम्मान बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारतीय लग्ज़री बाज़ार में ग्राहकों की पसंद के अनुरूप परिधान (कस्टमाइज़ेशन) और उत्कृष्ट गुणवत्ता (प्रीमियम-क्वालिटी) के बढ़ते महत्त्व के बीच, यह पहल सेतु का काम करती है, जो हमारे ग्राहकों को रेमंड की बेमिसाल टेलरिंग और उसकी सटीक कारीगरी का अनुभव कराती है।”

‘गूंज’ के संस्थापक अंशु गुप्ता ने कहा, “गूंज और रेमंड की इस लंबी भागीदारी अब एक ऐसे सार्थक सहयोग में बदल गई है। जो लोगों, साझा उद्देश्यों और नई संभावनाओं को एक सूत्र में पिरोता है। हर साल, इस अभियान ने स्पष्ट किया है कि जब लोगों को योगदान देने के लिए मंच मिलता है, तो वे ज़िम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ आगे आते हैं। 27 साल पहले, हमने महसूस किया था कि कपड़ा इंसानों की तीन बुनियादी ज़रूरतों में से एक है लेकिन इसके बावजूद कपड़े सबसे अधिक नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है। तब से, गूंज ने न केवल कपड़ों बल्कि सामग्री की कमी से जुड़े दृष्टिकोण, भाषा और सोच को भी बदला है बल्कि इसे नज़रअंदाज़ की गई ज़रूरत के बजाय विकास और जलवायु संबंधी पहल के लिए शक्तिशाली संसाधन बनाया है। लाखों किलोग्राम बेकार कपड़े और कम इस्तेमाल हुई सामग्री लैंडफिल पर बोझ बनती रहती है, और ऐसी पहलों से ऐसे बोझ कम होते हैं। हम चाहते हैं कि कंपनी के हमारी साझेदारी और मज़बूत हो, साथ ही हमारा मानना है कि सामूहिक प्रयासों से उपेक्षित संसाधनों को सम्मानजनक आजीविका और सतत विकास के अवसरों में बदला जा सकता है।”