वो तंग गली मेरे बचपन कीहर मोड़ जहां इक याद खड़ीकुछ धुंधली सीकुछ प्यारी सीजीवन की एक किताब मिलीदो चार पृष्ठ बस पलटे थेसोंधी खुशबू से मनपुलक उठामन हुआ बावराउड़ निकलायादों की एक दुकान दिखीजहां मिलती खुशियांप्रेम-भाव सेमठरी थी वोअहसास भरी।जो चार कदमहम बढ़ निकलेइक फाटक परहर आंख जमींहोंठों पर …
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