मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सोनी सब का शो यादें अपनी दिलचस्प कहानियों और लेयर्ड किरदारों के ज़रिए दर्शकों को लगातार बाँधे हुए है। अभिनेता अनुराग शर्मा शो में डॉ. सनी के किरदार से गहरी छाप छोड़ रहे हैं। यह एक ऐसा किरदार है, जो अनपेक्षित है, भावनात्मक संघर्षों से भरा है और भीतर छिपे दर्द को दर्शाता है। अक्सर डॉ. सनी खुद को डॉ. देव (इक़बाल खान) के खिलाफ पाते हैं, लेकिन उनकी यात्रा सालों के दर्द, निराशा और सब कुछ खो देने के डर से बनी है।
इस बातचीत में अनुराग शर्मा ने खुलकर बताया कि कैसे उन्होंने डॉ. सनी के कई पहलुओं को समझा, स्क्रीन पर ग्रे शेड्स को निभाया, कलाकारों के साथ अपना बॉन्ड बनाया और क्यों यह किरदार उनके लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ रोमांचक भी है।
डॉ. सनी पूरी तरह पॉज़िटिव या नेगेटिव नहीं हैं। आप उन्हें अपने शब्दों में कैसे परिभाषित करेंगे?
वे कभी एक टैलेंटेड डॉक्टर थे, जिन्हें हमेशा लगता था कि उन्हें सही पहचान और मौके नहीं मिले। यह निराशा उनके साथ लंबे समय तक बनी रही। हालात तब बिगड़े, जब अनजाने में हुई एक गलती से एक बच्चे की जान चली गई। इसके बाद डॉ. देव ने उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया। चूँकि, वे परिवार से थे, इस घटना ने डॉ. सनी को गहराई से चोट पहुँचाई और उन्हें लगा कि उनके साथ नाइंसाफी हुई है। वह दर्द और करियर खोने का डर धीरे-धीरे उन्हें अंधेरे रास्ते पर ले गया और आज का डॉ. सनी बना दिया। यही वजह है कि उनका किरदार न पूरी तरह पॉज़िटिव है और न ही पूरी तरह नेगेटिव।
डॉ. सनी और डॉ. देव कभी बहुत अच्छे दोस्त थे। उनके बीच असल में क्या बदला?
डॉ. सनी और डॉ. देव कभी बेहद करीब थे और दोनों का उद्देश्य लोगों की मदद करना था। वे डॉक्टर होने के नाते एक-दूसरे को समझते थे और एक मज़बूत बॉन्ड शेयर करते थे। लेकिन, वक्त और निजी दर्द ने दोनों को अलग-अलग रास्तों पर डाल दिया। डॉ. देव अपने बेटे को खोने के बाद सख्त और भावनात्मक रूप से दूर हो गए। वहीं, डॉ. सनी को हमेशा यह महसूस हुआ कि उनके साथ नाइंसाफी हुई है और उन्हें वह पहचान नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे। यह चोट और निराशा धीरे-धीरे उनके भीतर गहराई तक उतर गई। असल में दोनों अपने मूल में अच्छे डॉक्टर हैं, लेकिन उनके अनुभव और भावनात्मक संघर्षों ने उन्हें आज का इंसान बना दिया।
डॉ. सनी का किरदार निभाने में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
डॉ. सनी का किरदार निभाने में कोई एक स्थायी चुनौती नहीं रही, लेकिन कुछ पल ऐसे ज़रूर होते हैं, जो भावनात्मक रूप से ज़्यादा की माँग करते हैं। खासकर वे सीन, जहाँ डॉ. सनी अपनी गलतियों को छिपाने और खुद को बचाने की कोशिश करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कभी जानबूझकर बुरा बनने का इरादा नहीं किया था, बल्कि हालात ने उन्हें धीरे-धीरे उस दिशा में धकेला। अब उन्हें लगता है कि उनका सच सामने नहीं आना चाहिए। उस बेचैनी और डर को स्क्रीन पर दिखाना और साथ ही दर्शकों को यह महसूस कराना कि कहीं न कहीं वे उनसे जुड़ाव महसूस करें यही असली चुनौती है। यह बहुत नाज़ुक संतुलन है और मैं उम्मीद करता हूँ कि इसे पूरे किरदार में बनाए रख पाऊँ।
क्या आपको इस रोल के लिए भावनात्मक रूप से अलग तरह से तैयारी करनी पड़ी?
सच कहूँ, तो मुझे इस रोल के लिए भावनात्मक रूप से अलग तैयारी करने की ज़रूरत नहीं पड़ी। पिछले 15 सालों में मैंने ज़्यादातर नेगेटिव किरदार ही निभाए हैं। शुरुआत में लोगों को लगता था कि मेरा चेहरा बहुत सॉफ्ट और सिंपल है और मैं ऐसे रोल्स में फिट नहीं बैठूँगा। लेकिन, एक बार जब दर्शकों ने मुझे नेगेटिव किरदार में स्वीकार कर लिया, तो मुझे ऐसे ही रोल्स मिलने लगे। धीरे-धीरे मुझे इन लेयर्ड किरदारों को निभाने में मज़ा आने लगा। हर अभिनेता हीरो बनने का सपना देखता है, लेकिन टीवी पर मुख्य विलेन बनना भी अपनी अलग पहचान और पहचान देता है। मुझे याद है सुशांत सिंह राजपूत ने एक बार कहा था कि मैं टीवी का इरफ़ान खान हूँ और कहीं न कहीं अब मैं ‘टीवी का नेगेटिव इरफ़ान’ बन गया हूँ। यह मेरे लिए बहुत बड़ा कॉम्प्लिमेंट था, क्योंकि इरफ़ान सर हर किरदार में ईमानदारी और गहराई लाते थे। मैं खुद को मिले हर मौके के लिए आभारी हूँ और हमेशा कोशिश करता हूँ कि हर किरदार अलग लगे ताकि दर्शक मेरे काम से जुड़े रहें।
एक्टर के तौर पर क्या आपको ग्रे शेड्स वाले किरदार निभाना ज़्यादा पसंद है, क्योंकि वे अनपेक्षित होते हैं?
बिल्कुल। ग्रे शेड्स वाले किरदार निभाने में अलग ही उत्साह होता है, क्योंकि वे अनपेक्षित और भावनात्मक रूप से जटिल होते हैं। ऐसे रोल्स एक्टर को कई लेयर्स और इमोशन्स एक्सप्लोर करने का मौका देते हैं, जो पूरी तरह पॉज़िटिव किरदारों में हमेशा संभव नहीं होता। मैंने सालों से ऐसे किरदार निभाने का सचमुच आनंद लिया है और हमेशा कोशिश करता हूँ कि हर रोल में कुछ नया लेकर आऊँ, ताकि हर किरदार पिछले से अलग लगे।
क्या डॉ. सनी की कोई ऐसी बात है, जिससे आप व्यक्तिगत रूप से जुड़ते हैं, भले ही उसमें कमियाँ हों?
ईमानदारी से कहूँ, तो नहीं। डॉ. सनी और मैं इंसान के तौर पर बहुत अलग हैं। मैं उनके नेगेटिव फैसलों से खुद को रिलेट नहीं कर सकता, क्योंकि असल ज़िंदगी में मैं बहुत पॉज़िटिव और सिंपल इंसान हूँ। मैं ईमानदारी और सच्चाई से काम करने में विश्वास रखता हूँ और हमेशा यह ध्यान रखता हूँ कि स्क्रीन पर निभाए गए किरदार मेरी निजी ज़िंदगी को प्रभावित न करें।
इक़बाल, गुलकी और ‘यादें’ की पूरी टीम के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा और ऑफ-स्क्रीन आप सबसे ज़्यादा किससे जुड़ते हैं?
सच कहूँ, तो शो पर काम करना मेरे लिए बेहद शानदार अनुभव रहा है। सेट पर हर कोई बहुत गर्मजोशी से भरा है, सहयोगी है और काम करना आसान बना देता है। यही वजह है कि माहौल हमेशा पॉज़िटिव और आरामदायक रहता है। यह मेरा पहला मौका है, जब मैंने इक़बाल और गुलकी के साथ काम किया। दोनों न सिर्फ बेहतरीन कलाकार हैं, बल्कि बेहद विनम्र और ज़मीन से जुड़े हुए इंसान भी हैं। उन्होंने जितनी सफलता हासिल की है, उसके बावजूद उनका व्यवहार बेहद सरल है और वे सभी को सहज महसूस कराते हैं। युवा कलाकार भी ऊर्जा से भरे हुए हैं और बहुत सम्मानजनक हैं। कुल मिलाकर पूरी टीम और क्रू के बीच एक मज़बूत बॉन्ड है और मुझे सचमुच सबके साथ काम करने में आनंद आता है।
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