Wednesday , June 3 2026

मेनोपॉज़ के दौर से गुजर रही महिला ने आईवीएफ से स्वस्थ बच्चे को दिया जन्म

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। लखनऊ में एक असाधारण मामला सामने आया। यहां 44 वर्षीय रजोनिवृत्त के दौर से गुज़र रही (मेनोपॉज़ल) मरीज़ ने इंदिरा आईवीएफ में इलाज के बाद स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। जिससे असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी) और उच्च जोखिम वाली प्रसूति देखभाल की बढ़ती क्षमता रेखांकित होती है। इस मरीज़ का गर्भाशय (यूटरस) काफी छोटा था और इसने दूसरे केंद्रों पर आईवीएफ का चार बार प्रयास किया था, जो असफल रहा था।

इंदिरा आईवीएफ में आवश्यकता के अनुरूप तैयार उपचार दृष्टिकोण के बाद इस मरीज़ ने पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक गर्भधारण कर लिया। नियोजित भ्रूण कटौती (फीटल रिडक्शन) के साथ डबल एम्ब्रियो ट्रांसफर (डीईटी) किया गया था। हालांकि, गर्भावस्था के सातवें सप्ताह में, मरीज़ में एक दुर्लभ और गंभीर जटिलता सामने आई और वह थी, हेटेरोटोपिक ट्विन प्रेगनेंसी के साथ कॉर्नियल गर्भाशय में दरार (कॉर्न्यूअल यूटेराइन रप्चर)। 

इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल लिमिटेड के ज़ोनल बिज़नेस डायरेक्टर डॉ. पवन यादव ने कहा, “इस मामले में कई तरह के जोखिम कारक शामिल थे। इनमें मरीज़ की अधिक उम्र, रजोनिवृत्ति की स्थिति, संरचनात्मक रूप से छोटा गर्भाशय, और बार-बार आईवीएफ असफल रहने का इतिहास शामिल है। गर्भावस्था की शुरुआत में ही एक दुर्लभ जटिलता सामने आई, जिसकी वजह से निरंतर देखभाल के लिए समय पर हस्तक्षेप और सावधानीपूर्वक नैदानिक निर्णय की ज़रूरत पड़ी। ऐसे मामलों से यह रेखांकित होता है कि नैदानिक विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचे पर आधारित मरीज़ों की व्यक्तिगत ज़रूरत के अनुरूप उपचार महत्वपूर्ण है। इंदिरा आईवीएफ मरीज़ केंद्रित हर तरह की देखभाल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही हम प्रजनन से जुड़े सबसे चुनौतीपूर्ण मामलों को भी सटीकता और ज़िम्मेदारी के साथ संभालते हैं।”