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बचपन के बाद भी जरूरी हैं टीके, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने वयस्क टीकाकरण का किया समर्थन

जयपुर (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। राजस्थान में टीकाकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति और वर्ष 2009 से पोलियो-मुक्त स्थिति बनाए रखने की उपलब्धि के बीच अब स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ भारत में तेजी से उभरती स्वास्थ्य प्राथमिकता वयस्क टीकाकरण की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस 2026 के दौरान जारी आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में टीकाकरण के क्षेत्र में  वर्ष 1992-93 के 21.1% से बढ़कर 2024-25 में 91.8% तक पहुंच गई है, जिससे राज्य में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण योगदान मिला है। राष्ट्रीय स्तर पर  भारत में पूर्ण टीकाकरण के प्रसार में वर्ष 2015 के 62% से बढ़कर जनवरी 2026 तक 98.4% की वृद्धि दर्ज की गई है। जो रोगों की रोकथाम पर केंद्रित स्वास्थ्य प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।

इसी संदर्भ में, आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी ने “एडल्ट वैक्सीनेशन” विषय पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी (JNU) इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज के प्रो-चांसलर एवं सीनियर प्रोफेसर तथा राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS), जयपुर के पूर्व वाइस चांसलर डॉ. सुधीर भंडारी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलती जीवनशैली, शहरीकरण की बढ़ती रफ्तार, वृद्ध होती आबादी और कोविड महामारी के बाद स्वास्थ्य के प्रति बढ़ी जागरूकता ने स्वास्थ्य सेवाओं की प्राथमिकताओं को नई दिशा दी है। अब स्वास्थ्य क्षेत्र में उपचार से अधिक रोकथाम आधारित उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है  जिसके चलते वयस्क टीकाकरण जैसी पहलें सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण आवश्यकता बनकर उभर रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. भंडारी ने कहा कि अधिकतर टीके बचपन में ही लग जाते हैं, लेकिन बूस्टर डोज़ न लेने और जागरूकता की कमी के कारण कई वयस्क अब भी विभिन्न संक्रमणों के खतरे के प्रति संवेदनशील बने रहते हैं।उन्होंने कहा कि नियमित टीकाकरण जटिलताओं, अस्पताल में भर्ती होने और दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए वयस्क टीकाकरण को निवारक स्वास्थ्य रणनीति का एक आवश्यक हिस्सा बनाया जाना चाहिए। डॉ. भंडारी ने बताया कि फ्लू, शिंगल्स (हरपीज) और न्यूमोकोकल जैसे टीके प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं और संक्रमण से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करते हैं।

यूनिवर्सिटी की लेट्स टॉक अबाउट हेल्थ पहल के तहत आयोजित इस सत्र में संक्रामक रोगों के बोझ को कम करने, जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने और स्वस्थ समुदायों के निर्माण में टीकाकरण की भूमिका पर विशेष चर्चा की गई।

आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट डॉ. पी.आर. सोडानी ने कहा, “आज के तेजी से बदलते स्वास्थ्य परिदृश्य में निवारक स्वास्थ्य सेवाएं लगातार अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य के सबसे प्रभावी और किफायती उपायों में से एक है, जिसने संक्रामक रोगों को कम करने, बाल मृत्यु दर घटाने और भारत में पोलियो तथा मातृ-नवजात टिटनेस जैसी बीमारियों के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे प्रयासों के माध्यम से हमारा उद्देश्य स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक सार्वजनिक संवाद को बढ़ावा देना और रोगों की रोकथाम एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।”

GSK के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में निवारक स्वास्थ्य उपायों, वैक्सीन जागरूकता और प्रमाण-आधारित स्वास्थ्य संचार के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई।