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‘हस्तिनापुर के वीर’ में दिखेगा कृपाचार्य का अनुशासन और धर्म का आदर्श स्वरूप

मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सोनी सब अपने कहानी कहने के कैनवास को और बड़ा करते हुए जल्द ही लेकर आ रहा है एक नया पौराणिक ड्रामा हस्तिनापुर के वीर, जो पांडवों और कौरवों के शुरुआती वर्षों को गहराई से दिखाएगा। हस्तिनापुर की भव्य पृष्ठभूमि पर आधारित यह शो उन अनकही कहानियों, रिश्तों और निर्णायक पलों को जीवंत करता है, जिन्होंने इन महान योद्धाओं को गढ़ा। इस कथा को और मजबूती देने के लिए अभिनेता चेतन्य अदीब कृपाचार्य का अहम् किरदार निभा रहे हैं, जो कि उस दौर के सबसे सम्मानित गुरुओं में से एक हैं।

चेतन्य अदीब हमेशा अपने अभिनय में गहराई और संयम लेकर आने के लिए पहचाने जाते हैं। हस्तिनापुर के वीर में वे कृपाचार्य का किरदार निभा रहे हैं, एक ऐसा व्यक्तित्व जो अनुशासन, स्पष्टता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। राजगुरु के रूप में उन्होंने पांडवों और कौरवों दोनों को निष्पक्षता और सटीकता के साथ प्रशिक्षित किया। गुरुकुल में उन्होंने व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखा, ताकि राजकुमार अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को समझ सकें। उनकी शिक्षा का तरीका संतुलित और संरचना पर आधारित था, जिससे वे राजकुमारों की यात्रा में एक स्थिर और मार्गदर्शक शक्ति बने।

अपने किरदार के बारे में बात करते हुए, चेतन्य अदीब कहते हैं, “जब मैंने कृपाचार्य के बारे में पढ़ना शुरू किया, तो मुझे उनकी शांति और आत्मविश्वास ने बहुत आकर्षित किया। कृपाचार्य एक आदर्श शिक्षक थे, जिन्होंने हर हाल में अपने कर्तव्य और धर्म को निभाया। उनकी भूमिका निभाते हुए मुझे अनुशासन और आत्म से परे कर्तव्य की भावना पर सोचने का मौका मिला। वे हमेशा उद्देश्यपूर्ण ढंग से काम करते हैं, कभी-भी आवेश में प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, बल्कि सोच-समझकर और संरचना के साथ जवाब देते हैं। एक अभिनेता के तौर पर मुझे उनकी मानसिकता को समझने के लिए खुद को धीमा करना पड़ा और इस प्रकार मैंने उनके संयम और अनुशासन को अपने जीवन में उतारा। यह अनुभव मेरे लिए बेहद समृद्ध और सीखने वाला रहा।”

हस्तिनापुर के वीर के साथ दर्शक महाभारत की एक नई और भावनात्मक प्रस्तुति देख पाएँगे, जहाँ कहानी युद्धों से आगे बढ़कर उन रिश्तों, मूल्यों और चुनावों को प्रदर्शित करती है, जिन्होंने इन महान किरदारों को गढ़ा।