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नामसाई घोषणा के बाद असम-अरुणाचल सीमा पर पहला बॉर्डर पिलर स्थापित

पक्के केसांग (अरुणाचल प्रदेश) : ऐतिहासिक नामसाई घोषणा पर हस्ताक्षर के बाद असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच पहला सीमा स्तंभ (बॉर्डर पिलर) पक्के केसांग जिले में स्थापित कर दिया गया है। इसे दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।असम के मुख्यमंत्री डाॅ. हिमंत बिसव सरमा ने अपने साेशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर फाेटाे साझा करते हुए कहा कि यह सीमा स्तंभ असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच भौतिक सीमांकन प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है। दशकों से सीमा को लेकर बनी अनिश्चितता और समय-समय पर उत्पन्न होने वाले तनाव की स्थिति को समाप्त करने की दिशा में यह एक ठोस पहल है। इस घोषणा का उद्देश्य दशकों पुराने सीमा विवाद को आपसी सहमति और संवाद के जरिए स्थायी समाधान तक पहुंचाना है।वहीं, अधिकारियाें ने कहा कि इस कदम से सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक स्पष्टता, आपसी समन्वय और विकास कार्यों को गति मिलेगी। इसे पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थायी शांति और सहयोग को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया जा रहा है।अरुणाचल प्रदेश के पक्के केसांग की क्षेत्रीय समिति के अध्यक्ष बियुराम वाघे ने जिला प्रशासन और स्थानीय हितधारकों के साथ मिलकर सीमांकन प्रक्रिया को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उनका कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच भरोसा मजबूत करना और दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करना है।इस संबंध में अधिकारियों का मानना है कि सेजोसा में स्थापित यह पिलर नामसाई डिक्लेरेशन के तहत आगे होने वाले सीमांकन कार्यों के लिए एक मिसाल बनेगा। इससे प्रशासनिक समन्वय बढ़ने, सीमा संबंधी विवादों में कमी आने और संवेदनशील क्षेत्रों में विकास गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही इस व्यापक समझौता ढांचे के तहत चरणबद्ध तरीके से अन्य स्थानों पर भी बॉर्डर पिलर लगाए जाएंगे, जिससे दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।——————–