Saturday , February 7 2026

राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन में केन्द्र सरकार के साथ मिलकर करेंगे काम : मोहन यादव

सीहोर में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन में किसानों के उन्मुखीकरण के लिएहुआ राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलनसीहोर : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ किसान के साथ खड़ी सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन में मध्य प्रदेश सरकार केन्द्र सरकार के साथ मिलकर काम करेगी।मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इकार्डा जैसे अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान का सशक्त होना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। भारत में अन्न केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और संस्कार का आधार है “अन्न देवो भव:” हमारी कृषि परंपरा का मूल मंत्र है।उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ‘कृषक कल्याण वर्ष’ मना रहा है। केन्द्र के दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना, आयात निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इससे किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक भंडारण और सुनिश्चित विपणन की सुविधाएं मिलेंगी। दलहन उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जिससे इस मिशन का सर्वाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा।कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे। केन्द्रीय मंत्री चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. यादव दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (आईसीएआरडीए) सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक प्लांट टिशु कल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इकार्डा का यह नवीन भवन प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए नई आशाओं और संभावनाओं का द्वार खोलेगा। यह केंद्र वैज्ञानिक खेती, उन्नत तकनीक और वैश्विक कृषि अनुभव को किसानों से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा।मुख्यमंत्री ने सिंचाई विस्तार और जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इकार्डा द्वारा विकसित वैज्ञानिक मॉडल प्रदेश की योजनाओं को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय और इकार्डा का यह संयुक्त प्रयास मध्यप्रदेश को टिकाऊ और समृद्ध कृषि का राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक मॉडल बना सकता है। उन्होंने कहा कि सीहोर का यह राष्ट्रीय सम्मेलन दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, मूल संवेदनाओं और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विमर्श का सशक्त मंच बनेगा और नीति निर्धारण व अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय कृषि मंत्रालय एवं इकार्डा की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह अनुसंधान केंद्र प्रदेश की कृषि को नई दिशा देगा और किसानों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा।उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश भारत का फूड बॉस्केट है। भारतीय संस्कृति में अन्न देवता के माध्यम से समाज पल्लवित होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के विकास और कल्याण के लिए 4 श्रेणियां गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण बताई हैं। हमारी भारतीय सभ्यता में कृषि आधारित जीवन शैली विकसित हुई। आधुनिक समय में खेती में कई प्रकार के विकार आ गए। खेती में रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से हमारी जीवन शैली में बदलाव आया। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा। अमेरिका जैसे देश ने भारत की बात मानी।उन्होंने कहा कि दाल हर भारतीय परिवार की प्रतिदिन की थाली का अभिन्न हिस्सा और हर मौसम में भारतीय परिवारों की जरूरत है। इसका उत्पादन और खपत बताता है कि दलहन क्षेत्र में हमें और अधिक काम करने की जरूरत है। इसलिए अब मध्य प्रदेश में दलहन फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ायेंगे। इसके लिए हम केन्द्र सरकार के साथ हम-कदम होकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार दालों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार के हर मिशन, हर संकल्प की पूर्ति में हर जरूरी सहयोग देगी। हम देश में दाल समृद्धि का संकल्प मिल-जुलकर पूरा करेंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना से सोयाबीन की उपज की 1500 करोड़ रुपये से अधिक राशि किसानों के खातों में पहुंची है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन उपयुक्त प्रबंधन के अभाव में प्रदेश का बड़ा भू-भाग सिंचाई से वंचित था। हमारी सरकार आने के बाद प्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। देश की पहली केन-बेतवा राष्ट्रीय लिंक नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी जोड़ो परियोजना से प्रदेश में सिंचाई का रकबा और तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हमने आने वाले सालों में प्रदेश का सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर तक करने का लक्ष्य रखा है।कार्यक्रम को केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजीव कुमार अग्रवाल, अंतरराष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (इकार्डा) के महानिदेशक अली अबुर साबा और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री कंषाना ने ‘एक उत्पाद-श्रेष्ठ उत्पाद’ के तहत मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के अनुपम उत्पाद सम्मेलन में आए सभी अतिथियों को भेंट किए। कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा दलहन मिशन पोर्टल का शुभारंभ किया और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रकाशित बुलेटिन इकॉर्डा की पुस्तक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम स्थल पर कृषि विकास संबंधी प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही इकॉर्डा परिसर में पौध-रोपण भी किया गया।राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री द्वय रामनाथ ठाकुर एवं भागीरथ चौधरी, प्रदेश के मंत्रीगण करण सिंह वर्मा व कृष्णा गौर, राज्यों के कृषि मंत्रियों में ओडिशा के उप-मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री केवी सिंहदेव, उत्तरप्रदेश से सूर्य प्रताप शाही, हरियाणा से श्याम सिंह राणा, गुजरात से रमेशभाई भूराभाई कटारा, छत्तीसगढ़ से रामविचार नेताम, महाराष्ट्र से आशीष जायसवाल, राजस्थान से डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, बिहार से रामकृपाल यादव, इकार्डा के निदेशक शिवकुमार अग्रवाल, केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के निदेशक अविनाश लवानिया, कृषि क्षेत्र में कार्य करने वाली विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ सहित बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे।________________