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यूजीसी संशोधन विधेयक के विरोध में अंजान आदमी पार्टी का कड़ा रुख, दी ये चेतावनी

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। यूजीसी कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम रोक लगाए जाने के बावजूद इसे पूरी तरह वापस लिए जाने की मांग को लेकर विरोध जारी है। इसी क्रम में अंजान आदमी पार्टी ने नए यूजीसी संशोधन विधेयक (New UGC Bill) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के पदाधिकारियों एवं विधि विशेषज्ञों ने विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराईं।

प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि नया यूजीसी संशोधन विधेयक उच्च शिक्षा की स्वायत्तता को कमजोर करता है और इससे विश्वविद्यालयों व शिक्षण संस्थानों पर केंद्र सरकार का अत्यधिक नियंत्रण स्थापित हो जाएगा। नेताओं ने आरोप लगाया कि यह विधेयक शिक्षा को समावेशी बनाने के बजाय समाज में विभाजन पैदा करेगा, जिसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।

पार्टी पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद सरकार का रवैया संतोषजनक नहीं है। उन्होंने मांग की कि विधेयक को पूरी तरह वापस लिया जाए तथा छात्रों, शिक्षकों और शिक्षाविदों से व्यापक संवाद के बाद ही किसी नए कानून पर विचार किया जाए। चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने यूजीसी संशोधन विधेयक को वापस नहीं लिया तो ऑल इंडिया एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन एवं अंजान आदमी पार्टी छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ मिलकर देशभर में आंदोलन करेगी।

अंजान आदमी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशुतोष कुमार ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने इस “काले कानून” को शीघ्र वापस नहीं लिया तो इससे विभिन्न जातियों के बीच वैमनस्य बढ़ेगा और विश्वविद्यालय परिसरों में टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि जिस प्रकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के दुरुपयोग के उदाहरण सामने आए हैं, उसी तरह यह नया कानून भी शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले सवर्ण छात्रों को झूठे मुकदमों में फँसाने का माध्यम बन सकता है।

पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना श्रीवास्तव ने कहा कि इतिहास गवाह है कि विदेशी शासकों द्वारा किए गए अत्याचारों के विरुद्ध कभी कोई विशेष कानून नहीं बनाया गया, फिर बार-बार सवर्ण समाज के विरुद्ध विभाजनकारी कानून क्यों लाए जा रहे हैं।

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता डी.के. मिश्रा ने कहा कि न्यायालयों में प्रतिदिन यह देखा जा सकता है कि किस प्रकार SC/ST एक्ट और दहेज निषेध अधिनियम का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने विष्णु तिवारी बनाम राज्य (आगरा प्रकरण) का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों तक एक निर्दोष व्यक्ति को झूठे आरोपों में जेल में रहना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मौजूदा कानूनों का इतना दुरुपयोग हो रहा है, तो नए यूजीसी कानून के दुरुपयोग की आशंका को कैसे नकारा जा सकता है। उन्होंने सरकार की नीति को अंग्रेजों की “डिवाइड एंड रूल” नीति की पुनरावृत्ति बताया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता सत्येंद्र कुमार ने कहा कि एक ओर विश्व के अन्य देश शिक्षा और अनुसंधान में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं भारत में ऐसे कानून लागू किए जा रहे हैं जो शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करते हैं।

पदाधिकारियों ने दोहराया कि यदि समय रहते केंद्र सरकार ने यूजीसी संशोधन विधेयक को वापस नहीं लिया तो अंजान आदमी पार्टी और ऑल इंडिया एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करेंगी।