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दादी–नानी की कहानी में बच्चों को मिला संतोष में खुशी का संदेश

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। लोक संस्कृति शोध संस्थान की मासिक श्रृंखला के अंतर्गत गुरुवार को दादी–नानी की कहानी कार्यक्रम का 77वां आयोजन दुबग्गा क्षेत्र स्थित लालाबाग के प्राथमिक विद्यालय, भूहर–द्वितीय में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में बच्चों ने प्रेरक कहानी के माध्यम से यह सीख ली कि खुशी तुलना में नहीं बल्कि संतोष में है।

कार्यक्रम में स्टोरीमैन जीतेश श्रीवास्तव ने रोचक कथा के माध्यम से बच्चों को जीवन का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहानी सुनाई कि एक कौवा अपने काले रंग से असंतुष्ट होकर सबसे खुश पक्षी की खोज में निकलता है। हंस, तोता और मोर से होते हुए उसकी यात्रा चिड़ियाघर तक पहुँचती है।

जहाँ मोर बताता है कि उसकी सुंदरता ही उसके बंधन का कारण बन गई है। अंततः यह स्पष्ट होता है कि वास्तव में सबसे खुश वही है जो स्वतंत्र है और वह कौवा स्वयं है। कहानी के माध्यम से बच्चों को यह समझाया गया कि जो हमारे पास है उसमें संतोष करना ही सच्ची खुशी का मार्ग है।

कार्यक्रम का शुभारंभ मनोरंजक खेलों से हुआ। बच्चों को परिस्थितिजन्य संकेतों के आधार पर अभिनय और वाक्य उच्चारण का अभ्यास कराया गया। इस अवसर पर चौपाल प्रभारी अर्चना गुप्ता ने प्रेरक कविता सुनाई, जिसे बच्चों ने उत्साहपूर्वक दोहराया।

कार्यक्रम में संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी, प्रभारी प्रधानाध्यापक आशीष पंवार, सहायक अध्यापक ऊषा देवी वर्मा, स्थानीय निवासी एवं सोशल लाइफ लाइन फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गुप्ता सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।