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बदलती जरूरतों के हिसाब से क्लिनिकल ट्रायल डिजाइन भी बदल रहे हैं – प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी

सीएसआईआर-एक सप्ताह एक प्रयोगशाला कार्यक्रम एवं 72वां वार्षिक दिवस समारोह

लखनऊ। सीएसआईआर-सीडीआरआई, लखनऊ सीएसआईआर-एकसप्ताह एक प्रयोगशाला कार्यक्रम मना रहा है। जिसके पांचवें दिन शुक्रवार को संस्थान ने अपना 72वां वार्षिक दिवस मनाया। डॉ. राधा रंगराजन (निदेशक सीएसआईआर-सीडीआरआई) ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। इस अवसर पर प्रतिष्ठित 48वां सर एडवर्ड मेलानबी मेमोरियल व्याख्यान पद्म भूषण प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी, मानद एमिनेंट प्रोफेसर एवं पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI) के पूर्व अध्यक्ष द्वारा दिया गया।

पद्म भूषण प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी

अपने व्याख्यान में प्रो. रेड्डी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं नीति निर्धारण के विषय में अपनी बात रखी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीति निर्धारण हेतु बहु-विषयक अनुसंधान की अवश्यकता होती है एवं दिशानिर्देश के निर्माण एवं विकास में अंतिम उपयोगकर्ताओं को शामिल किया जाना जरूरी है। बदलती जरूरतों के हिसाब से क्लिनिकल ट्रायल डिजाइन भी बदल रहे हैं। विज्ञान विचारों को उत्पन्न करता है एवं नवाचारों को जन्म देता है। प्रौद्योगिकी उत्पादों को बनाती है। फार्मा इंडस्ट्री, विज्ञान को ऊर्जावान चिकित्सा प्रौद्योगिकियों एवं दवाओं के रूप में विकसित करती जिनसे मानव स्वास्थ्य की देखभाल होती है। इन चिकित्सा प्रौद्योगिकियों/दवाओं का सामाजिक मूल्य तब ही है जब इन्हें सिर्फ अनुसंधान या परीक्षणों के लिए ही न उपयोग जा किया जाए बल्कि इनका अंतिम उपयोगकर्ता की पहुँच तक भी होना चाहिए जिन्हें इसकी वास्तविक आवश्यकता है। आम आदमी के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों एवं उनके उपयोग एवं उपलब्धता में प्रोपरिएटरी साइंस (कंपनियों का निजी अनुसंधान) तेजी से बाधा बन रहा है। वैज्ञानिक समुदाय को ऐसे तरीके ईजाद करने होंगे जिनके द्वारा सामाजिक जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए नवाचार को प्रोत्साहित किया जा सके।

सीएसआईआर-सीडीआरआई के पास राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व के अनेक रोगों हेतु प्रभावी दवाओं की एक समृद्ध श्रृंखला तैयार है – डॉ. राधा रंगराजन

डॉ. राधा रंगराजन (निदेशक सीएसआईआर-सीडीआरआई, लखनऊ) ने इस अवसर पर संस्थान की विगत वर्ष की उलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि संस्थान के पास राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के अनेक रोग संकेतों के लिए दवाओं की एक बहुत समृद्ध श्रृंखला है। उन्होंने आगे उल्लेख किया कि वर्तमान में पांच दवाएं नैदानिक परीक्षणों, जिनमें कोविड-19, गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग (NAFLD), दवा प्रतिरोधी तपेदिक (टीबी), थ्रोंबोसिस(घनास्त्रता) एवं फ्रैक्चर हीलिंग हेतु दवाएं शामिल हैं। इनमें से तीन पहले से ही उद्योग भागीदारों को लाइसेंस की जा चुकी हैं। दो प्रत्याशी दवाएं भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा आर्थिक सहयोग के माध्यम से विकसित की जा रही हैं।

डॉ. राधा रंगराजन

इसी तरह, छोटे अणु आधारित यौगिकों का एक अन्य समूह आईएनडी (इन्वेस्टिगेशनल न्यू ड्रग) मानकों के अनुसार अनुसंधान के उन्नत चरणों में है। जिनमें मलेरिया, लीशमैनियासिस, कीमोथेरेपी-प्रेरित न्यूरोपैथिक दर्द, पेट के कैंसर और हाइपरलिपिडिमिया हेती यौगिक प्रमुख हैं। फाइटोफार्मास्युटिकल्स (औषधीय पौधों के अर्क से प्राप्त दवाओं) के क्षेत्र में, संस्थान स्ट्रोक, अस्थि स्वास्थ्य, हाइपरट्रिग्लिसराइडेमिया और बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) के लिए कई लीड यौगिक विकसित कर रहा है।संस्थान ने सीएसआईआर-सीडीआरआई एवं बायोटेक डेस्क प्रा. लिमिटेड की पार्टनर्शिप में अपने प्रोडक्ट ग्रीनआर को बाजार में उतारा है। इसके एक उत्पाद, “ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए स्पिनासिया ओलेरासिया से मानकीकृत नैनो-फॉर्मुलेशन” को हाल ही में एसटीईएम टेक्नोलॉजी ट्रांसफर इम्पैक्ट अवार्ड -2022 प्राप्त हुआ।

एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक वैश्विक खतरा है : डॉ. हाबिल खोराकीवाला

डॉ. हाबिल खोराकीवाला

भारतीय बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी वोकहार्ट के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. हाबिल खोराकीवाला इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक वैश्विक खतरा है एवं उल्लेख किया कि कोविड-19 महामारी के 2 वर्षों में हमने इसके कारण लगभग 6.7 मिलियन मौतों का सामना किया, जबकि हर साल लगभग 4.9 मिलियन मौतें एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी जीवाणुओं (बेक्टीरिया) के कारण होती हैं। एंटीबायोटिक्स आधुनिक चिकित्सा का केंद्र बिंदु बन चुका हैं। उनके नेतृत्व में वोखार्ट ने एक सक्षम बहु-विषयक ड्रग डिस्कवरी टीम विकसित की है। उनकी कंपनी ने नए एंटीबायोटिक्स की खोज की है, जिसने दवा प्रतिरोधी सुपरबग्स से संक्रमित रोगियों के जीवन को बचाने में बेहद उपयोगी है। इस एंटीबायोटिक द्वारा मृत्यु-अवस्था से ठीक हुए रोगियों में से एक रोगी लखनऊ के मेदांता अस्पताल में ही ठीक किया जा चुका है। उन्होंने विज्ञान आधारित स्मार्ट रेगुलेटरी (विनियमन) प्रक्रिया के साथ भारत में एक सरलीकृत नियामक प्रक्रिया की आवश्यकता का भी सुझाव दिया।

संस्थान ने सीडीआरआई टीम के उन सदस्यों को भी सम्मानित किया जिन्होंने सफलतापूर्वक इस प्रयोगशाला में 25 वर्ष समर्पित सेवा अवधि पूरी कर ली है। विगत वर्ष सेवानिवृत्त हुए सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सब्यसाची सान्याल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।