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स्कूल से न छूटे बच्चों का नाता, बाल संरक्षण और शिक्षा पर गुरुग्राम में मंथन

गुरुग्राम (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, शिक्षा तक पहुँच, बाल श्रम एवं शोषण की रोकथाम और परिवारों के सशक्तीकरण से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करने तथा उनके समाधान के लिए विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय मजबूत करने के उद्देश्य से CHETNA द्वारा गुरुग्राम में बहु-हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में 70 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें विभिन्न सरकारी विभागों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), सामाजिक संस्थाओं तथा बाल अधिकारों के क्षेत्र में कार्यरत अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। 

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुरुग्राम से मुख्य अतिथि निशा (CJM) उपस्थित रहीं। CHETNA के निदेशक संजय गुप्ता, प्रोजेक्ट हेड पूजा तथा प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर राजेंद्र कुमार सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। बाल कल्याण समिति से रजनी एवं मीना शर्मा तथा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट से कैलाश एवं नरेंद्र सहित विभिन्न विभागों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बच्चों से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर अपने अनुभव एवं विचार साझा किए।

बैठक के दौरान बच्चों की शिक्षा, बाल संरक्षण, पहचान एवं दस्तावेजीकरण और परिवार सशक्तीकरण से संबंधित विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। शिक्षा के संदर्भ में बच्चों के स्कूलों में नामांकन एवं नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, स्कूल छोड़ने की समस्या को रोकने, सीखने में आने वाली बाधाओं को दूर करने तथा परिवारों और समुदाय की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। चर्चा में इस बात को रेखांकित किया गया कि बच्चों की शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने के लिए विद्यालयों, परिवारों, सरकारी विभागों और सामाजिक संगठनों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है।

बाल संरक्षण से संबंधित चर्चा में जोखिमग्रस्त बच्चों की समय पर पहचान, बाल श्रम एवं शोषण की रोकथाम, शिकायतों पर उचित कार्रवाई तथा जरूरतमंद बच्चों को संबंधित संरक्षण सेवाओं से जोड़ने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। प्रतिभागियों ने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभागीय समन्वय, प्रभावी रेफरल व्यवस्था और समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर विचार साझा किए। चर्चा का उद्देश्य यह समझना भी रहा कि जमीनी स्तर पर बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए मौजूदा संस्थागत व्यवस्थाओं को किस प्रकार अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

CHETNA के निदेशक संजय गुप्ता ने बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा, “बच्चों के लिए केवल शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए सुरक्षित और सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करना भी उतना ही आवश्यक है। इसके लिए बच्चों की समस्याओं की समय रहते पहचान, परिवारों के साथ निरंतर संवाद और संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। बच्चों की आवाज़ और उनकी आवश्यकताओं को केंद्र में रखकर किए गए प्रयास ही उन्हें शिक्षा से जोड़े रखने और उनके अधिकारों की रक्षा करने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।”

निशा (CJM) ने कहा, “बच्चों को हिंसा, शोषण या अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में समय पर सहायता और उचित मार्गदर्शन मिलना आवश्यक है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पात्र बच्चों को निःशुल्क विधिक सहायता एवं कानूनी जागरूकता से जोड़ने के प्रयास किए जा सकते हैं। इसके लिए बच्चों और उनके परिवारों को उपलब्ध कानूनी सहायता की जानकारी देना तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें संबंधित संस्थाओं तक पहुँचाने के लिए प्रभावी समन्वय स्थापित करना महत्वपूर्ण है।”

UIDAI की प्रतिनिधि कुसुम ने कहा, “आधार पंजीकरण या उसमें सुधार की प्रक्रिया में बच्चों और उनके परिवारों को जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, उन्हें समझना और सही प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। दस्तावेजों की कमी, पते से संबंधित समस्याओं या अन्य प्रक्रियागत बाधाओं के मामलों में पहले संबंधित समस्या की पहचान की जानी चाहिए। इसके बाद परिवारों को आवश्यक दस्तावेजों, निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध सहायता केंद्रों के बारे में उचित मार्गदर्शन देकर उनके मामलों के समाधान के लिए संबंधित प्राधिकरणों से समन्वय किया जा सकता है।”

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि पहचान संबंधी दस्तावेजों की अनुपलब्धता बच्चों के स्कूल में प्रवेश, सरकारी सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुँच में बाधा बन सकती है। ऐसे मामलों में परिवारों को सही जानकारी उपलब्ध कराने, आवश्यक दस्तावेजों की पहचान करने और संबंधित विभागों के साथ समन्वय के माध्यम से लंबित मामलों के समाधान की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

उदयन केयर की प्रतिनिधि लीना प्रसाद ने कहा, “बच्चों की सुरक्षा और समग्र विकास के लिए परिवार को सहयोग देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब परिवार सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे होते हैं, तो उसका प्रभाव बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और भावनात्मक स्थिति पर भी पड़ सकता है। इसलिए परिवारों की आवश्यकताओं को समझते हुए उन्हें उपलब्ध सरकारी योजनाओं, आजीविका के अवसरों, परामर्श सेवाओं और समुदाय-आधारित सहयोग से जोड़ना जरूरी है। परिवारों को सशक्त बनाकर ही बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित और स्थिर वातावरण तैयार किया जा सकता है।”