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स्वच्छता व स्वास्थ्य सुरक्षा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं बाढ़ प्रभावित : बिंदु बोरा

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। फैजुल्लागंज में बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने अब स्वास्थ्य सुरक्षा, साफ-सफाई और संक्रामक बीमारियों से बचाव की चुनौती है। इसे देखते हुए समाजसेवी एवं बोरा फाउंडेशन की चेयरपर्सन बिंदु बोरा ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने और घरों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद प्रभावित लोगों को राशन सामग्री उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्य संबंधी सहायता, साफ-सफाई और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है। बोरा फाउंडेशन की ओर से इस दिशा में जल्द ही पहल की जाएगी, ताकि प्रभावित परिवार स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें।

बिंदु बोरा ने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद कई स्थानों पर गंदगी, दूषित पानी और जलभराव के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों की विशेष देखभाल की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से स्वच्छ पेयजल का इस्तेमाल करने, भोजन करने से पहले हाथ धोने और घरों के साथ आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि बुखार, उल्टी-दस्त या त्वचा संबंधी परेशानी होने पर लापरवाही न बरतें और तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति का दायित्व है कि वह जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए आगे आए। बाढ़ प्रभावित परिवारों को इस समय धैर्य, सहयोग और संवेदनशीलता की जरूरत है। पानी उतरने के बाद भी स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति सतर्क रहना जरूरी है, ताकि लोग बीमारियों से बच सकें और सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।

बिंदु बोरा ने जिला प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सफाई, जल निकासी, मच्छर नियंत्रण और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए इन अभियानों को लगातार जारी रखने पर जोर दिया। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे बाढ़ के बाद किसी तरह की लापरवाही न बरतें और स्वच्छता व स्वास्थ्य सुरक्षा को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

वहीं, बोरा फाउंडेशन के निदेशक वत्सल बोरा ने कहा कि समाज के सामूहिक प्रयासों, सरकार एवं प्रशासन की सक्रियता और नागरिकों की जागरूकता से ही बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिलेगी।