कल राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर समाजवादी पार्टी का तकलीफ देखकर मन बहुत उथलपुथल रहा. सदन में समाजवादी पार्टी के विधायक जिस तरीके से रामजी के प्रति आदरभाव में चढ़ावा चोरी पर दुखी थे, और सरकार से सवाल पूछ रहे थे, वह बेहद जायज एवं नैसर्गिक था. सपा विधायक शाहिद मंजूर, कमाल अख्तर, अताउर रहमानरहमान, महबूब अली, सैयदा खातून, नसीम सोलंकी आदि राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर दुखी थे, उससे मेरा मन विह्वल हो गया. इन लोगों की सेक्युलरता देखकर रोम रोम प्रफुल्लित हो उठा कि इन लोगों ने मस्जिद का चंदा चोरी होने पर कभी आवाज नहीं उठाया, लेकिन देखो राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर कितने दुखी हैं?
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यही होती है इंसानियत कि अपने घर में खाने को भले ना रहे, लेकिन दूसरे के घर में कोई खाना कैसे खा लेगा, इसकी चिंता बराबर बनी रहती है. खैर, समाजवादी पार्टी शुरू से ही चाहती थी कि अयोध्या में इस तरह का कोई काम ना हो, जिससे चढ़ावा चोरी की नौबत आये. चढ़ावा चोरी रोकने के लिये ही समाजवादी पार्टी अयोध्या में रामलला का मंदिर किसी कीमत पर नहीं बनने देना चाहती थी. मुलायम सिंह यादव ने भी मंदिर निर्माण की मांग कर रहे कारसेवकों पर गोली इसीलिये चलवाई ताकि यहां ना कोई मंदिर बने और ना ही कोई चढ़ावा चोरी हो. गोली चलवाने की जिम्मेदारी उन्होंने नृपेंद्र मिश्रा को दी थी ताकि चढ़ावा चोरी या निर्माण में कभी कोई गड़बड़ी ना हो.
चढ़ावा चोरी रोकने के लिये ही समाजवादी पार्टी ने अयोध्या में कोई काम नहीं कराया. चढ़ावा चोरी कभी ना हो इसके लिये समाजवादी पार्टी ने हर संभव प्रयास किया, भक्तों पर गोलियां चलवाईं, लाठी चलवाया, अरेस्ट करवाया, सरयू को लाल कर दिया ताकि ना मंदिर बने और ना ही चढ़ावा चोरी की नौबत आये. परंतु, उनकी योजना को असफलता इसलिये मिली कि गोली चलवाकर कोठारी बंधुओं समेत कई को ठिकाने लगाने में सफल रहे नृपेंद्र मिश्रा सपा को धोखा देते हुए जाकर दूसरी पार्टी से मिल गये. इस एहसान के बदले दूसरी पार्टी ने उन्हें मंदिर बनवाने की जिम्मेदारी दे दी. इसके कारण ही चढ़ावा चोरी की नौबत आ गई और सपा को इसके लिये प्रदर्शन करना पड़ा.

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