लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने एक दीर्घकालिक योजना को स्वीकृति दी है। इस योजना के अंतर्गत भूटान के खोरलोछू जलविद्युत स्टेशन से 511 मेगावाट जलविद्युत का आयात किया जाएगा। आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड तथा टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड के बीच 30 साल के बिजली बिक्री समझौते को मंजूरी दी है। यह बिजली भारत-भूटान सीमा पर 6.75 रुपये प्रति यूनिट की एकसमान दर (फ्लैट टैरिफ) पर उपलब्ध होगी।
केएचपीएल एक रणनीतिक साझेदारी है। इसमें ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 60 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी है, शेष 40 प्रतिशत टीपीटीसीएल के पास है।
अध्यक्ष अरविंद कुमार एवं सदस्य संजय कुमार सिंह की पीठ ने निर्णय दिया है कि, यह समझौता यूपीपीसीएल को गर्मियों की अत्यधिक मांग को पूरा करने में सहायता करेगा। इसके साथ ही, यह निगम के जलविद्युत क्रय दायित्व (हाइड्रो परचेज ऑब्लिगेशन) की पूर्ति भी सुनिश्चित करेगा। इसके अतिरिक्त, इस समझौते से उपभोक्ताओं को “दीर्घकालिक मूल्य निश्चितता” का लाभ भी मिलेगा।
यूपीपीसीएल ने आयोग से विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 86(1)(बी) के अंतर्गत बिजली के स्रोत और विद्युत क्रय समझौते के प्रारूप, दोनों की स्वीकृति मांगी थी। इसके तहत, 1 मई 2030 से हर वर्ष मई से अक्टूबर की अवधि के लिए 511 मेगावाट बिजली खरीदने का प्रस्ताव किया गया था। यह बिजली भारत-भूटान सीमा पर 6.75 रुपये प्रति यूनिट की तय दर (फर्म टैरिफ) पर 30 वर्षों के लिए उपलब्ध होगी।
आयोग ने संज्ञान लिया कि लेवलाइज्ड टैरिफ की गणना सीईआरसी टैरिफ विनियम, 2024 के अंतर्गत की गई थी। इसके अनुसार, बस-बार लेवलाइज्ड टैरिफ 6.47 रुपये प्रति किलोवाट घंटा (kWh) निर्धारित था। इसमें भारत-भूटान सीमा तक का ट्रांसमिशन चार्ज 0.28 रुपये प्रति किलोवाट घंटा जोड़ा गया। इस प्रकार अंतिम वितरण बिंदु पर यह टैरिफ 6.75 रुपये प्रति किलोवाट घंटा तय हुई। यह 6.75 रुपये प्रति यूनिट की कीमत “30 वर्षों की संपूर्ण अवधि के लिए बिना किसी वार्षिक वृद्धि के स्थिर रहेगी।”
यूपीईआरसी ने सीमा पार ढांचे के अंतर्गत अपने स्वयं के क्षेत्राधिकार की जांच की। आयोग ने पुनरावृत्ति की कि धारा 86(1)(बी) के तहत, वह उत्तर प्रदेश में आपूर्ति के लिए डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसियों की बिजली खरीद और प्रोक्यूअरमेंट प्रक्रिया को विनियमित करता है। उसने इस बात पर बल दिया कि बिजली का आयात विद्युत मंत्रालय के 2018 के सीमा पार व्यापार दिशानिर्देशों और सीईआरसी के सीमा पार विद्युत व्यापार विनियम, 2019 द्वारा शासित होता है। इन नियमों के अंतर्गत, बिजली आयात करने का प्रस्ताव करने वाली कोई भी भारतीय इकाई “नामित प्राधिकारी की स्वीकृति लेने के बाद ही ऐसा कर सकती है।” यूपीईआरसी की यह स्वीकृति स्पष्ट रूप से इन केंद्रीय-स्तरीय आवश्यकताओं के अनुपालन के अधीन है।
भारत-भूटान सीमा तक के सभी ट्रांसमिशन चार्जेस, हानियां और ऑपरेशनल चार्जेस टीपीटीसीएल द्वारा वहन किए जाएंगे। यूपीपीसीएल उस बिंदु से आगे के नेटवर्क शुल्क और हानियों का वहन करेगा, जिसमें जीएनए और राज्य ट्रांसमिशन चार्जेस शामिल हैं। टीपीटीसीएल और उत्पादक केएचपीएल के बीच परस्पर 5 पैसे प्रति यूनिट के ट्रेडिंग मार्जिन पर सहमति बनी है। यह मार्जिन पहले से ही 6.75 रुपये प्रति यूनिट के टैरिफ में सम्मिलित है, और इसके लिए कोई अलग राशि देय नहीं होगी। सेटलमेंट नोडल एजेंसी के शुल्क भी टैरिफ में शामिल कर लिए गए हैं। टीपीटीसीएल ने वचन दिया है कि यदि इन शुल्कों में कोई बदलाव होता है, तो वह टैरिफ एडजस्टमेंट की मांग नहीं करेगा।
केएचपीएल से हर साल मिलने वाली 1,748 मिलियन यूनिट बिजली के साथ 4 घंटे की स्टोरेज क्षमता भी मिलेगी। इस पूरी योजना को इस तरह तैयार किया गया है ताकि परियोजना से बिजली सप्लाई का सबसे मुख्य समय, गर्मियों के महीनों में बिजली की सबसे ज़्यादा मांग के समय के साथ पूरी तरह मेल खा सके… जिससे यूपीपीसीएल को गर्मियों में सबसे ज़्यादा मांग वाले घंटों में बिजली की ज़रूरत को पूरा करने में बड़ी मदद मिल सके।
यूपीईआरसी ने निष्कर्ष निकाला कि जिसमें सब कुछ शामिल है और सालाना कोई बढ़ोतरी नहीं होगी ऐसा टैरिफ लंबे समय के लिए बिजली की कीमतों की निश्चितता तय करेगा। इसके साथ ही, यह उपभोक्ताओं को भविष्य में कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाएगा, खासकर गर्मियों के उन महीनों में जब बिजली की मांग सबसे ज़्यादा होती है। टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड का पक्ष एसकेवी लॉ ऑफिसेस के फाउंडिंग पार्टनर वेंकटेश ने रखा। पार्टनर आशुतोष के. श्रीवास्तव, सीनियर एसोसिएट अश्विन सिंह और एसोसिएट अनिकेत कन्हुआ ने उनकी सहायता की।
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