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महारकुंभ के IIT वाले बाबा ने प्रतीका से की शादी, आश्रम में मिलें और दूसरे दिन ही एक हो गए…

महाशिवरात्रि 2025 के अवसर पर तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित एक आश्रम में हुई एक अनोखी प्रेम कहानी सुर्खियों में है, जिसने न केवल प्रेम का जज़बा दिखाया, बल्कि युवाओं में अध्यात्म और विज्ञान के मेल का भी उदाहरण पेश किया। यह कहानी है आइआइटी मुंबई से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करने वाले अभय सिंह और खगोल विज्ञान शोधार्थी प्रतीका की, जिन्होंने महाकुंभ-2025 के दौरान एक-दूसरे से मुलाकात की और अपने प्रेम को परिणित किया।महाशिवरात्रि 2025 की सुबह, जब पूरा देश महाकुंभ का उत्सव मना रहा था, तब अभय सिंह और प्रतीका की पहली मुलाकात आश्रम में हुई। दोनों का परिचय हिन्दू धर्म और अध्यात्म के गहरे ज्ञान से जुड़ा था। दोनों वैचारिक रूप से समान विचारधारा के थे, जिसने मुलाकात को और भी खास बना दिया। दूसरे ही दिन, यानी महाशिवरात्रि के दिन, अभय ने प्रतीका को शादी का प्रस्ताव दिया। शुरुआत में यह प्रस्ताव मज़ाक की तरह समझा गया, लेकिन दोनों के बीच गहरे संबंध और समझदारी ने विवाह के विचार को मजबूत कर दिया।संबंधित परिवारों की सहमति के बाद, दोनों ने करीब एक वर्ष तक संपर्क बनाए रखा, एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझा और फिर विवाह का फैसला लिया। 15 फरवरी को, महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर, दोनों ने मंदिर में पारंपरिक रीति-रिवाज से विवाह किया। इसके बाद कोर्ट मैरिज भी संपन्न हुई। सोमवार को नवविवाहित जोड़ा अपने पैतृक गांव सासरौली पहुंचा, जहां परिवार ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। प्रतीका का गृह कर्नाटक का है, और उनके परिवार ने पारंपरिक रीति-रिवाज से उनका गृह प्रवेश कराया।अभय सिंह की कहानी महाकुंभ-2025 के दौरान चर्चा का विषय बनी, जब उन्होंने धर्म और अध्यात्म को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाने का अनूठा प्रयास किया। उन्होंने क्वांटम फिजिक्स और न्यूरोसाइंस जैसे विज्ञान के विषयों का प्रयोग कर धार्मिक अवधारणाओं को तार्किक तरीके से प्रस्तुत किया। सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी बातें युवाओं तक पहुंचीं, और उनकी सरल जीवनशैली तथा तार्किक प्रस्तुति ने उन्हें खास पहचान दिलाई। आइआइटी की पृष्ठभूमि और अध्यात्म के प्रति उनकी रुचि ने उन्हें युवाओं के बीच एक नई पहचान दी है।यह प्रेम कहानी न केवल प्रेम का प्रतीक है, बल्कि यह अध्यात्म और विज्ञान के मेल का भी उदाहरण है, जो यह दिखाता है कि दोनों को एक साथ जोड़कर जीवन को और भी समृद्ध बनाया जा सकता है। अभय और प्रतीका की यह यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी है, जो यह संदेश देती है कि प्रेम, समझदारी और सद्भाव से हर रिश्ता मजबूत किया जा सकता है।