Friday , April 3 2026

प्राइवेट स्‍कूल प्रबंधन को बच्‍चा पैदा कराने की जिम्‍मेदारी भी सौंपी जानी चाहिये!

कुछ लोग प्राइवेट स्‍कूलों के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं, जबकि प्राइवेट स्‍कूल आपको हर तरह की सुविधा उपलब्‍ध करा रहे हैं. हमें प्राइवेट स्‍कूल वालों का एहसान मानना चाहिये कि अभी आपके पास बच्‍चा पैदा करके दो तीन साल बड़ा कर देने के अलावा और कोई भी जिम्‍मेदारी नहीं है. ड्रेस कहां से लेना है, किताब किस दुकान से लेनी है, प्रकाशक कौन सा होगा, बाल किस सैलून से कटवाना है, खत कौन सा नाई ठीक करेगा, जूता किस दुकान से खरीदना है, मोजा, बनियान, कच्‍छा कौन से होजरी से लेना है, स्कूल बता देता है. मतलब आपको परेशान होने की जरूरत ही नहीं है, आप बस स्‍कूल में पैसे देकर एडमिशन करा दीजिये, बाकी सारी जिम्‍मेदारी स्‍कूल प्रबंधन संभाल लेता है. 

वरना हमलोगों के समय में तो सब काम हमलोगों को ही करना होता था. किताब, ड्रेस कहीं से भी खुद ही तय करके खरीदना पड़ता था. पर अब प्राइवेट स्‍कूलों ने सब कुछ आसान कर दिया है, बस आपको अपना बच्‍चा पैदा करने के अलावा पढ़ाने के लिये कुछ नहीं करना है. केवल फीस और खर्च देना है. वैसे, मैं तो कहता हूं कि प्राइवेट स्‍कूलों को बच्‍चा पैदा करने की जिम्‍मेदारी भी अपने कंधों पर उठा लेनी चाहिये कि किस अस्‍पताल में पैदा हुआ बच्‍चा आपके स्‍कूल में पढ़ेगा. आप अस्‍पताल भी तय कर दो तो गार्जियन को खाली एक ही जिम्‍मेदारी रह जायेगी कि वह लोग शादी करके अपना नाइटवर्क कर लें. बाकी सारी जिम्‍मेदारी स्‍कूल पर डाल दें, वह अस्‍पताल और डाक्‍टर तय कर देगा, दंपत्ति चितामुक्‍त हो जायेगी.  

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वैसे स्‍कूल वाले शादी के काम में भी हाथ डाल दें तो यह सोने पर सुहागा हो सकता है. स्‍कूल वाले भी अस्‍पताल से पहले शादी तय करायें और कहां कार्यक्रम होगा, कौन पंडाल सजायेगा, फूल कहां से आयेगा, हॉल कौन सा बुक होगा, यह तय कर दें तो फिर तो माता-पिता के पास केवल एक ही काम बचेगा, जो खुद करना होगा. बाकी तो शादी से लेकर पढ़ाई तक स्‍कूल प्रबंधन कर ही लेगा. हमारी सरकार और हमारा एजुकेशन सिस्‍टम निश्चित ही महान एवं जनताहितैषी है, नहीं तो आपको याद हो कि पहले लूटने के लिये बदमाश, डकैत, गुंडा आदि बंदूक, छूरी, कट्टा, गड़ासा का इस्‍तेमाल करते थे. अब ऐसा करने की कोई जरूरत ही नहीं है, सरकार सरकारी स्‍कूल बंद करके प्राइवेट को पाल पोस देती है, यह लोग बाकी काम बिना किसी हथियार के कर देते हैं.   

#तिरछी_कटारी

(वरिष्ठ पत्रकार अनिल कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से)