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‘आर्टिज़न्स ऑफ इंडिया’ बना कारीगर सशक्तिकरण का राष्ट्रीय मॉडल

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। छात्र उद्यमी प्रणव मित्तल द्वारा स्थापित ‘आर्टिज़न्स ऑफ इंडिया’ अब कई राज्यों में विस्तार कर रहा है और एक स्थानीय पहल से आगे बढ़कर पूरे भारत में प्रभाव डालने वाला आंदोलन बनता जा रहा है। लखनऊ में एक जमीनी पहल के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास अब कारीगर सशक्तिकरण के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय मॉडल का रूप ले रहा है। 

यह पहल पारंपरिक कारीगरों के सामने मौजूद संरचनात्मक चुनौतियों को संबोधित करती है, विशेष रूप से चिकनकारी और जरी-जरदोज़ी जैसी कारीगरी में। इन चुनौतियों में कम वित्तीय साक्षरता, सीमित बाजार तक पहुंच और बिचौलियों पर निर्भरता जैसी समस्याएं शामिल हैं। व्यापक प्राथमिक शोध के माध्यम से इन समस्याओं की पहचान कर इनके समाधान के लिए लक्षित हस्तक्षेप विकसित किए गए हैं, जिससे कारीगर आधुनिक बाजार से बेहतर तरीके से जुड़ सकें।

इस पहल का मुख्य आधार जमीनी संगठनों के सहयोग से आयोजित संरचित कार्यशालाएं हैं, जो गहराई और व्यापकता दोनों सुनिश्चित करती हैं। इन कार्यशालाओं के माध्यम से कारीगरों को वित्तीय प्रबंधन, मूल्य निर्धारण की रणनीतियां और सोशल मीडिया व ऑनलाइन मार्केटप्लेस जैसे डिजिटल टूल्स का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे उन्हें सीधे बाजार तक पहुंच और बेहतर आय के अवसर मिलते हैं।

इस पहल की एक प्रमुख विशेषता इसका दोहराया जा सकने वाला (रिप्लिकेबल) मॉडल है। व्यावहारिक टूलकिट विकसित कर और विभिन्न राज्यों में जमीनी संगठनों के साथ साझेदारी करके ‘आर्टिज़न्स ऑफ इंडिया’ ने अपने मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाने योग्य बनाया है, जिससे इसका प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है और गुणवत्ता भी बनी हुई है।

वर्तमान में इस पहल ने देशभर में 2,500 से अधिक कारीगरों पर सीधा प्रभाव डाला है। साथ ही 23 से अधिक कारीगरों के एक सहकारी समूह को भी समर्थन दिया जा रहा है, जिससे उनकी सौदेबाजी की क्षमता बढ़े और स्थायी विकास सुनिश्चित हो सके। सामूहिक रूप से इन प्रयासों के माध्यम से 20 लाख रुपये (2 मिलियन रुपये) से अधिक की बिक्री भी उत्पन्न हुई है, जो सामाजिक प्रभाव के साथ-साथ आर्थिक परिणामों को भी दर्शाती है।

यह पहल ‘इंडियन सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड्स’ जैसे राष्ट्रीय मंचों पर भी सराही जा चुकी है, जो यह दर्शाती है कि युवाओं द्वारा संचालित और शोध आधारित समाधान जमीनी आर्थिक समस्याओं के समाधान में कितने प्रभावी हो सकते हैं। जमीनी स्तर पर सहयोग और विस्तार योग्य प्रणालियों के संयोजन के साथ ‘आर्टिज़न्स ऑफ इंडिया’ देशभर में कारीगर सशक्तिकरण का एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर रहा है।

लखनऊ से शुरू होकर पूरे भारत में फैल रही यह पहल न केवल परंपराओं को संरक्षित कर रही है, बल्कि भारत की कारीगर अर्थव्यवस्था के भविष्य को भी नई दिशा दे रही है।