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स्टूडेंट एजुकेशन डायग्नोस्टिक्स ने लांच किया लर्निंग डायग्नोस्टिक्स प्लेटफॉर्म


नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। अमेरिका स्थित स्टूडेंट एजुकेशन डायग्नोस्टिक्स (SED) ने भारत में अपने नेचुरल इंटेलिजेंस और न्यूरोसाइंस-आधारित लर्निंग डायग्नोस्टिक्स प्लेटफॉर्म के लॉन्च की घोषणा की है। यह प्लेटफॉर्म छात्रों के सीखने के तरीके का विश्लेषण करने, उनकी शैक्षणिक क्षमताओं और कमियों की पहचान करने तथा व्यक्तिगत विकास के लिए अनुकूल मार्ग तैयार करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

एक असेसमेंट और लर्निंग इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित SED यह समझने में सक्षम है कि प्रत्येक छात्र जानकारी को कैसे प्रोसेस करता है और उसे किस प्रकार लागू करता है। ब्रेन-बेस्ड असेसमेंट्स के माध्यम से यह प्लेटफॉर्म छात्रों की लर्निंग स्टाइल, उनकी ताकत और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान करता है। यह संज्ञानात्मक पैटर्न और शैक्षणिक प्रदर्शन को मैप कर व्यक्तिगत अकादमिक रोडमैप तैयार करता है, जिससे शिक्षकों और अभिभावकों को शुरुआती स्तर पर ही लर्निंग गैप्स को दूर करने और मौजूदा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलती है।

स्टूडेंट एजुकेशन डायग्नोस्टिक्स के संस्थापक श्रीनेश वी ने कहा, “कई बार कक्षा में कम प्रदर्शन करने वाले छात्रों को गलत समझ लिया जाता है। पारंपरिक मूल्यांकन केवल परिणामों को मापते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि छात्र सीखता कैसे है। SED के माध्यम से हमारा उद्देश्य एक ऐसा न्यूरोसाइंस-आधारित डायग्नोस्टिक दृष्टिकोण लाना है, जो स्कूलों और परिवारों को छात्रों के सीखने के पैटर्न को समझने, शुरुआती स्तर पर गैप्स पहचानने और उन्हें सही दिशा देने में मदद करे।”

इस लॉन्च की घोषणा SED लर्निंग इंटेलिजेंस समिट के दौरान की गई, जिसमें शिक्षाविदों और अकादमिक विशेषज्ञों ने भाग लिया। समिट में जोसेफ सालाजार, जैकलीन एम. क्लेम्के, डॉ. सेदिघे ज़मानी रूडसारी और एरिक सांबालुक जैसे विशेषज्ञ शामिल रहे।

यह प्लेटफॉर्म न्यूरोसाइंस-आधारित अकादमिक डायग्नोस्टिक्स के साथ संरचित छात्र ट्रैकिंग टूल्स को भी एकीकृत करता है। इसमें लर्निंग गैप्स की शुरुआती पहचान, SAT और ACT आधारित फ्रेमवर्क, यूएस-आधारित सर्टिफिकेशन पाथवे और 360-डिग्री प्रोग्रेस ट्रैकिंग सिस्टम शामिल हैं।

स्टूडेंट एजुकेशन डायग्नोस्टिक्स की सीईओ ऐशली सांबालुक ने कहा, “भारत में दुनिया की सबसे बड़ी छात्र आबादी में से एक है, लेकिन यहां अधिकांश सिस्टम अभी भी केवल प्रदर्शन को मापते हैं। SED का भारत में आगमन इस सोच को बदलने की दिशा में एक कदम है, जिससे छात्रों की क्षमताओं और कमियों को शुरुआती स्तर पर समझा जा सके और उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप आगे बढ़ाया जा सके।”

चैतन्य एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस की निदेशक सीमा बोप्पना ने इस पहल में रुचि जताते हुए कहा कि न्यूरोसाइंस आधारित दृष्टिकोण शिक्षा प्रणाली को और मजबूत बना सकता है। दक्षिण भारत में श्रीलंका के उप उच्चायुक्त डॉ. गणेशनाथन गीथिस्वरन ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तनकारी कदम बताया।

इस अवसर पर SED ने भारत में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारी की अपनी योजना की भी घोषणा की। प्रस्तावित सहयोग में हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस के राज्य अध्यक्ष श्री सुरेश चंदर, अमेरिकन एडुग्लोबल स्कूल के संस्थापक श्री पी. के. सांबल और पंजाब के फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स के अध्यक्ष डॉ. जगजीत सिंह धूरी शामिल हैं।

ये साझेदारियां शिक्षा में नेचुरल इंटेलिजेंस और न्यूरोसाइंस को मुख्यधारा में लाने और छात्रों को अधिक व्यक्तिगत एवं प्रभावी शैक्षणिक सहायता प्रदान करने की दिशा में काम करेंगी। भारत में लॉन्च के साथ, SED अब अमेरिका, वियतनाम और जॉर्जिया के बाद भारत में भी अपने विस्तार को मजबूत करेगा।