कोल्हापुर (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। महाराष्ट्र के कृषि विभाग ने मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती के गैर-कानूनी उत्पादों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए गैर-कानूनी मच्छर अगरबत्ती ‘कम्फर्ट’ बेचने वाली कई दुकानों पर छापा मारा। छापामारी की एक बड़ी कारवाई कोल्हापुर के गांधीनगर में मनोज नॉवल्टीज़ के खिलाफ की गई, जहां अधिकारियों ने बड़ी संख्या में ‘कम्फर्ट’ मच्छर अगरबत्ती जब्त कीं।
इसके साथ ही, अधिकारियों ने नांदेड़ में भी छापामारी करके मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती के यही गैर-कानूनी उत्पाद जब्त किए। पहली छापामारी खड़कपुरा के गुरु नानक मार्केट में स्थित आर.के सूरतवाला की दुकान पर की गई, जहाँ कम्फर्ट अगरबत्ती के 1,056 पाउच जब्त हुए। दूसरी कार्रवाई में, अन्नाभाऊ साठे चौक के पास पारसेवार प्रोविजन स्टोर्स पर छापा मारा गया, जिसमें कम्फर्ट अगरबत्ती के 10 डिब्बे जब्त किए गए।
यह कार्रवाई महाराष्ट्र के कृषि विभाग द्वारा हाल ही में राज्य में बिना मंज़ूरी और गैर-कानूनी कीटनाशकों वाली मच्छर अगरबत्ती की बिक्री को रोकने के आदेश के बाद की गई। दिसंबर 2025 में विभाग ने एक सर्कुलर जारी करके महाराष्ट्र में सभी कीटनाशक इंस्पेक्टरों को कीटनाशक अधिनियम, 1968 और कीटनाशक नियम, 1971 के अंतर्गत ‘कम्फर्ट’ और ‘स्लीपवेल’ जैसी गैर-कानूनी मच्छर अगरबत्ती बेचने वाले रिटेलर्स, होलसेलर्स और दुकानदारों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
होम इंसेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (HICA) एक नॉन-प्रॉफिट इंडस्ट्री संस्था है, जो भारत में घरेलू कीटनाशकों के सुरक्षित और जवाबदेह इस्तेमाल को बढ़ावा देती है। इस संस्था ने महाराष्ट्र सरकार की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। HICA ने व्यापारियों, रिटेलर्स और होलसेलर्स से गैर-कानूनी मच्छर अगरबत्ती का स्टॉक न रखें और उसकी बिक्री ना करने की अपील की है और आग्रह किया है कि वो केवल सरकार द्वारा रजिस्टर्ड अगरबत्ती ही बेचें।
इस कार्रवाई के बारे में होम इंसेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन (HICA) के ऑनरेरी सेक्रेटरी, जयंत देशपांडे ने कहा, “हम ग्राहकों के फायदे को ध्यान में रखते हुए कम्फर्ट जैसी गैर-कानूनी मच्छर अगरबत्ती के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए महाराष्ट्र सरकार की सराहना करते हैं। अगरबत्ती में डाइमेफ्लुथ्रिन जैसे गैर-कानूनी और बिना मंजूरी वाले कीटनाशक का इस्तेमाल बहुत चिंता की बात है और इससे जनता को खतरा हो सकता है। ये प्रोडक्ट लोगों को बिना कानूनी अनुमति के बेचे जाते हैं और ग्राहकों को भ्रमित करते हैं कि इनका इस्तेमाल सुरक्षित है। इस कार्रवाई का लाभ उन लोगों को होगा, जो गैर-कानूनी और बिना रजिस्ट्रेशन वाली मच्छर अगरबत्ती अनजाने में खरीदते और इस्तेमाल करते हैं। सरकार की कार्रवाई ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि गैर-कानूनी उत्पादों के निर्माताओं और उनकी बिक्री करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। हम इस कार्रवाई को सभी राज्यों में बढ़ाए जाने की अपील करते हैं तथा ग्राहकों को सुझाव देते हैं कि वो सिर्फ रजिस्टर्ड प्रोडक्ट खरीदें, जिनके पैक पर पीछे की तरफ वैध रजिस्ट्रेशन नंबर दिया गया हो।”
कम्फर्ट मच्छर अगरबत्ती महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, गुजरात और दिल्ली में मिलती है। इस साल जनवरी में, महाराष्ट्र के कृषि विभाग ने मुंबई में धूप छांव बनाने वाली कंपनी की प्रोडक्शन यूनिट पर छापा मारा और टेस्टिंग के लिए ‘कम्फर्ट’ अगरबत्ती के सैंपल ज़ब्त किए।
लैबोरेटरी के परीक्षणों में सामने आया कि इन्हें बनाने के लिए एक गैरकानूनी कीटनाशक, डाइमेफ्लुथ्रिन के इस्तेमाल किया जा रहा था, जो मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती में इस्तेमाल करने के लिए अभी तक स्वीकृत नहीं है। अधिकारियों ने यह भी पाया कि धूप छांव ने सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी (सी.आई.बी.आर.सी) से अनिवार्य मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस या मंज़ूरी भी नहीं ली थी, इसलिए इंसेक्टिसाइड्स एक्ट, 1968 और इंसेक्टिसाइड्स रूल्स, 1971 के तहत उनके द्वारा मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती का उत्पादन और बिक्री गैर-कानूनी थी। इसके बाद, महाराष्ट्र के कृषि विभाग ने एक सर्कुलर जारी करके पूरे महाराष्ट्र के सभी इंसेक्टिसाइड इंस्पेक्टरों को राज्य में ‘कम्फर्ट’ और ‘स्लीपवेल’ मच्छर अगरबत्ती के रिटेलर्स और होलसेलर्स के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड और रजिस्ट्रेशन कमेटी (सी.आई.बी.आर.सी) भारत में इंसेक्टिसाइड्स बनाने, इंपोर्ट करने या बेचने से पहले उन्हें मंज़ूरी देने वाली और रजिस्टर करने वाली एक कानूनी अथॉरिटी है, जो कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आती है। मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स अगर अनुमति प्राप्त हैं, तो उनके प्रोडक्ट लेबल पर एक वैध रजिस्ट्रेशन नंबर (जिसकी शुरुआत “सी.आई.आर” से होती है) दिया गया होता है, जिसका सत्यापन ग्राहक कर सकते हैं।
डाइमेफ्लुथ्रिन और मेपरफ्लुथ्रिन जैसे कीटनाशकों को अभी तक अधिकारियों ने मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियों में इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी नहीं दी है। ऐसे बिना मंज़ूरी वाले फॉर्मूलेशन का इस्तेमाल करने वाला कोई भी प्रोडक्ट कानून का उल्लंघन करता है। मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स को मंजूरी देने से पहले आमतौर पर एक सख्त टेस्टिंग और जांच प्रक्रिया से गुजारा जाता है। ‘कम्फर्ट’ और ‘स्लीपवेल’ जैसे गैर-कानूनी प्रोडक्ट्स, जो इस मंजूरी के बिना बेचे जाते हैं, वो इन सुरक्षा उपायों को नज़रअंदाज करते हैं और कानून का उल्लंघन करते हैं।
HICA गैर-कानूनी प्रोडक्ट्स के खिलाफ कार्रवाई में रेगुलेटर्स और एनफोर्समेंट अथॉरिटीज़ को अपना सहयोग देने तथा सुरक्षित एवं उचित घरेलू कीटनाशक समाधानों की पहचान के बारे में ग्राहकों को जागरूक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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