कोलकाता : केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी देश की एकमात्र ऐसी मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपने ही सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (डीए) देने से बचने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया।कोलकाता में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कई लोगों की मौत का आरोप लगाया था, जबकि वास्तव में इस प्रक्रिया के कारण किसी की मृत्यु नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि राज्य के कई कर्मचारी वर्षों से बकाया महंगाई भत्ता नहीं मिलने से निराश थे।पत्रकार वार्ता में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने मुख्यमंत्री पर उच्चतम न्यायालय के आदेश को लेकर मीडिया के सवालों से बचने का आरोप लगाया। अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री यह कहकर जवाब देने से बच रही हैं कि मामला विचाराधीन है, जबकि उच्चतम न्यायालय ने पिछले सप्ताह स्पष्ट आदेश दे दिया है।नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अदालत ने राज्य सरकार को 2008 से 2019 के बीच के महंगाई भत्ता बकाये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। साथ ही कुल बकाये की 25 प्रतिशत राशि इस वर्ष 31 मार्च तक चुकाने को कहा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस बार भी आदेश की अवहेलना की गई तो कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।गौरतलब है कि, उच्चतम न्यायालय ने पांच फरवरी को अपने फैसले में राज्य सरकार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बकाया महंगाई भत्ता देने का निर्देश दिया था। अनुमान है कि इससे राज्य पर तत्काल लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का भार पड़ेगा, जबकि दीर्घकाल में यह राशि करीब 42 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।—————
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