लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। बीरबल साहनी मार्ग स्थित पंडित गोविन्द बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन में आयोजित उत्तरायणी कौथिग 2026 के दशम् दिवस पर बसंत पंचमी की उल्लासपूर्ण छटा देखने को मिली। कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती की स्तुति के साथ हुआ, जिससे पूरे परिसर में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण बन गया।

मुख्य अतिथि मण्डलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत (आईएएस) तथा विशिष्ट अतिथि सदस्य, महिला आयोग उत्तर प्रदेश, रीता शाही ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सुन्दरपाल बिष्ट, गोपाल दत्त जोशी, सुमन रावत एवं मंजू शर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया। महेन्द्र पंत एवं गोविन्द बोरा ने अंगवस्त्र धारण कराकर तथा अध्यक्ष गणेश जोशी व संयोजक के.एन. चन्दोला ने प्रतीक चिन्ह प्रदान कर मुख्य अतिथि को सम्मानित किया।

विशिष्ट अतिथि का स्वागत सुधा चन्दोला, नन्दा रावत एवं दमयन्ती नेगी द्वारा पुष्पगुच्छ, पारंपरिक अंगवस्त्र (पिछोड़ा) एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर किया गया।
मुख्य अतिथि विजय विश्वास पंत ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में सर्वसमाज की संस्कृति फल-फूल रही है। उन्होंने उत्तराखण्ड की सौहार्दपूर्ण, सद्भावना से भरी एवं सर्वसमाज में घुलने-मिलने वाली संस्कृति को लखनऊ में जीवंत बनाए रखने के लिए पर्वतीय महापरिषद के प्रयासों की सराहना की।

पर्वतीय महापरिषद साहित्य प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी में अनेक कवियों ने काव्यपाठ किया। महासचिव महेन्द्र सिंह रावत ने “हे श्वेत वरणा सारदे मां…” का भावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत आयोजित झोड़ा प्रतियोगिता में राम आसरेपुरवा, गोमती नगर से पुष्पा नेगी, गोमती नगर विस्तार भरवारा से दमयंती नेगी तथा शांति नगर नीलमथा से गंगा धपोला के नेतृत्व में आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। आकाशवाणी के कलाकार रहे मोहन सिंह बिष्ट ने उत्तराखण्डी वाद्य यंत्र हुड़का बजाकर कलाकारों का मनोबल बढ़ाया।

उत्तराखण्ड से आए अतिथि कलाकारों फौजी ललित मोहन जोशी, हरू जोशी, खुशी जोशी, चन्द्र प्रकाश एवं राकेश पनेरू ने “टक टका टक कमला…”,”राइफल मेरी कानीमा…”, “नैनिताल की मधुली…”, “अल्मोड़ा अंग्रेज आयो टैक्सी में…”, “मैं घास काटुलो…”, “गोविंदी घुंघुर बजा दे…”जैसे लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसी क्रम में ब्रह्मकमल सांस्कृतिक एवं सामाजिक समिति, इन्दिरा नगर द्वारा प्रस्तुत उत्तराखण्डी लोकगाथा पर आधारित नाटिका “हरूहित” ने दर्शकों को भावुक कर दिया। नाटिका में राजा हरूहित की वीरता, न्यायप्रियता और देवतुल्य सम्मान की कथा का प्रभावशाली मंचन किया गया। जौनसार-भाबर क्षेत्र की प्रस्तुति “गांव का रिवाज” भी विशेष आकर्षण रही।

युवा प्रकोष्ठ द्वारा दिए जाने वाले युवा उत्तरायणी सम्मान से रोशनी भारती को भारती काण्डपाल एवं नीरू काण्डपाल ने तथा विशाल धरमवाल (हल्द्वानी) को शंकर पांडे एवं के.एन. पांडे ने सम्मानित किया। कार्यक्रम के आगामी विशेष आकर्षण के रूप में उत्तराखण्ड से आए क्लासिकल लोकगायक कैलाश कुमार एवं मेघना चन्द्रा की प्रस्तुतियां रहेंगी।
कौथिग के सुचारु एवं सफल आयोजन में के.एन. पाण्डेय, देवेन्द्र मिश्रा, बसन्त भट्ट, शंकर पांडे, चंचल सिंह बोरा, गोविन्द बोरा, आनन्द कपकोटी, ख्याली सिंह, के.एस. रावत, महेन्द्र मेहता, बिशन दत्त जोशी, लक्ष्मण सिंह धामी, भीम सिंह मेहता, के.एन. पाठक, कैलाश बिनवाल, हरीश काण्डपाल, भुवन पाण्डेय, आनन्द भण्डारी, जितेन्द्र उपाध्याय, उमेद सिंह दयोपा, लक्ष्मण सिंह भण्डारी, कमल नेगी, पी.सी. पंत, के.सी. पंत, के.डी. पाण्डेय, राजेश भट्ट सहित अनेक कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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